ईरान ने एक बार फिर अपनी सैन्य ताकत और रणनीतिक गहराई का प्रदर्शन करते हुए अमेरिका और उसके सहयोगियों को कड़ा संदेश दिया है। ईरान के सरकारी टीवी ने हाल ही में अपने गुप्त भूमिगत गोदामों का एक वीडियो जारी किया है, जिसमें भारी मात्रा में अराश ड्रोन भरे हुए दिखाई दे रहे हैं। अराश ड्रोन को दुनिया का सबसे लंबी दूरी का आत्मघाती ड्रोन माना जाता है, जो लंबी दूरी तक सटीक हमला करने में सक्षम है। इस वीडियो के साथ एक संदेश भी जारी किया गया है, जिसमें कहा गया है कि अमेरिका के सैन्य ठिकाने इन ड्रोन्स के खौफ से लगातार दहलते रहेंगे।
अमेरिकी ऑपरेशनों की विफलता और भारी नुकसान
अमेरिका ने ईरान के खिलाफ एक ऐसा युद्ध छेड़ रखा है जिसमें बारूद और संसाधनों का बेतहाशा खर्च हो रहा है, लेकिन परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं मिल रहे हैं। अमेरिका अब तक इस युद्ध में खरबों डॉलर खर्च कर चुका है, लेकिन वह अपने उस मुख्य मकसद को पूरा करने में विफल रहा है जिसके लिए यह संघर्ष शुरू किया गया था। ईरान का मिसाइल प्रोग्राम और उसका यूरेनियम भंडार आज भी उसके भूमिगत ठिकानों में पूरी तरह सुरक्षित है। इसके विपरीत, ईरान की सैन्य क्षमता में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिसका प्रमाण अमेरिका के मित्र देशों तक पहुंच रही ईरानी मिसाइलें हैं।
सुपरपावर अमेरिका के अब तक के सबसे बड़े और सबसे महंगे सैन्य ऑपरेशन, जैसे मिडनाइट हैमर, एपिक फ्यूरी और प्रोजेक्ट फ्रीडम, अरब के रेगिस्तान में विफल साबित हुए हैं और महीनों तक चली लगातार बमबारी, अरबों डॉलर के सटीक हथियारों और स्टेल्थ विमानों के इस्तेमाल के बावजूद, अमेरिका ईरान की मिसाइल क्षमता को मामूली नुकसान भी नहीं पहुंचा सका है। जिन भूमिगत ठिकानों को तबाह करने का दावा अमेरिका ने किया था, ईरान ने उन्हें कुछ ही हफ्तों में फिर से क्रियाशील कर दिया है और इसका नतीजा यह हुआ है कि पूरे अरब क्षेत्र पर ईरान की मिसाइलों का खतरा मंडरा रहा है।
अमेरिकी बेस पर हमले और ईरानी इंजीनियरिंग
जॉर्डन से लेकर कुवैत और इराक तक, अमेरिका के हर सैन्य बेस पर ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलें और घातक ड्रोन कहर बनकर टूट रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप जिसे महज एक छोटी झड़प बताकर अपने वोटरों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं, वह असलियत में अरब क्षेत्र में अमेरिकी प्रभुत्व के लिए एक बड़ी चुनौती है और अमेरिका की नाकामी का एक बड़ा कारण ईरान के अभेद्य भूमिगत ठिकाने हैं। ट्रंप ने सोचा था कि भारी बमबारी से ईरान को घुटनों पर ला देंगे, लेकिन इजराइली इनपुट पर किए गए हमलों के बावजूद ईरान ने करमनशाह जैसे इलाकों में हुए नुकसान की भरपाई कुछ ही हफ्तों में कर ली। ईरान का गाइडेंस और कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम आज भी 100 प्रतिशत कुशलता से काम कर रहा है।
