ईरान और इजराइल के बीच जारी सैन्य संघर्ष का असर अब भारतीय शेयर बाजार के विभिन्न क्षेत्रों, विशेष रूप से कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और पाइप कंपनियों पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, माल ढुलाई के खर्च में वृद्धि और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आई रुकावटों ने इन कंपनियों की परिचालन लागत को काफी बढ़ा दिया है। अधिकारियों और बाजार आंकड़ों के अनुसार, इस भू-राजनीतिक अस्थिरता ने कंपनियों के मुनाफे और भविष्य की मांग को लेकर चिंताएं पैदा कर दी हैं।
कच्चे माल और उत्पादन लागत में वृद्धि
कच्चे तेल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी का सीधा असर प्लास्टिक, रेजिन, इन्सुलेशन और पैकेजिंग सामग्री जैसे आवश्यक कच्चे माल पर पड़ा है। ये सामग्रियां कंज्यूमर ड्यूरेबल्स के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ईंधन की कीमतों में वृद्धि के कारण परिवहन और लॉजिस्टिक्स का खर्च भी बढ़ गया है। इसके अतिरिक्त, हवाई क्षेत्र और समुद्री मार्गों में व्यवधान के कारण माल ढुलाई महंगी हो गई है, जिससे कंपनियों को अपनी इन्वेंट्री बनाए रखने के लिए अधिक खर्च करना पड़ रहा है।
सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स की चुनौतियां
कंज्यूमर ड्यूरेबल्स क्षेत्र के लिए सबसे बड़ी चिंता निर्यात और आयात चक्र में आने वाली बाधाएं हैं। यदि मध्य पूर्व का हवाई क्षेत्र लंबे समय तक बंद रहता है, तो वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही (Q1FY27) में निर्यात बिक्री पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि अधिकांश व्यापार समुद्री मार्गों से होता है, लेकिन हवाई माल ढुलाई की लागत में वृद्धि से कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ रहा है और आपूर्ति श्रृंखला में देरी के कारण कंपनियों को अधिक स्टॉक रखने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे उनकी कार्यशील पूंजी की लागत बढ़ गई है।
रूम एयर कंडीशनर सेक्टर पर प्रभाव
रूम एयर कंडीशनर (RAC) क्षेत्र के लिए यह संकट ऐसे समय में आया है जब मार्च का महीना उत्पादन के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। एलपीजी की कमी एक प्रमुख समस्या के रूप में उभरी है, जो हीट एक्सचेंजर के निर्माण के लिए आवश्यक है। इसके समाधान के लिए कुछ कंपनियां ऑक्सीएसिटिलीन और पीएनजी जैसे वैकल्पिक ईंधनों का उपयोग कर रही हैं। रेजिन और औद्योगिक गैसों की बढ़ती कीमतों ने उत्पादन लागत को और बढ़ा दिया है, जिससे कंपनियां अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ाने पर विचार कर रही हैं।
शेयर बाजार में भारी गिरावट
3% की गिरावट दर्ज की गई है। व्यक्तिगत शेयरों की बात करें तो एम्बर एंटरप्राइजेज और पीजी इलेक्ट्रोप्लास्ट के शेयरों में 21% तक की भारी गिरावट आई है। इसी तरह, वोल्टास के शेयरों में 20%, ब्लू स्टार में 16% और हैवेल्स में 12% की कमी देखी गई है। पाइप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों पर भी इसी तरह का दबाव देखा जा रहा है, जहां कुछ स्टॉक्स 21% तक टूट चुके हैं।