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हिंद महासागर में फंसा ईरानी युद्धपोत, श्रीलंका से मांगी आपातकालीन मदद

हिंद महासागर में फंसा ईरानी युद्धपोत, श्रीलंका से मांगी आपातकालीन मदद
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हिंद महासागर के अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में तनाव के बीच एक ईरानी युद्धपोत ने श्रीलंका सरकार से आपातकालीन सहायता की गुहार लगाई है। यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब अमेरिकी नौसेना की एक पनडुब्बी द्वारा एक अन्य ईरानी युद्धपोत IRIS DENA को मार गिराए जाने के बाद क्षेत्र में स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। श्रीलंका के अधिकारियों के अनुसार, ईरानी युद्धपोत ने उनके जलीय क्षेत्र में दाखिल होने की अनुमति मांगी है। इस संदेश के प्राप्त होने के बाद श्रीलंकाई सरकार और सुरक्षा एजेंसियां उचित कदम उठाने पर विचार कर रही हैं।

अमेरिकी पनडुब्बी का टॉरपीडो हमला

आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, बुधवार को हिंद महासागर में एक बड़ी सैन्य कार्रवाई हुई थी। अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी युद्धपोत IRIS DENA पर टॉरपीडो से हमला कर उसे समुद्र में डुबो दिया था। इस हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में हड़कंप मच गया। अमेरिकी रक्षा मंत्री पेट हेगसेथ ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कहा कि एक अमेरिकी पनडुब्बी ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक ईरानी युद्धपोत को निशाना बनाया। इस हमले के बाद से ही क्षेत्र में ईरानी नौसेना की गतिविधियों और सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

श्रीलंका सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया

श्रीलंका सरकार के प्रवक्ता और मंत्री नलिंदा जयतिस्सा ने संसद में इस स्थिति पर स्पष्टीकरण दिया है। मुख्य विपक्षी नेता साजित प्रेमदासा द्वारा दूसरे ईरानी युद्धपोत के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में जयतिस्सा ने कहा कि सरकार इस स्थिति से पूरी तरह अवगत है। उन्होंने बताया कि ईरानी युद्धपोत वर्तमान में श्रीलंका के विस्तारित आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में प्रतीक्षा कर रहा है, जो कि देश के क्षेत्रीय जलक्षेत्र से बाहर है। प्रवक्ता के अनुसार, सरकार पोत पर मौजूद सभी कर्मियों की जान की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कानूनी और मानवीय पहलुओं पर विचार कर रही है।

राहत और बचाव अभियान का विवरण

IRIS DENA पर हुए हमले के बाद श्रीलंकाई नौसेना ने व्यापक राहत और बचाव अभियान चलाया था। श्रीलंकाई अधिकारियों ने बुधवार को पुष्टि की कि उन्होंने दक्षिणी तट के पास से लगभग 80 ईरानी नाविकों के शव बरामद किए हैं। बचाव दल ने कई जीवित बचे नाविकों को भी सुरक्षित निकाला, जिन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता प्रदान की गई। अधिकारियों के अनुसार, मारे गए नाविकों की कुल संख्या 84 तक पहुंच सकती है। शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए गॉल के करापिटिया अस्पताल भेजा गया है, जहां कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं।

घायलों का उपचार और चिकित्सा स्थिति

अमेरिकी हमले में जीवित बचे ईरानी क्रू मेंबर्स का वर्तमान में श्रीलंका के अस्पतालों में उपचार चल रहा है। अस्पताल के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, अधिकांश घायलों की स्थिति स्थिर है और उनकी चोटें जानलेवा नहीं हैं। गॉल स्थित करापिटिया अस्पताल में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं, जहां घायलों का इलाज और मृतकों का पोस्टमॉर्टम एक साथ किया जा रहा है। श्रीलंकाई स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ईरानी दूतावास के संपर्क में हैं ताकि चिकित्सा प्रक्रियाओं और शवों के हस्तांतरण को सुचारू रूप से संपन्न किया जा सके।

युद्धपोत की गतिविधि और क्षेत्रीय संदर्भ

जानकारी के अनुसार, जिस ईरानी नौसैनिक बेड़े पर हमला हुआ, वह एक सैन्य अभ्यास में भाग लेने के बाद भारत के विशाखापत्तनम से अपने देश लौट रहा था। यह बेड़ा अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग का उपयोग कर रहा था जब अमेरिकी पनडुब्बी ने उसे निशाना बनाया। श्रीलंका ने स्पष्ट किया है कि वह क्षेत्रीय शांति और मानवीय आधार पर इस मुद्दे के समाधान के लिए हस्तक्षेप कर रहा है। दूसरे युद्धपोत द्वारा मांगी गई आपातकालीन सहायता पर अंतिम निर्णय सुरक्षा प्रोटोकॉल और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के तहत लिया जाएगा।

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