विज्ञापन

ईरान-इजराइल संघर्ष: ट्रंप ने सैन्य हमलों को ईरानी जनता की आजादी बताया

ईरान-इजराइल संघर्ष: ट्रंप ने सैन्य हमलों को ईरानी जनता की आजादी बताया
विज्ञापन

मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हुए हालिया हमलों को लेकर एक बड़ा बयान जारी किया है। शनिवार को वाशिंगटन पोस्ट के साथ एक टेलीफोनिक बातचीत में ट्रंप ने स्पष्ट किया कि तेहरान पर किए गए सैन्य हमलों का प्राथमिक उद्देश्य ईरानी नागरिकों के लिए 'आजादी' सुनिश्चित करना है। यह बयान उस समय आया है जब इजराइल और अमेरिका की संयुक्त सेनाओं ने ईरान के भीतर कई रणनीतिक ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं। इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के आधिकारिक आवास के निकटवर्ती क्षेत्रों और पूर्वी ईरान में एक स्कूल को निशाना बनाया गया है। आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, इन सैन्य कार्रवाइयों में कम से कम 50 लोगों की मृत्यु हुई है।

ट्रंप का 'आजादी' वाला बयान और सैन्य चेतावनी

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संबोधन में ईरानी जनता के प्रति सहानुभूति व्यक्त करते हुए कहा कि वे केवल लोगों के लिए स्वतंत्रता चाहते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका लक्ष्य एक सुरक्षित देश की स्थापना करना है और वे इसे हासिल करके रहेंगे। सैन्य अभियान शुरू होने से ठीक पहले ट्रंप ने ईरानी सशस्त्र बलों को एक सख्त चेतावनी भी जारी की थी। उन्होंने ईरानी सैनिकों से हथियार डालने और आत्मसमर्पण करने का आह्वान किया था। ट्रंप ने प्रस्ताव दिया था कि यदि ईरानी सेना सरेंडर करती है तो उन्हें रियायत दी जाएगी, अन्यथा उन्हें 'निश्चित मृत्यु' का सामना करना पड़ेगा। ट्रंप ने ईरानी नागरिकों से सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील करते हुए कहा कि यह ऑपरेशन जनता के लिए अपनी सरकार पर नियंत्रण पाने का एक ऐतिहासिक अवसर है।

तेहरान में सुप्रीम लीडर के आवास पर भारी तबाही

एयरबस डिफेंस एंड स्पेस द्वारा जारी की गई हाई-रिजॉल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरों ने तेहरान में हुई तबाही की भयावहता को उजागर किया है और शनिवार सुबह हुए हमलों के बाद ली गई इन तस्वीरों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के आधिकारिक परिसर के भीतर व्यापक विनाश देखा जा सकता है। सैटेलाइट इमेजरी में कई इमारतें पूरी तरह ध्वस्त नजर आ रही हैं और सरकारी कॉम्प्लेक्स से धुएं का काला गुबार उठता दिखाई दे रहा है और विशेषज्ञों के अनुसार, परिसर के भीतर स्थित वे महत्वपूर्ण ढांचे, जो लंबे समय से ईरानी नेतृत्व के केंद्रीय हब के रूप में कार्य कर रहे थे, अब पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। यह परिसर ईरान की सत्ता का सबसे सुरक्षित और महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता था, जिस पर हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

नागरिक ठिकानों और स्कूल पर हमले के आरोप

ईरान के विदेश मंत्री सईद अब्बास अराघची ने इस सैन्य कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। अराघची के अनुसार, इजराइली और अमेरिकी हमलों ने न केवल सैन्य ठिकानों बल्कि नागरिक बुनियादी ढांचे को भी निशाना बनाया है। उन्होंने दावा किया कि पूर्वी ईरान में लड़कियों के एक प्राइमरी स्कूल पर हुए हमले में दर्जनों निर्दोष लोगों की जान चली गई है। ईरानी अधिकारियों ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करार दिया है। हालांकि, अमेरिकी और इजराइली पक्ष ने इन हमलों को सटीक और रणनीतिक बताया है, जिनका उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना था और हफ्तों से चल रही परमाणु वार्ता और क्षेत्रीय सैन्य गतिविधियों के बाद यह हमला दोनों पक्षों के बीच तनाव के चरम पर पहुंचने का संकेत है।

ईरान की जवाबी कार्रवाई और क्षेत्रीय स्थिति

इजराइल और अमेरिका के संयुक्त हमले के कुछ ही घंटों बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। ईरानी सेना ने मिडिल ईस्ट में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर हमले किए हैं। इस जवाबी हमले ने पूरे क्षेत्र में एक पूर्ण युद्ध की आशंका को बढ़ा दिया है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। इस बीच, भारत सहित कई वैश्विक शक्तियों ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की है और संयम बरतने की अपील की है और क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने वैश्विक तेल आपूर्ति और कूटनीतिक संबंधों को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। वर्तमान में दोनों पक्षों की ओर से सैन्य तैनाती बढ़ाई जा रही है, जिससे स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई है।

विज्ञापन