अमेरिका की ओर से बार-बार इस तरह के दावे किए जाते रहे हैं कि ईरान की सैन्य क्षमता को पूरी तरह से ध्वस्त किया जा चुका है। इस बीच एक नई इंटेलिजेंस रिपोर्ट ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। एक नए इंटेलिजेंस आकलन के अनुसार, अमेरिकी और इजरायली सेनाओं की ओर से हफ्तों तक जोरदार हवाई हमले किए जाने के बावजूद, ईरान के पास अभी भी हजारों मिसाइलें और घातक ड्रोन मौजूद हैं। यह आकलन ट्रंप प्रशासन के उन बड़े-बड़े दावों के विपरीत है, जिनमें उन्होंने जंग में अपनी जीत का दावा किया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके रक्षा सचिव पीट हेगसेथ कई बार इस तरह के दावे कर चुके हैं कि ईरानी वायुसेना पूरी तरह से खत्म हो चुकी है और नौसेना समुद्र की गहराइयों में समा चुकी है।
ईरान की सैन्य क्षमता पर मुख्य आंकड़े
डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी का बड़ा खुलासा
बिजनेस इनसाइडर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी के निदेशक और मरीन कॉर्प्स के लेफ्टिनेंट जनरल जेम्स एडम्स ने कहा है कि तेहरान के पास अभी भी हजारों की संख्या में घातक मिसाइलें और वन-वे अटैक ड्रोन मौजूद हैं। ईरान के ये हथियार मध्य पूर्व में स्थित अमेरिकी ठिकानों और उसके सहयोगी देशों के लिए लगातार खतरा बने हुए हैं। जनरल जेम्स एडम्स ने पिछले हफ़्ते 'हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी' के सामने दिए गए अपने बयान में यह बात कही थी। अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, तेहरान अपने जंगी हथियारों को बचाए रखने में कामयाब रहा है भले ही युद्ध में हुई क्षति और हथियारों के इस्तेमाल के कारण उसकी क्षमताओं में कुछ कमी आई हो।
सीएनएन की पड़ताल और मिसाइल लॉन्चरों की स्थिति
अमेरिकी अधिकारी का बयान पिछले हफ्ते CNN की ओर से की गई एक पड़ताल की पुष्टि करता है। इस पड़ताल में यह सामने आया था कि 5 हफ्तों से भी ज्यादा समय तक अमेरिकी और इजरायली सेनाओं की ओर से रोजाना ज़ोरदार हमले किए जाने के बावजूद, ईरान के लगभग आधे मिसाइल लॉन्चर अभी भी सुरक्षित हैं और उसके जखीरे में हजारों ड्रोन और मिसाइलें मौजूद हैं। यह रिपोर्ट दर्शाती है कि व्यापक हवाई हमलों के बाद भी ईरान की जवाबी हमला करने की क्षमता काफी हद तक बरकरार है।
ईरान की क्रूज मिसाइलें और तटीय सुरक्षा
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की तटीय सुरक्षा के लिए तैनात क्रूज मिसाइलों का भी एक बड़ा हिस्सा सुरक्षित बचा हुआ है। यह दावा इस बात से मेल खाता है कि अमेरिका ने अपने हवाई हमलों का मुख्य निशाना तटीय सैन्य ठिकानों को नहीं बनाया था, हालांकि उन्होंने कुछ जहाज़ों पर हमले ज़रूर किए थे। ये मिसाइलें ईरान के लिए आज भी बड़ी ताकत बनी हुई हैं। अमेरिकी और इजरायली सेनाओं के जोरदार हवाई हमलों के बावजूद ईरान अपनी सैन्य संपत्तियों को बचाने में सफल रहा है।