30 हजार करोड़ का JIO IPO: क्या Gen-Z और यूथ इनवेस्टर्स पर चलेगा अंबानी मैजिक?

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30 हजार करोड़ का JIO IPO: क्या Gen-Z और यूथ इनवेस्टर्स पर चलेगा अंबानी मैजिक?
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देश के शेयर बाजार में 30 साल से कम उम्र के युवाओं की हिस्सेदारी 40 फीसदी से ज्यादा हो चुकी है और ऐसे में जियो आईपीओ का असली टेस्ट इन्हीं युवाओं के बीच होना तय माना जा रहा है। ऐसे हालात में आकाश अंबानी का पूरे आईपीओ का मुख्य चेहरा होना और भी ज्यादा अहम हो जाता है। देश का सबसे बड़ा जियो आईपीओ 21 अक्टूबर को आ रहा है, जिसकी कुल वैल्यूएशन 10 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा आंकी गई है। 2 अरब डॉलर जुटाने की योजना बना रही है। यह आईपीओ बताएगा कि आज के समय में रिटेल निवेशकों के लिए रिलायंस ब्रांड की अहमियत और उसका प्रभाव कितना बाकी है।

पिछली कई जेनरेशंस के लिए, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ही शेयर बाजार से उनका पहला परिचय हुआ करती थी और इसके दूरदर्शी फाउंडर धीरूभाई अंबानी ने मिड इनकम वाले बचतकर्ताओं को शेयरों की ओर आकर्षित करने में सफलता पाई थी, जिससे एक ऐसा विशाल आधार तैयार हुआ जो दशकों तक लगातार कायम रहा। रिलायंस के पब्लिक होने के लगभग पचास साल बीत जाने के बाद, उनके अरबपति बेटे मुकेश अंबानी और पोते आकाश अंबानी अब समूह की टेलीकॉम और डिजिटल सर्विस वाली यूनिट को स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट कराने की पूरी तैयारी कर रहे हैं। यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग यानी आईपीओ होने जा रहा है। 2 अरब डॉलर की भारी-भरकम राशि जुटाने की योजना बना रही है, जो 21 अक्टूबर को खुलेगा।

जेन-जी और यूथ इनवेस्टर्स का बढ़ता दबदबा

जियो जिस बाजार को अपना मुख्य निशाना बना रही है, वह धीरूभाई अंबानी के समय के शुरुआती बाजार से पूरी तरह से अलग है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत में अब 130 मिलियन यानी 13 करोड़ से अधिक रजिस्टर्ड शेयर बाजार निवेशक मौजूद हैं, जिनमें से लगभग 40 फीसदी निवेशकों की उम्र 30 साल से कम है। आज के इस दौर में उनके पैसे को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए बाजार में हजारों स्टॉक, कई तरह के म्यूचुअल फंड और अन्य नए निवेश विकल्प मौजूद हैं। पुराने शेयरधारक रिलायंस को हमेशा एक ऐसे स्टॉक के रूप में देखते थे जिसे वे बिना किसी झिझक के दशकों तक अपने पास सुरक्षित रख सकते थे। वहीं दूसरी ओर, आज के युवा निवेशकों के लिए निवेश का फैसला लेते समय मुख्य रूप से ग्रोथ, मुनाफा और आकर्षक वैल्यूएशन ज्यादा मायने रखते हैं।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार 69 वर्षीय महेंद्र छेड़ा ने 1960 के दशक के आखिर में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के मेंबर बनने से ठीक पहले, एक फ्लोर ट्रेडर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि चाहे धीरूभाई की असीम महत्वाकांक्षा हो, रिटेल निवेशकों की एक बहुत बड़ी फौज खड़ी करने की उनकी अथक कोशिश हो, या फिर शेयरधारकों को उनकी पूंजी पर बेहतरीन रिटर्न देना हो – रिलायंस ने हर मोर्चे पर खुद को सबसे अलग साबित किया है। उनके 44 वर्षीय बेटे हार्दिक, जो खुद एक सक्रिय इक्विटी ट्रेडर हैं, जियो को लेकर एक बिल्कुल अलग नजरिया रखते हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि कंपनी के लिस्टिंग के तुरंत बाद मैं अपना मुनाफा निकालकर बाहर हो जाऊंगा। उनका यह भी मानना है कि रिटेल निवेशकों को सीधे तौर पर शेयर खरीदने का चलन लोकप्रिय बनाने के लिए देश को अंबानी परिवार का बहुत आभारी होना चाहिए, लेकिन अब हम फाइनेंशियल मार्केट्स के एक बिल्कुल ही अलग दौर में प्रवेश कर चुके हैं।

