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ईरान ने ठुकराई पाकिस्तान की मध्यस्थता, ट्रंप की शर्तों पर वार्ता से इनकार

ईरान ने ठुकराई पाकिस्तान की मध्यस्थता, ट्रंप की शर्तों पर वार्ता से इनकार
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ईरान ने अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे भीषण संघर्ष के बीच पाकिस्तान द्वारा की जा रही मध्यस्थता की कोशिशों को बड़ा झटका दिया है। तेहरान ने न केवल पाकिस्तान की मध्यस्थता के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रखी गई शर्तों को भी मानने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने पाकिस्तान में किसी भी प्रकार की कूटनीतिक बैठक आयोजित करने के विचार को भी सिरे से खारिज कर दिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी कूटनीतिक साख बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

ईरान द्वारा मध्यस्थता प्रस्ताव का खंडन और कूटनीतिक गतिरोध

राजनयिक सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करने का प्रस्ताव दिया था। पाकिस्तान का लक्ष्य डोनाल्ड ट्रंप के संदेश को तेहरान तक पहुँचाना और युद्ध विराम की स्थिति पैदा करना था। हालांकि, ईरान ने इस पहल पर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी है और तेहरान के इस कड़े रुख ने इस्लामाबाद की उन उम्मीदों पर पानी फेर दिया है, जिसमें वह खुद को क्षेत्र के एक प्रमुख शांतिदूत के रूप में स्थापित करना चाहता था। ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह वर्तमान परिस्थितियों में किसी भी ऐसी शर्त पर बातचीत नहीं करेगा जो उसके संप्रभु हितों के खिलाफ हो।

सैन्य संघर्ष में तेजी और अमेरिकी विमानों को गिराने का दावा

मध्यस्थता की कोशिशों के विफल होने के बीच, ईरान ने मध्य पूर्व में इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर अपने हमले तेज कर दिए हैं। अपुष्ट रिपोर्टों और स्थानीय मीडिया दावों के अनुसार, पिछले 24 घंटों के दौरान ईरान ने अमेरिकी वायुसेना के एफ-35 और एफ-15 सहित दो लड़ाकू विमानों, एक ए-10 विमान और कई सैन्य हेलीकॉप्टरों को निशाना बनाया है। इन दावों ने क्षेत्र में तनाव को और अधिक बढ़ा दिया है। हालांकि, अमेरिका की ओर से इन नुकसानों की आधिकारिक पुष्टि की प्रतीक्षा है, लेकिन ईरान की ओर से बढ़ती आक्रामकता यह संकेत देती है कि वह फिलहाल कूटनीतिक समाधान के बजाय सैन्य प्रतिरोध को प्राथमिकता दे रहा है।

पाकिस्तान विदेश मंत्रालय की आधिकारिक प्रतिक्रिया और खंडन

इन खबरों के बीच पाकिस्तान सरकार अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि को लेकर चिंतित नजर आ रही है। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंदराबी ने एक आधिकारिक बयान जारी कर उन मीडिया रिपोर्टों को खारिज कर दिया है जिनमें मध्यस्थता के विफल होने का दावा किया गया था। प्रवक्ता ने इन रिपोर्टों को "बेबुनियाद" और "कल्पना का हिस्सा" करार दिया है और पाकिस्तान का कहना है कि वह क्षेत्र में शांति के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी प्रकार की गलत सूचना कूटनीतिक प्रयासों को बाधित कर सकती है। इसके बावजूद, अंतरराष्ट्रीय मीडिया में पाकिस्तान की विफलता को लेकर चर्चाएं तेज हैं।

डॉन अखबार की रिपोर्ट और आंतरिक कूटनीतिक चुनौतियां

पाकिस्तान के प्रतिष्ठित समाचार पत्र 'डॉन' ने भी एक अज्ञात पाकिस्तानी अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट दी है कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच संदेशों का आदान-प्रदान तो हुआ, लेकिन ईरान की ओर से कोई उत्साहजनक संकेत नहीं मिले हैं और अधिकारी के अनुसार, ईरान के सैन्य और नागरिक बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान के बावजूद तेहरान ने बातचीत के आह्वान पर सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी है। पाकिस्तान और चीन दोनों ने ईरान से संवाद में शामिल होने की अपील की थी, लेकिन अब तक तेहरान ने अपनी तैयारियों का कोई संकेत नहीं दिया है। यह स्थिति पाकिस्तान के नेतृत्व के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है क्योंकि उन्होंने ट्रंप प्रशासन को मध्यस्थता का भरोसा दिया था।

क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य और भविष्य की अनिश्चितता

ज्ञात हो कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमलों के बाद से स्थिति अत्यंत संवेदनशील बनी हुई है। उन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई और कई शीर्ष सैन्य कमांडरों के मारे जाने की खबरें आई थीं, जिसके बाद ईरान ने प्रतिशोध की कसम खाई थी। वर्तमान में, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और विदेश मंत्री अब्बास अरागची के साथ पाकिस्तानी नेतृत्व का संपर्क बना हुआ है, लेकिन धरातल पर कोई ठोस परिणाम निकलता नहीं दिख रहा है। पाकिस्तान अब तक खुद को इस सीधे युद्ध से दूर रखने में सफल रहा है, लेकिन मध्यस्थता में विफलता उसकी विदेश नीति के लिए एक बड़ा झटका मानी जा रही है।

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