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ईरान-अमेरिका तनाव: राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने ट्रंप को दिलाई 1980 की तबास हार की याद

ईरान-अमेरिका तनाव: राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने ट्रंप को दिलाई 1980 की तबास हार की याद
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ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अमेरिका को तेहरान के तबास में 5 मई 1980 में हुई उसकी ऐतिहासिक हार की याद दिलाई है। पेजेश्कियन ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से कहा है कि ऐसी ऐतिहासिक हारें दुनिया की घमंडी ताकतों के लिए एक बड़ा सबक हैं। उन्होंने इस घटना को ईश्वरीय हस्तक्षेप के रूप में वर्णित किया है।

राष्ट्रपति पेजेश्कियन का सोशल मीडिया संदेश

" उन्होंने आगे लिखा कि इस वर्ष भी ईश्वर की कृपा से, दक्षिणी इस्फहान में एक और तबास हुआ, जो यह दिखाता है कि तबास की रेत का भगवान इस भूमि के लोगों का रक्षक है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि ऐसी ऐतिहासिक हारें दुनिया की घमंडी ताकतों के लिए सबक बनेंगी।

ऑपरेशन ईगल क्लॉ और तबास की घटना

तबास ईरान के दक्षिणी खोरासन प्रांत में स्थित एक शहर है, जहां अमेरिकी हार का इतिहास 'ऑपरेशन ईगल क्लॉ' से जुड़ा है। 24-25 अप्रैल 1980 को अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने यह गुप्त सैन्य अभियान शुरू किया था। इस अभियान की मुख्य वजह नवंबर 1979 में ईरान में हुई इस्लामी क्रांति थी, जिसके दौरान छात्रों ने तेहरान में अमेरिकी दूतावास पर कब्जा कर लिया था और 53 अमेरिकी राजनयिकों को बंधक बना लिया था। कार्टर प्रशासन ने कूटनीतिक बातचीत विफल होने के बाद इन बंधकों को मुक्त कराने के लिए सैन्य अभियान का फैसला किया था।

अमेरिकी सैन्य अभियान की विफलता के कारण

अमेरिकी सेना ने अपने 53 राजनयिकों को छुड़ाने के लिए 8 हेलीकॉप्टर और C-130 विमानों के साथ तबास के पास रेगिस्तानी इलाके में लैंडिंग की थी।

5 मई का ऐतिहासिक महत्व और परिणाम

यद्यपि यह अभियान 24-25 अप्रैल 1980 को चलाया गया था, लेकिन ईरान इसे 5 मई को अपनी जीत के रूप में मनाता है। इसका कारण यह है कि ईरान ने इस अभियान में मारे गए अमेरिकी सैनिकों के शव 5 मई को वाशिंगटन को सौंपे थे। इस घटना को अमेरिका की भारी अंतरराष्ट्रीय बेइज्जती के रूप में देखा गया और ईरान में इसे ईश्वरीय मदद माना गया और इस बड़ी विफलता के बाद ही अमेरिकी सेना में विशेष अभियान कमांड (SOCOM) का गठन किया गया था।

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