करीब 50 साल पहले आया था ऐतिहासिक आईपीओ

मुकेश अंबानी के सक्षम नेतृत्व में, रिलायंस टेक्सटाइल और केमिकल बनाने वाली एक साधारण कंपनी से आगे बढ़कर भारत की सबसे मूल्यवान और बड़ी कंपनी बन चुकी है, जिसका कारोबार अब मुख्य रूप से एनर्जी, कंज्यूमर गुड्स और टेलीकॉम जैसे विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से फैल चुका है। पहली पीढ़ी के महान उद्यमी धीरूभाई ने मुंबई के उस समय के स्थापित औद्योगिक ढांचे को खुली चुनौती दी थी। उनके कड़े नेतृत्व में, कंपनी ने अपना विशाल टेक्सटाइल साम्राज्य खड़ा करने के लिए हजारों व्यक्तिगत निवेशकों से सीधे पूंजी जुटाने का एक बेहद साहसिक फैसला किया था।

रिलायंस की आधिकारिक वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर 1977 में आए उस ऐतिहासिक आईपीओ से कुल 28 मिलियन रुपये जुटाए गए थे और इसमें लगभग 58,000 व्यक्तिगत निवेशकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। इस आईपीओ को तय सीमा से सात गुना अधिक सब्सक्रिप्शन प्राप्त हुआ था। इसने भारत में ‘इक्विटी कल्चर’ यानी शेयर बाजार में निवेश के चलन को जबरदस्त बढ़ावा दिया, क्योंकि इसके बाद देश के अधिक परिवारों ने सीधे तौर पर शेयर खरीदना शुरू कर दिया था। उस समय शेयरधारकों की वार्षिक बैठकें बड़े और भव्य जन-समारोहों में बदल जाया करती थीं। ऐसी ही एक यादगार बैठक 1980 के दशक के मध्य में दक्षिण मुंबई के प्रसिद्ध कूपरेज फुटबॉल ग्राउंड में आयोजित की गई थी, जिसमें भारी भीड़ उमड़ी थी।

जियो के आईपीओ को लेकर बाजार में कई सवाल

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार बीते गुरुवार को मुंबई में आयोजित एक रोडशो की विस्तृत प्रेजेंटेशन के मुताबिक, शेयर बाजार में लिस्टिंग के बाद से रिलायंस के शेयरों ने निवेशकों को लगभग 29 फीसदी का वार्षिक औसत रिटर्न दिया है। हालांकि, मौजूदा साल में स्थानीय शेयर बाजार में आई भारी बिकवाली के चलते रिलायंस के शेयरों में कुल 23 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इस वजह से, वर्ष 2011 के बाद से यह कंपनी का सबसे खराब वार्षिक प्रदर्शन साबित हो सकता है। मुकेश अंबानी के सबसे बड़े बेटे और जियो प्लेटफॉर्म्स के 34 वर्षीय मैनेजिंग डायरेक्टर, आकाश अंबानी, इस पूरी कंपनी की लिस्टिंग प्रक्रिया का बहुत बारीकी से नेतृत्व कर रहे हैं। रिलायंस समूह में यह उनका अब तक का सबसे पहला और बड़ा स्वतंत्र कामकाज है।

इस पूरे मामले की अंदरूनी जानकारी रखने वाले विश्लेषकों ने बताया कि पहले ऐसी प्रबल उम्मीद जताई जा रही थी कि जियो लगभग 11 लाख करोड़ रुपये का भारी वैल्यूएशन मांगेगा। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, ग्लोबल रोडशो के दौरान दुनिया भर के फंड मैनेजरों ने यह कड़ा सवाल उठाया कि आखिर जियो को अपने छोटे प्रतिद्वंद्वी भारती एयरटेल लिमिटेड की तुलना में अधिक वैल्यूएशन यानी प्रीमियम क्यों मिलना चाहिए। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी पूछा कि जियो अपने मुख्य टेलीकॉम कारोबार के अलावा भविष्य में डिजिटल सेवाओं से कमाई करने की अपनी वास्तविक योजना क्या रखता है।

