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ईरान की आखिरी चेतावनी: होर्मुज से सात समंदर तक अमेरिकी ठिकानों पर मंडराया खतरा

ईरान की आखिरी चेतावनी: होर्मुज से सात समंदर तक अमेरिकी ठिकानों पर मंडराया खतरा
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खाड़ी देशों में बारूद की गूंज अब एक बड़े महायुद्ध का अलार्म बजा रही है। पिछले 100 घंटों से जारी इस घमासान ने यह साफ कर दिया है कि ईरान घुटने टेकने के मूड में नहीं है, बल्कि वह काउंटर अटैक के जरिए पूरे अरब क्षेत्र में कोहराम मचाने के लिए तैयार है। इसका प्रमाण बहरीन और कुवैत पर हुए भीषण ड्रोन हमलों से मिल चुका है। मुज्तबा ने अमेरिका को आखिरी चेतावनी देकर उसकी धड़कनें बढ़ा दी हैं। ईरान का कहना है कि अगर अमेरिका ने नाकाबंदी नहीं हटाई, तो जंग सिर्फ फारस की खाड़ी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि विनाश का यह चक्रव्यूह अब 7 समंदर तक फैलेगा। अब दुनिया के सामने यह बड़ा सवाल है कि क्या ट्रंप की गन बोट डिप्लोमेसी ईरान को झुका पाएगी या आधी रात का यह संग्राम तीसरे विश्व युद्ध का नया मोर्चा खोलने जा रहा है।

युद्ध का विस्तार और ईरान की रणनीति

बारूद की गूंज भले ही खाड़ी से उठी है, लेकिन इसकी प्रतिध्वनि सात समंदर तक सुनाई देने की चेतावनी दी जा रही है और जहां कूटनीति विफल होती है, वहां युद्ध अपना स्थान बना लेता है और युद्ध का दायरा जितना अधिक बढ़ेगा, वैश्विक सुरक्षा के लिए चुनौती उतनी ही गहरी होती जाएगी। ईरान ने इसके स्पष्ट संकेत दे दिए हैं। पिछले चार दिनों के भीतर ईरान ने पश्चिमी एशिया के पांच प्रमुख देशों पर हमले किए हैं, जिनमें बहरीन, कुवैत, इराक, यूएई और ओमान शामिल हैं और ईरान ने ड्रोन और मिसाइलें भेजकर यह साबित कर दिया है कि हर देश उसकी मारक क्षमता के भीतर है। यह माना जा रहा है कि ईरान ने अभी सिर्फ रिहर्सल किया है और असली तबाही अभी बाकी है। विशेष बात यह है कि ईरान ने सैन्य ठिकानों के साथ-साथ उन स्थानों को भी निशाना बनाया है जहां आम नागरिक मौजूद होते हैं, जिसका अर्थ है कि अब नागरिक भी ईरान के निशाने पर हो सकते हैं।

होर्मुज में आधी रात का संग्राम

2 जून से शुरू हुआ यह घमासान अब लगातार विस्तार ले रहा है। यह मिनी वॉर मॉडल किसी भी समय युद्ध के दूसरे चरण में तब्दील हो सकता है। बीती रात एक बार फिर खाड़ी के क्षेत्र में बारूद बरसा। अमेरिका ने ईरान के उन खुफिया ठिकानों पर हमले किए जहां ईरान ने अपनी मिसाइलें छिपाकर रखी हुई हैं। दरअसल, बीती रात अमेरिका के 4 जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करने की कोशिश कर रहे थे, जिन्हें ईरान ने ट्रैक कर लिया और उन पर मिसाइलों से हमला कर दिया। इस दौरान समुद्री सुरंगें यानी सी माइन्स भी सक्रिय हो गई थीं, जिसके कारण अमेरिकी जहाजों को यू-टर्न लेकर वापस लौटना पड़ा। इस घटना से बौखलाए अमेरिका ने आधी रात को ही जवाबी हमले शुरू कर दिए। होर्मुज में स्थित विभिन्न द्वीपों पर हमले किए गए, लेकिन ईरान इसके लिए पहले से तैयार था। उसने कुछ ही देर में अरब देशों पर ड्रोन भेजकर हमले किए, जिससे पूरी रात बहरीन, कुवैत और यूएई में खतरे के सायरन बजते रहे।

