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होर्मुज संकट: ईरान की तेल ठिकानों को निशाना बनाने की चेतावनी

होर्मुज संकट: ईरान की तेल ठिकानों को निशाना बनाने की चेतावनी
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ईरान और अमेरिका के बीच मध्य-पूर्व में तनाव एक नए और गंभीर स्तर पर पहुंच गया है और तेहरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अमेरिकी सेना होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में किसी भी प्रकार का जमीनी अभियान या घुसपैठ शुरू करती है, तो इसका जवाब खाड़ी देशों के महत्वपूर्ण तेल और गैस ठिकानों को निशाना बनाकर दिया जाएगा। सैन्य अधिकारियों के अनुसार, ईरान ने अपनी मिसाइल प्रणालियों को पहले ही रणनीतिक लक्ष्यों पर तैनात कर दिया है। यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाने और संभावित जमीनी ऑपरेशन के संकेत दिए हैं।

सैन्य ठिकानों और वाणिज्यिक केंद्रों पर बढ़ते हमले

रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान समर्थित समूहों और ईरानी मिसाइल इकाइयों ने हाल के दिनों में कई महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया है। सऊदी अरब के अल-खर्ज स्थित 'प्रिंस सुल्तान एयर बेस' पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन्स से हमले की खबरें मिली हैं। इसके अतिरिक्त, कुवैत के बुबियान द्वीप और इराक के बगदाद में स्थित कैंप विक्टोरिया को भी निशाना बनाया गया है। जॉर्डन के मुवफ्फक साल्ती एयर बेस पर भी हमलों की सूचना है। इन हमलों का मुख्य उद्देश्य उन क्षेत्रों को अस्थिर करना है जहां अमेरिकी सैन्य उपस्थिति अधिक है। सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, ये हमले ईरान की उस रणनीति का हिस्सा हैं जिसके तहत वह अमेरिका पर दबाव बनाना चाहता है।

आर्थिक बुनियादी ढांचे को खतरा

ईरान की नई रणनीति में केवल सैन्य ठिकाने ही नहीं, बल्कि खाड़ी देशों के प्रमुख वाणिज्यिक और आर्थिक केंद्र भी शामिल हैं। कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ड्रोन हमलों की खबरें आई हैं, जिससे वहां के रडार सिस्टम को क्षति पहुंची है। इसके अलावा, ओमान के सलालाह पोर्ट और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अबू धाबी स्थित खलीफा आर्थिक क्षेत्र को भी निशाना बनाने के प्रयास किए गए हैं और हालांकि, यूएई में कुछ मिसाइलों को वायु रक्षा प्रणालियों द्वारा इंटरसेप्ट करने का दावा किया गया है। सऊदी अरब की राजधानी रियाद में भी कई बैलिस्टिक मिसाइल हमलों के बाद सुरक्षा अलर्ट जारी किया गया है।

प्रमुख तेल संयंत्रों की सुरक्षा पर संकट

ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि संघर्ष बढ़ता है, तो वह अरब देशों की आर्थिक रीढ़ माने जाने वाले तेल संयंत्रों को नष्ट कर देगा और ईरान के रडार पर सऊदी अरब का अब्कैक (Abqaiq) प्लांट है, जो दुनिया का सबसे बड़ा तेल प्रसंस्करण संयंत्र है और जहां सऊदी अरब का 70% कच्चा तेल संसाधित होता है। इसकी क्षमता 70 लाख बैरल प्रतिदिन है। इसके अलावा, रास तनुरा रिफाइनरी, कुवैत का अल-अहमदी पोर्ट, और यूएई का दास द्वीप भी ईरान की मिसाइल रेंज में हैं। 3 लाख बैरल प्रतिदिन है, को भी संभावित लक्ष्यों की सूची में रखा गया है।

ईरानी शस्त्रागार और अमेरिकी जवाबी तैयारी

ईरान अपनी आक्रामक रणनीति के लिए शाहेद-136 (Shahed-136) ड्रोन्स और होवेजेह (Hoveyzeh) क्रूज मिसाइलों के विशाल भंडार का उपयोग कर रहा है। ये मिसाइलें कम ऊंचाई पर उड़ान भरने में सक्षम हैं, जिससे इन्हें ट्रैक करना चुनौतीपूर्ण होता है। इसके साथ ही, ईरान ने फतह (Fattah) हाइपरसोनिक मिसाइलों को भी लॉन्च के लिए तैयार रखा है। दूसरी ओर, अमेरिका ने स्थिति को देखते हुए अपना जंगी बेड़ा USS त्रिपोली खाड़ी में तैनात कर दिया है। इस बेड़े पर 2500 मरीन कमांडो और F-35B फाइटर जेट्स तैनात हैं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, वे किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और खार्ग द्वीप के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

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