ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध को समाप्त करने की दिशा में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख नरम पड़ता दिखाई दे रहा है, हालांकि परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद अब भी बना हुआ है। ईरान ने एक नया प्रस्ताव पेश किया है जिसमें युद्ध खत्म करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की बात कही गई है। इस प्रस्ताव के तहत ईरान की शर्त है कि अमेरिका अपनी नाकेबंदी हटा ले और परमाणु समझौते से जुड़ी वार्ता को फिलहाल टाल दे। हालांकि, ट्रंप प्रशासन द्वारा मंगलवार को इस प्रस्ताव को स्वीकार किए जाने की संभावना कम नजर आ रही है क्योंकि परमाणु वार्ता को टालने के मुद्दे पर अमेरिकी प्रशासन सहमत नहीं है।
परमाणु वार्ता टालने के पक्ष में नहीं अमेरिका
ईरान के इस नए प्रस्ताव में परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा को स्थगित करने का सुझाव दिया गया है, जिसे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है। सोमवार को फॉक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में रुबियो ने कहा कि अमेरिका यह सुनिश्चित करना चाहता है कि कोई भी समझौता ऐसा हो जो ईरान को कभी भी परमाणु हथियार बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने से पूरी तरह रोक सके। व्हाइट हाउस के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राष्ट्रीय सुरक्षा टीम ने इस प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा की है और राष्ट्रपति स्वयं इस विषय पर बाद में अपना आधिकारिक बयान जारी करेंगे।
युद्ध के दौरान हताहतों के प्रमुख आंकड़े
अराघची की रूस यात्रा और नया कूटनीतिक प्रस्ताव
ईरान का यह नया प्रस्ताव उस समय सामने आया जब ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची रूस की आधिकारिक यात्रा पर थे। रूस लंबे समय से ईरान का प्रमुख सहयोगी रहा है, लेकिन वर्तमान स्थिति में यह स्पष्ट नहीं है कि मॉस्को इस कूटनीतिक गतिरोध को सुलझाने में क्या भूमिका निभाएगा। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि ईरानी अच्छे वार्ताकार हैं और वे केवल समय खरीदने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका उन्हें ऐसा करने की अनुमति नहीं दे सकता क्योंकि परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना ही इस पूरे विवाद का मुख्य मुद्दा है।
रुबियो ने आगे कहा कि यदि ईरान में वर्तमान कट्टरपंथी धार्मिक शासन सत्ता में बना रहता है, तो वे निश्चित रूप से परमाणु हथियार विकसित करना चाहेंगे। उनके अनुसार, यह एक मौलिक मुद्दा है जिसका सामना किया जाना अनिवार्य है और यही पूरे मामले का कोर इश्यू बना हुआ है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें राष्ट्रपति ट्रंप के आगामी बयान पर टिकी हैं, जो इस प्रस्ताव की दिशा और युद्ध के भविष्य को तय करेगा।