अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के बजाय और अधिक गहराता जा रहा है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम को भले ही आगे बढ़ा दिया हो, लेकिन धरातल पर हालात अभी भी अत्यंत चिंताजनक बने हुए हैं। इस तनाव का मुख्य केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकाबंदी है। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि यह नाकेबंदी जारी रहेगी। इस स्थिति ने मध्य-पूर्व में एक अभूतपूर्व संकट पैदा कर दिया है। जहां एक ओर दुनिया के कई हिस्सों में तेल की कमी और बढ़ती कीमतें समस्या बनी हुई हैं, वहीं ईरान के पास तेल का इतना अधिक भंडार जमा हो गया है कि उसे रखने के लिए जगह कम पड़ रही है।
होर्मुज में अमेरिकी नौसेना की सख्त घेराबंदी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी नौसेना ने होर्मुज स्ट्रेट में कड़ी नाकेबंदी की है। इस घेराबंदी के कारण ईरान के तेल टैंकरों का आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, ईरानी बंदरगाहों की ओर आने-जाने वाले जहाजों पर चौबीसों घंटे कड़ी निगरानी रखी जा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, अब तक 34 से अधिक जहाजों को अपना रास्ता बदलने के लिए मजबूर किया गया है। इस सैन्य अभियान की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई दशकों में पहली बार तीन अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर एक साथ इस क्षेत्र में तैनात किए गए हैं।
निर्यात ठप होने से भंडारण का संकट
ईरान के तेल निर्यात का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा 'खार्ग द्वीप' (Kharg Island) से होकर गुजरता है। अमेरिकी नाकेबंदी के कारण वर्तमान में यहां से कोई भी जहाज बाहर नहीं जा पा रहा है। निर्यात लगभग पूरी तरह ठप हो चुका है, लेकिन तेल का उत्पादन निरंतर जारी है। इसका परिणाम यह हुआ है कि ईरान के स्टोरेज टैंक तेजी से भर रहे हैं। स्थिति इतनी विकट हो गई है कि ईरान को अपने पुराने और बेकार पड़े टैंकरों को फिर से चालू करना पड़ा है ताकि उन्हें समुद्र में 'फ्लोटिंग स्टोरेज' के रूप में इस्तेमाल किया जा सके। हालांकि, यह व्यवस्था भी नाकाफी है क्योंकि इससे केवल दो या तीन दिन के अतिरिक्त उत्पादन को ही संभाला जा सकता है।
तेल के कुओं को स्थायी नुकसान का खतरा
यदि ईरान में तेल भंडारण की जगह पूरी तरह समाप्त हो जाती है, तो उसे मजबूरी में अपने तेल के कुओं (Oil Wells) को बंद करना पड़ेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह ईरान के लिए सबसे घातक स्थिति होगी और यदि तेल के कुएं लंबे समय के लिए बंद कर दिए जाते हैं, तो उनसे दोबारा उसी क्षमता के साथ उत्पादन शुरू करना लगभग असंभव हो जाता है। इससे ईरान की लाखों बैरल प्रतिदिन की उत्पादन क्षमता हमेशा के लिए खत्म हो सकती है और यह न केवल वर्तमान आर्थिक नुकसान है, बल्कि आने वाले कई वर्षों के लिए ईरान की अर्थव्यवस्था को एक बड़ा झटका दे सकता है।
ईरान के पास उपलब्ध सीमित विकल्प
इस संकट से निपटने के लिए ईरान के पास कुछ सीमित और जोखिम भरे विकल्प बचे हैं। वह जहाजों की पहचान छिपाकर या दूसरे देशों के माध्यम से 'शैडो ट्रेड' (Shadow Trade) करने की कोशिश कर सकता है, लेकिन अमेरिकी निगरानी के कारण यह अत्यंत कठिन है। दूसरा विकल्प समुद्र में पुराने टैंकरों का उपयोग कर भंडारण करना है, जो पहले ही अपनी सीमा तक पहुंच चुका है। सबसे नुकसानदेह विकल्प उत्पादन को पूरी तरह बंद करना (Shut-in) है। वर्तमान परिस्थितियों में, राजनयिक रास्ता और बातचीत के जरिए तनाव कम करना ही एकमात्र विकल्प दिखाई देता है जिससे तेल के इस बड़े नुकसान को रोका जा सके। अब ईरान के लिए यह लड़ाई केवल न्यूक्लियर या मिसाइल प्रोग्राम तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने सबसे बड़े संसाधन 'तेल' को बचाने की एक नई तरह की जंग बन गई है।