मामले से जुड़े सूत्रों ने ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में बताया है कि जियो को अब तक 20 अरब डॉलर से अधिक की भारी बोलियां मिल चुकी हैं। इसमें फिडेलिटी मैनेजमेंट एंड रिसर्च, एलियांज SE और कैपिटल ग्रुप जैसे बड़े विदेशी निवेशकों ने भी अपनी गहरी दिलचस्पी दिखाई है। इतनी जबरदस्त मांग के बावजूद, जियो 1,065 रुपये से 1,119 रुपये प्रति शेयर के तय भाव पर अपने शेयर बेचेगा, जिससे इस प्राइस रेंज के ऊपरी स्तर पर कंपनी का मूल्यांकन लगभग 108 अरब डॉलर हो जाएगा। यह मूल्यांकन भारती एयरटेल के 125 अरब डॉलर के मौजूदा मार्केट वैल्यू की तुलना में कुछ कम यानी डिस्काउंट पर तय किया गया है।

शॉर्ट टर्म इन्वेस्टमेंट पर ज्यादा यकीन कर रहे हैं युवा

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में बात करते हुए 24 वर्षीय प्रथमेश गोखले ने कहा कि उनके लिए अंबानी परिवार की पुरानी विरासत की तुलना में जियो की भविष्य की ग्रोथ की संभावनाएं और उसका वैल्यूएशन कहीं अधिक मायने रखता है। वे इस आगामी आईपीओ में खुलकर बोली लगाने की पूरी योजना बना रहे हैं। उन्होंने अपनी बात स्पष्ट करते हुए कहा कि अगर मुझे शेयर अलॉट हो जाते हैं, तो मैं तुरंत मुनाफा कमाने के उद्देश्य से अपनी आधी होल्डिंग को शॉर्ट टर्म में ही बेच दूंगा और बाकी बचे शेयरों को लंबे समय के फायदे के लिए अपने पास सुरक्षित रखूंगा और वे भारती एयरटेल को भी निवेश के एक बहुत ही अच्छे विकल्प के रूप में देखते हैं। अकाउंटेंसी की पढ़ाई कर रहे युवा गोखले का कहना है कि आज के समय में सीमित पूंजी होने के कारण, अन्य जगहों पर निवेश करने के लिए समय पर पैसा खाली रखना बहुत जरूरी हो जाता है।

भारत के सामान्य आईपीओ निवेशकों के बीच आज के समय में यह सोच काफी हद तक आम हो चुकी है और देश के मार्केट रेगुलेटर की वर्ष 2024 की एक विस्तृत स्टडी से यह बात सामने आई है कि रिटेल निवेशकों ने स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टिंग होने के ठीक एक हफ्ते के भीतर ही अपने अलॉट किए गए शेयरों का 40 फीसदी हिस्सा बेच दिया था। जब उनका रिटर्न 20 फीसदी के आंकड़े से ऊपर पहुंच गया, तो उन्होंने अपने पास मौजूद शेयरों का लगभग दो-तिहाई हिस्सा बाजार में बेचकर मुनाफा वसूल लिया। आज के दौर में उनके पास उस पैसे को दोबारा सही जगह लगाने के लिए अब और भी कई नए और आकर्षक विकल्प मौजूद हैं।

जियो ने पूरी तरह बदल दिया है टेलीकॉम मार्केट

भारत के 5 ट्रिलियन डॉलर के विशाल मार्केट में अब केवल वे पारंपरिक औद्योगिक समूह और बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियां ही शामिल नहीं हैं जिनका कभी शेयर ट्रेडिंग पर पूरी तरह से दबदबा हुआ करता था, बल्कि इसमें अब आधुनिक कंज्यूमर-टेक कंपनियां, तेज डिजिटल पेमेंट कंपनियां और आधुनिक स्टॉक एक्सचेंज भी पूरी ताकत से शामिल हो चुके हैं। आज से ठीक एक दशक पहले जब जियो ने अपनी सस्ती 4G डेटा सेवाओं के साथ भारतीय टेलीकॉम मार्केट में धमाकेदार कदम रखा था, तो इसने पूरे मार्केट के समीकरण को पूरी तरह से बदलकर रख दिया था। com की जानी-मानी इन्वेस्टमेंट एडवाइजर गीतांजलि केडिया के अनुसार, अब सबसे बड़ा सवाल यह बना हुआ है कि क्या जियो आने वाले समय में लगातार नए इनोवेशन कर पाएगी और अपनी ग्रोथ के अगले दौर को सफलतापूर्वक हासिल कर पाएगी। उन्होंने अंत में कहा कि आज के निवेशक पहले की तुलना में कहीं अधिक समझदार और जागरूक हो गए हैं, इसलिए कंपनियों को निवेशकों का लगातार ध्यान और पैसा पाने के लिए हर बार बेहतरीन रिटर्न देना ही होगा।

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