मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई है क्योंकि ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों के खिलाफ सीधी जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है। यह सैन्य कार्रवाई बंदर अब्बास के पास ईरानी संपत्तियों पर अमेरिकी हमले के ठीक 2 घंटे के भीतर की गई। तस्नीम समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, घटनाओं का यह सिलसिला गुरुवार सुबह ईरानी समयानुसार 4 बजकर 50 मिनट पर शुरू हुआ। अमेरिकी सेना ने बंदर अब्बास के पास एक ड्रोन लॉन्चर ठिकाने को निशाना बनाकर हमला किया। ईरान ने इस कार्रवाई को मौजूदा युद्धविराम का स्पष्ट उल्लंघन माना और इसके जवाब में कुवैत में अमेरिकी हितों पर हमला बोल दिया।
अल सलेम एयरबेस पर जवाबी हमला
बंदर अब्बास पर हुई अमेरिकी बमबारी के जवाब में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने घोषणा की है कि उन्होंने कुवैत के अल सलेम एयरबेस को निशाना बनाया है। यह एयरबेस अमेरिकी सेना का एक महत्वपूर्ण ठिकाना है। ईरानी हमले के बाद, कुवैत की सेना ने पुष्टि की है कि बेस के आसपास के एयर डिफेंस सिस्टम को तुरंत सक्रिय कर दिया गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, कुवैत सरकार ने अपने नागरिकों के लिए सुरक्षा निर्देश जारी किए हैं और उन्हें सुरक्षा नियमों का पूरी तरह पालन करने के लिए कहा है।
अप्रैल के युद्धविराम का अंत
सैन्य गतिविधियों में यह अचानक वृद्धि तब हुई है जब दोनों देशों के बीच राजनयिक प्रयास चल रहे थे। ईरान और अमेरिका के बीच आधिकारिक तौर पर अप्रैल में सीजफायर यानी युद्धविराम की घोषणा की गई थी। इस समझौते को अंतिम रूप देने के लिए इसी हफ्ते ईरान के प्रतिनिधि कुवैत में मौजूद थे और फाइनल ड्राफ्ट तैयार करने पर बातचीत चल रही थी। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक कैबिनेट मीटिंग के बाद स्थिति बदल गई। ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिका को किसी भी कीमत पर संवर्धित यूरेनियम चाहिए। ईरान द्वारा इस मांग को ठुकराए जाने के बाद बातचीत का रास्ता बंद हो गया और सैन्य टकराव शुरू हो गया।
बंदर अब्बास में हुई झड़प का विवरण
ताजा विवाद की शुरुआत बंदर अब्बास के पास हुई। एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, उस समय वहां से एक अमेरिकी व्यापारिक जहाज गुजर रहा था, जिसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी अमेरिकी सेना के पास थी। इस दौरान ईरान ने जहाज की ओर 4 ड्रोन दागे। अमेरिकी सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए उन 4 ड्रोन को मार गिराया और एक लॉन्चर ठिकाने को भी ध्वस्त कर दिया। अमेरिका ने इस पूरी कार्रवाई को रक्षात्मक कदम बताया है, जबकि ईरान इसे अपनी संप्रभुता पर हमला और युद्धविराम का उल्लंघन मान रहा है।
क्षेत्रीय प्रभाव: इजराइल का लेबनान पर हमला
अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुई इस झड़प का असर पूरे क्षेत्र में दिखने लगा है। इजराइल ने भी लेबनान पर हमले तेज कर दिए हैं और इजराइली सेना विशेष रूप से हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बना रही है। गौरतलब है कि बुधवार को ही इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने लेबनान पर जोरदार हमले की अनुमति दी थी। लेबनान इजराइल का पड़ोसी देश है और वहां हिजबुल्लाह का नियंत्रण है और हिजबुल्लाह को ईरान के नेतृत्व वाले एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस का हिस्सा माना जाता है। इन हमलों से स्पष्ट है कि संघर्ष अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे क्षेत्र में फैल रहा है।