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ईरान की दो-टूक: होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए अमेरिका-इज़रायल के सामने रखीं शर्तें

ईरान की दो-टूक: होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए अमेरिका-इज़रायल के सामने रखीं शर्तें
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ईरान और अमेरिका के बीच सीज़फायर जारी रहने के बावजूद दोनों देशों के मध्य तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। दोनों ही देशों की एक-दूसरे की शर्तों पर सहमति न बन पाने के कारण शांति समझौता अधर में लटका हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लगातार धमकियों और नाकेबंदी की प्रतिक्रिया में ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को फिर से बंद कर दिया है। ईरान ने इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को खोलने के लिए तीन प्रमुख शर्तें रखी थीं, जिन्हें मानने से राष्ट्रपति ट्रंप ने फिलहाल इनकार कर दिया है और अब इस गंभीर मामले पर ईरान के डिप्टी रक्षा मंत्री रेज़ा तलाई निक ने एक बड़ा बयान जारी किया है।

होर्मुज स्ट्रेट फिर से खोलने के लिए ईरान की शर्तें

ईरान के डिप्टी रक्षा मंत्री रेज़ा तलाई निक ने स्पष्ट किया है कि उनका देश होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने और सभी जहाजों को इस जलमार्ग से सुरक्षित गुज़रने देने के लिए तैयार है, बशर्ते अमेरिका और इज़रायल उनकी मांगों को स्वीकार करें। ईरान की मुख्य मांग यह है कि अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट से अपनी नाकेबंदी को पूरी तरह से हटा ले। इसके साथ ही, ईरान ने यह शर्त भी रखी है कि इज़रायल की तरफ से लेबनान पर किए जा रहे सैन्य हमलों को तुरंत बंद किया जाना चाहिए। इन शर्तों के पूरा होने पर ही ईरान जलमार्ग को बहाल करने पर विचार करेगा।

वैश्विक तेल आपूर्ति और व्यापार पर प्रभाव

होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता की लहर दौड़ गई है और दुनिया के कई देशों ने ईरान से इस जलमार्ग को फिर से खोलने की पुरजोर अपील की है। इस चिंता का मुख्य कारण यह है कि दुनिया की कुल तेल सप्लाई का लगभग 20-30% हिस्सा इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुज़रता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके बंद रहने से न केवल वैश्विक तेल और गैस का संकट गहराएगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार के कई अन्य क्षेत्रों पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

डोनाल्ड ट्रंप का रुख और नाकेबंदी पर गतिरोध

ईरान ने यह साफ कर दिया है कि होर्मुज स्ट्रेट को तभी पूरी तरह से खोला जाएगा, जब अमेरिका अपनी नाकेबंदी हटाने का निर्णय लेगा और दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस मांग के पक्ष में नज़र नहीं आ रहे हैं। ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अमेरिका की नाकेबंदी तब तक जारी रहेगी, जब तक ईरान होर्मुज स्ट्रेट को फिर से नहीं खोल देता। अमेरिका द्वारा यह कदम ईरान पर दबाव बनाने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है, लेकिन वर्तमान स्थिति में इसका कोई सकारात्मक परिणाम निकलता नहीं दिख रहा है।

दोनों देशों के बीच शर्तों को लेकर बने इस गतिरोध के कारण शांति-समझौता संपन्न नहीं हो पा रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी यह खींचतान वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। फिलहाल दोनों पक्ष अपनी-अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं, जिससे इस संकट के जल्द समाधान की संभावनाएं कम नज़र आ रही हैं।

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