आम आदमी पार्टी (आप) को एक बहुत बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों ने एक साथ पार्टी का साथ छोड़ दिया है। इन सांसदों में राघव चड्ढा जैसे प्रमुख चेहरे भी शामिल हैं। विशेष बात यह है कि राघव चड्ढा सहित तीन सांसदों ने आम आदमी पार्टी से इस्तीफा देने के तुरंत बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सदस्यता ग्रहण कर ली है। इस बड़े घटनाक्रम के बाद देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं।
विपक्ष का भाजपा पर हमला: डीएमके नेता का बयान
आम आदमी पार्टी के सात सांसदों—राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह और स्वाति मालीवाल जैसे प्रमुख चेहरों के पार्टी छोड़ने पर डीएमके नेता टीकेएस एलंगोवन ने भाजपा पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने कहा, "यह भाजपा है। सांसदों और विधायकों का सबसे बड़ा खरीदार। वे किसी भी तरह की धोखाधड़ी का सहारा लेंगे। उन्हें लोकतंत्र में कोई विश्वास नहीं है। वे किसी भी तरह सत्ता हथियाना चाहते हैं। सत्ता में आने के लिए वे हर तरह के गलत, हर तरह के अलोकतांत्रिक, संविधान विरोधी काम करेंगे और यह भाजपा है।
भाजपा का केजरीवाल पर भ्रष्टाचार और 'शीश महल' को लेकर वार
भाजपा नेता प्रवेश वर्मा ने अरविंद केजरीवाल पर तीखा हमला बोलते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
तरुण चुघ ने सिद्धांतों और पंजाब सरकार पर उठाए सवाल
भाजपा नेता तरुण चुघ ने राघव चड्ढा और अशोक मित्तल समेत 7 सांसदों के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी के मूलभूत सिद्धांतों और मूल्यों को दांव पर लगा दिया है। उन्होंने आगे कहा, "यहां तक कि अदालत भी मानती है कि अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में भ्रष्ट हैं।
समाजवादी पार्टी ने बताया रणनीतिक गलती
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता डॉ. आशुतोष वर्मा ने इस घटनाक्रम को दुखद बताते हुए आम आदमी पार्टी की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “यह दुखद खबर है, लेकिन इससे सबक भी मिलता है। जब आम आदमी पार्टी पहली बार सत्ता में आई, तो उसने स्वच्छ राजनीति की बात की। उसने गरीबों, दबे-कुचलों, झुग्गीवासियों, सड़क विक्रेताओं, ऑटो चालकों, दलितों, पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यकों के वोट जीते। आप दिल्ली में तीन बार भारी बहुमत से मुख्यमंत्री बने और पंजाब में 92 सीटें जीतीं। लेकिन जब राज्यसभा सांसद बनाने का मौका मिलता है, तो आपको राघव चड्ढा, मित्तल, गुप्ता और स्वाति मालीवाल याद आते हैं। तो ये गरीब, पिछड़े और दबे-कुचले लोग कहां जाएंगे? क्या ये कार्यकर्ता सिर्फ आपका झंडा बुलंद करने के लिए यहां खड़े हैं? अगर आपने उनके बारे में सोचा होता, तो हमें इस दिन का सामना नहीं करना पड़ता।