सीआईए का दावा है कि अमेरिका जिस गति से सुरंगों के दरवाजों को नष्ट कर रहा है, ईरान उससे दोगुनी तेजी से नई सुरंगें और ढांचे खड़े कर रहा है। इसका मतलब है कि अमेरिका एक-एक सटीक बम पर करोड़ों डॉलर खर्च कर रहा है, जबकि ईरान अपनी सस्ती और प्रभावी तकनीक से न केवल अपने ठिकानों को बचा रहा है, बल्कि अमेरिका को अरबों का नुकसान भी पहुंचा रहा है और जॉर्डन के अमेरिकी बेस पर हुआ हमला इस बात का पुख्ता सबूत है कि ईरान के पास न तो हथियारों की कमी है और न ही उसकी मारक क्षमता में कोई गिरावट आई है।
ट्रंप का बयान और ईरान का मिसाइल भंडार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस स्थिति पर कहा है कि "मैं इसे एक झड़प कहता हूं। " उन्होंने यह भी कहा कि वे जल्द ही समझौते के लिए तैयार हो जाएंगे और हालांकि, उनके दावों और ज़मीनी हकीकत में बड़ा अंतर दिख रहा है। ईरान की असली ताकत उसका विशाल मिसाइल भंडार है। इसमें शॉर्ट रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें जैसे फतेह-110, फतेह-313, जुल्फेकार, देजफुल और कियाम शामिल हैं, जिनकी रेंज 150 से 1000 किलोमीटर तक है।
इसके अलावा, ईरान 1100 से 2000 किलोमीटर की रेंज वाली मीडियम रेंज बैलिस्टिक मिसाइलों का भी उपयोग कर रहा है, जिनमें शहाब-3, गद्र-110, एमाद, खैबर शिकन और हज कासिम शामिल हैं। ईरान ने अब 2000 से 2500 किलोमीटर की दूरी तय करने वाली इंटरमीडिएट रेंज की सेजिल और खुर्रमशहर मिसाइलों को भी तैनात कर दिया है। हाइपरसोनिक मिसाइल फतेह लॉन्च के लिए तैयार है और इसके उन्नत संस्करण फतेह-2 पर भी काम चल रहा है। क्रूज़ मिसाइलों में सौमार, होवेजेह और पावेह सक्रिय हैं, जबकि एंटी-शिप मिसाइलों में नूर, कादिर, गदीर और अबू महदी 100 से 1000 किलोमीटर की रेंज में तैनात हैं।
जवाबी कार्रवाई की रणनीति और ताजा हमले
ईरान ने जवाबी कार्रवाई के लिए तीन श्रेणियां निर्धारित की हैं। पहली श्रेणी में इजराइल, बहरीन और कतर को रखा गया है क्योंकि यहाँ अमेरिका के मुख्य सैन्य बेस हैं। दूसरी श्रेणी में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत जैसे देश शामिल हैं जहाँ अमेरिका के व्यापारिक हित हैं। तीसरी श्रेणी में इराक, सीरिया और जॉर्डन को रखा गया है जहाँ ईरान के प्रॉक्सी सक्रिय हैं। कुवैत की सेना ने ईरानी ड्रोन हमलों से भारी नुकसान की बात कही है, जिसकी पुष्टि सैटेलाइट तस्वीरों से भी हो रही है।
जवाब में अमेरिका ने बुशहर न्यूक्लियर प्लांट को निशाना बनाया, लेकिन मुख्य प्लांट सुरक्षित रहा और केवल पास का एक बिजली स्टेशन नष्ट हुआ। खुजेस्तान के रामशीर, अहवाज़ और सिरिक में भी धमाके हुए हैं। समुद्री मोर्चे पर अमेरिकी नौसेना ने ईरान से जुड़े 9 कमर्शियल जहाज़ों का रास्ता बदला है। हालांकि, इन हमलों के बावजूद ईरान की आक्रामकता कम नहीं हुई है। अमेरिका जितना ईरान के बुनियादी ढांचे पर हमला कर रहा है, ईरान उतनी ही तेजी से कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बना रहा है। ट्रंप के दावे कि ईरान की सैन्य शक्ति खत्म हो गई है, ज़मीनी हकीकत के सामने खोखले साबित हो रहे हैं।