जयशंकर बोले: BRICS में पहलगाम हमले की निंदा पर बनी बड़ी सहमति

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जयशंकर बोले: BRICS में पहलगाम हमले की निंदा पर बनी बड़ी सहमति
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नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स समिट में आतंकवाद के मुद्दे पर भारत ने अपना रुख अत्यंत मजबूती के साथ रखा है और विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी कि समिट के दौरान आतंकवाद के खिलाफ एक स्पष्ट और व्यापक सहमति देखने को मिली है और उन्होंने बताया कि ब्रिक्स देशों ने आतंकवाद के हर रूप और उसकी हर अभिव्यक्ति की कड़े शब्दों में निंदा की है। जयशंकर के अनुसार, यह समिट आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में एक मील का पत्थर साबित हुई है, जहां सभी सदस्य देशों ने एक सुर में अपनी बात रखी।

पहलगाम आतंकी हमले पर कड़ा रुख

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने विशेष रूप से 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स समूह ने इस हमले को पूरी तरह से अस्वीकार्य माना है। भारत के लिए यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण कूटनीतिक मोड़ है, क्योंकि 22 अप्रैल 2025 के हमले के बाद से ही मोदी सरकार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ कड़े और निर्णायक कदम उठाने की मांग करती रही है। ब्रिक्स जैसे प्रभावशाली समूह द्वारा इस हमले की निंदा करना भारत की आतंकवाद विरोधी नीति की एक बड़ी जीत मानी जा रही है।

जीरो टॉलरेंस और दोहरे मापदंड का विरोध

विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि ब्रिक्स ने आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस यानी शून्य सहनशीलता की नीति पर जोर दिया है। समिट के दौरान आतंकवाद से निपटने में किसी भी तरह के दोहरे मापदंड को पूरी तरह से खारिज कर दिया गया और जयशंकर ने कहा कि समूह ने सीमा पार आतंकवाद यानी क्रॉस-बॉर्डर टेररिज्म का भी जिक्र किया, जो भारत के लिए हमेशा से एक गंभीर चिंता का विषय रहा है। ब्रिक्स देशों के बीच यह सहमति बनी है कि किसी भी प्रकार की आतंकवादी कार्रवाई को आपराधिक माना जाना चाहिए और इसके सभी रूपों की बिना किसी भेदभाव के निंदा की जानी चाहिए।

भारत की बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि

ब्रिक्स समिट की सफलता को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत की एक विशाल कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया है। उन्होंने आंकड़ों के साथ बताया कि इस समिट में कुल 32 डेलीगेशन शामिल हुए थे। इन डेलीगेशन में 11 सदस्य देश, 10 पार्टनर देश, 4 क्षेत्रीय संगठन और 7 अंतरराष्ट्रीय संगठन शामिल थे। जयशंकर ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि इनमें से अधिकांश डेलीगेशन का प्रतिनिधित्व राष्ट्राध्यक्षों या सरकार के प्रमुखों के स्तर पर हुआ था। यह भागीदारी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बढ़ती शक्ति और उसकी नेतृत्व क्षमता को प्रदर्शित करती है।

मिडिल ईस्ट संघर्ष और वैश्विक चुनौतियां

यह समिट एक ऐसे समय में आयोजित की गई जब पूरी दुनिया विभिन्न गुटों में बंटी हुई है। विदेश मंत्री ने कहा कि वर्तमान में दुनिया में दो बड़े संघर्ष चल रहे हैं और अलग-अलग देशों के बीच गहरे मतभेद और हित जुड़े हुए हैं। इन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद, भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स देशों के बीच कई महत्वपूर्ण और जटिल मुद्दों पर सहमति बनाने में सफलता मिली। जयशंकर ने बताया कि समिट के दौरान सबसे कठिन विषयों में से एक वेस्ट एशिया यानी मिडिल ईस्ट का संघर्ष था, जिस पर भी सदस्य देशों ने चर्चा की और एक साझा दृष्टिकोण विकसित करने का प्रयास किया।

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