प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य-पूर्व एशिया में तेजी से बदलते सुरक्षा समीकरणों और बढ़ते सैन्य तनाव के बीच कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह बैठक आज यानी रविवार रात 10 बजे प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास पर आयोजित की जाएगी। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में जारी संघर्ष के बीच भारत की रणनीतिक तैयारियों और वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
मध्य-पूर्व के ताजा हालात और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा
बैठक के एजेंडे में सबसे ऊपर मध्य-पूर्व में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा का मुद्दा है। हालिया सैन्य गतिविधियों और जवाबी हमलों के कारण क्षेत्र में हवाई यातायात और सामान्य जीवन प्रभावित हुआ है। सूत्रों के अनुसार, बैठक में विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भारतीय दूतावासों के साथ समन्वय और आवश्यकता पड़ने पर निकासी योजना (Evacuation Plan) पर चर्चा कर सकते हैं। विशेष रूप से उन खिलाड़ियों और पेशेवरों की स्थिति पर भी नजर रखी जा रही है जो वर्तमान में वहां मौजूद हैं।
ऊर्जा सुरक्षा और कच्चे तेल की आपूर्ति पर प्रभाव
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक मध्य-पूर्व के देशों पर निर्भर है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता आने की आशंका है। सीसीएस की बैठक में ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को निर्बाध बनाए रखने और रणनीतिक तेल भंडार की स्थिति की समीक्षा की जा सकती है। अधिकारियों के अनुसार, सरकार इस बात का आकलन कर रही है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसके क्या प्रभाव पड़ सकते हैं।
रणनीतिक समुद्री मार्गों और आपूर्ति लाइनों की निगरानी
क्षेत्र में जारी सैन्य ऑपरेशनों के कारण समुद्री व्यापार मार्गों, विशेष रूप से लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा जोखिम बढ़ गए हैं। बैठक में भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल द्वारा इन मार्गों की निगरानी बढ़ाने पर चर्चा होने की संभावना है। भारत के लिए इन व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां से बड़ी मात्रा में माल ढुलाई और कच्चे तेल का आयात होता है। रक्षा मंत्रालय के अधिकारी इस संबंध में अपनी रिपोर्ट पेश कर सकते हैं।
भारत का कूटनीतिक रुख और क्षेत्रीय स्थिरता
भारत ने हमेशा से ही अंतरराष्ट्रीय विवादों को संवाद और कूटनीति के माध्यम से सुलझाने का समर्थन किया है। सीसीएस की बैठक में भारत के पारंपरिक संतुलित रुख और क्षेत्रीय शांति बहाली के लिए वैश्विक स्तर पर किए जा रहे प्रयासों पर भी मंथन होगा। सरकार का प्रयास है कि इस संकट के समय में भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर स्थिरता के लिए काम करे। इस बैठक में गृह मंत्री, रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री और वित्त मंत्री के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) भी शामिल होंगे।