जयपुर के खोह नागोरियां इलाके में पैतृक खातेदारी भूमि पर रातों-रात सड़क निर्माण को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है और इस मामले में पूर्व महापौर सौम्या गुर्जर के पति राजाराम गुर्जर पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। स्थानीय खातेदारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का दावा है कि उनकी निजी भूमि पर बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के सड़क बना दी गई है। इस घटना ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है, जिसके बाद प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा और कई बड़े अधिकारियों पर गाज गिरी है।
अवैध निर्माण और खातेदारों के आरोप
समाजसेवी और भाजपा कार्यकर्ता बद्री सिंह राजावत ने इस मामले को प्रमुखता से उठाते हुए आरोप लगाया कि राजाराम गुर्जर के प्रभाव में आकर खातेदारों की जमीन पर रातों-रात सड़क का निर्माण कर दिया गया। राजावत के अनुसार, इस निर्माण के लिए न तो कोई मुआवजा दिया गया और न ही किसी वैधानिक प्रक्रिया का पालन किया गया। सड़क बनाने के साथ-साथ वहां आनन-फानन में स्ट्रीट लाइट के पोल भी लगा दिए गए। खातेदारों का कहना है कि हालांकि जेडीए के मास्टर प्लान में यहां 160 फीट की सड़क प्रस्तावित है, लेकिन जमीन का अधिग्रहण किए बिना और उचित मुआवजा दिए बिना इस तरह का निर्माण पूरी तरह से गैर-कानूनी है। जब स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया, तो उनके खिलाफ खोह नागोरियां थाने में झूठे मुकदमे दर्ज करवा दिए गए।
जेडीए का पक्ष और कानूनी कार्रवाई
दूसरी ओर, जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने इस मामले में अलग रुख अपनाया है। जेडीए के अधिकारियों का दावा है कि यह सड़क कोई नई नहीं है, बल्कि पिछले 10 साल से वहां मौजूद है। जेडीए के अनुसार, मास्टर प्लान के तहत यह 160 फीट चौड़ी सड़क सरकारी संपत्ति है। जब खातेदारों ने विरोध स्वरूप सड़क को उखाड़ दिया, तो जेडीए ने अज्ञात लोगों के खिलाफ सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और सड़क उखाड़ने का मुकदमा दर्ज करवाया। जेडीए का कहना है कि वे केवल अपनी संपत्ति की रक्षा कर रहे हैं और मास्टर प्लान के अनुसार विकास कार्य सुनिश्चित कर रहे हैं।
राजनीतिक समर्थन और सामाजिक एकजुटता
इस विवाद ने तब और जोर पकड़ लिया जब राजपूत समाज और कई दिग्गज भाजपा नेता खातेदारों के समर्थन में उतर आए। एक पत्रकार सम्मेलन के दौरान बद्री सिंह राजावत ने बताया कि इस लड़ाई में उन्हें केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़, भाजपा प्रदेश महामंत्री श्रवण सिंह बगड़ी और प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश दाधीच का समर्थन प्राप्त है और इसके अलावा पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह गुढा, राजपूत सभा, करणी सेना और सर्व समाज ने भी खातेदारों के हक में आवाज उठाई है। श्री राजपूत सभा जयपुर देहात की ओर से इस मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष और आरएसएस को भी ज्ञापन सौंपा गया है, जिसमें न्याय की मांग की गई है।
प्रशासनिक आश्वासन और धरना स्थगित
मामले की गंभीरता को देखते हुए और 20 अगस्त को शहीद स्मारक पर प्रस्तावित बड़े धरने की चेतावनी के बाद प्रशासन हरकत में आया। बद्री सिंह राजावत ने बताया कि प्रशासन के साथ हुई वार्ता में उन्हें न्याय का भरोसा दिलाया गया है। समझौते के तहत खोह नागोरियां के थानाधिकारी (SHO) और संबंधित जेडीए अधिकारी को उनके पदों से हटा दिया गया है। साथ ही, दर्ज मुकदमों की उच्च स्तरीय जांच कराने और राजाराम गुर्जर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने पर सहमति बनी है। जेडीए कर्मचारियों की संलिप्तता की जांच के लिए एक विशेष कमेटी गठित की जाएगी और दोषी पाए जाने पर निलंबन की कार्रवाई की जाएगी। इन आश्वासनों के बाद प्रस्तावित धरने को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।
राजाराम गुर्जर की सफाई और विभागीय कार्रवाई
इन आरोपों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए राजाराम गुर्जर ने कहा कि उनका इस जमीन या सड़क निर्माण से कोई लेना-देना नहीं है और उन्होंने इसे जेडीए की सड़क बताया और कहा कि जेडीए ने ही सड़क उखाड़ने वालों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। गुर्जर ने आरोप लगाया कि उनका नाम इस विवाद में जानबूझकर घसीटा जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि जिस व्यक्ति को पुलिस ने पकड़ा था, वह आपराधिक प्रवृत्ति का है और पुलिस हिरासत से भाग निकला था। इस बीच, जेडीए प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जोन 10 में कार्यरत सहायक अभियंता अश्विनी कुमार अग्रवाल को एपीओ (पदस्थापन की प्रतीक्षा में) कर दिया है। यह आदेश जेडीए की अतिरिक्त आयुक्त प्रिया बलराम शर्मा द्वारा जारी किया गया है। जेडीए अभी भी अपने इस दावे पर कायम है कि सड़क 10 वर्ष पुरानी है।