सात समंदर में ईरान का चक्रव्यूह

ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने दोबारा ऐसी हिमाकत की, तो वह सात समंदर में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को तबाह कर देगा। ईरान का यह चक्रव्यूह तैयार है जिसके तहत वह कई समुद्री क्षेत्रों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना सकता है। पहला क्षेत्र फारस की खाड़ी है, जहां वह बहरीन, कतर, कुवैत, यूएई और सऊदी अरब में स्थित सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले की तैयारी में है। दूसरा क्षेत्र ओमान की खाड़ी है, जहां ओमान में स्थित अमेरिकी मिलिट्री बेस ईरान के रडार पर है और इसके आगे अरब सागर में स्थित ब्रिटिश बेस डिएगो गार्सिया भी ईरान के निशाने पर है, जहां वह तैनात जेट विमानों को नष्ट कर सकता है। हिंद महासागर में तैनात अमेरिकी नौसेना की पांचवीं फ्लीट पर भी ड्रोन और मिसाइल हमले की योजना है। अदन की खाड़ी में स्थित अमेरिकी बेस जिबूती को लेकर ईरान हूतियों को हमले का निर्देश दे सकता है और लाल सागर में सेंट्रल कमांड की नेवल फोर्स पहले से ही निशाने पर है और सातवां समंदर भूमध्य सागर है, जहां ग्रीस के सौदा बे और साइप्रस में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों के खिलाफ ईरान ने रणनीति बनाई है।

द्वीपों पर ईरान की सैन्य किलेबंदी

अमेरिका को जाल में फंसाने के लिए ईरान ने होर्मुज के द्वीपों पर अपने खुफिया सैन्य ठिकाने विकसित किए हैं। इसमें पहला ठिकाना केश्म द्वीप है, जो 1491 वर्ग किमी में फैला है। दूसरा ठिकाना होर्मुज द्वीप है, जिसका क्षेत्रफल 42 वर्ग किमी है। तीसरा ठिकाना लराक द्वीप पर है, जो 49 वर्ग किमी का है। 8 वर्ग किमी है, जबकि पांचवां ठिकाना तुम्ब द्वीप है, जो 12 वर्ग किमी में फैला हुआ है। ईरान ने इन द्वीपों का एक ऐसा चक्रव्यूह बनाया है जो हाई-टेक हथियारों से लैस है। लराक और होर्मुज द्वीप पर रडार और ड्रोन के जरिए निगरानी की जा रही है, जबकि केश्म और अबू मूसा पर एंटी-शिप मिसाइलें तैनात हैं। ईरान की योजना है कि एक बार अमेरिकी जहाज इस संकरे रास्ते में फंस जाएं, तो उन पर स्पीड बोट्स और अंडरवाटर ड्रोन से अचानक हमला कर उन्हें तबाह कर दिया जाए।

ट्रंप की गन बोट डिप्लोमेसी और ईरान की शर्तें

ईरान किसी भी परिस्थिति में झुकने को तैयार नहीं है और उसने अरब में विनाश के विस्तार को हरी झंडी दे दी है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह होर्मुज पर अपना नियंत्रण नहीं छोड़ेगा। ईरान की शर्त है कि परमाणु कार्यक्रम पर वार्ता तभी होगी जब अमेरिका हमला न करने की गारंटी दे और होर्मुज से केवल उन्हीं टैंकरों को गुजरने दिया जाए जिन्हें ईरान मंजूरी दे और इन शर्तों से ट्रंप प्रशासन बेहद नाराज है और उन्होंने गन बोट डिप्लोमेसी के दूसरे दौर का आदेश दे दिया है। इसका उद्देश्य ईरान पर इतना सैन्य दबाव बनाना है कि वह वार्ता और आत्मसमर्पण के लिए मजबूर हो जाए। इसी कारण होर्मुज से लेकर ओमान की खाड़ी तक सैन्य हलचल बढ़ गई है और माना जा रहा है कि युद्ध का दूसरा दौर कभी भी शुरू हो सकता है।

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