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सिद्धारमैया और राहुल गांधी की मुलाकात का बड़ा खुलासा: कर्नाटक सीएम से मांगा गया इस्तीफा

सिद्धारमैया और राहुल गांधी की मुलाकात का बड़ा खुलासा: कर्नाटक सीएम से मांगा गया इस्तीफा
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कर्नाटक की राजनीति में इस समय एक बड़ा भूचाल आया हुआ है और राज्य के नेतृत्व में बदलाव की खबरें तेज हो गई हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कांग्रेस पार्टी कर्नाटक में मुख्यमंत्री बदलने की तैयारी कर रही है। राज्य के वर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, राहुल गांधी के साथ दिल्ली में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद बेंगलुरु लौट आए हैं। इस बीच, सिद्धारमैया और राहुल गांधी की इस मुलाकात को लेकर कई चौंकाने वाले दावे सामने आए हैं, जिससे राज्य की सियासत में हलचल मच गई है और बेंगलुरु के राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि क्या पार्टी का यह कदम राज्य में सत्ता के समीकरणों को पूरी तरह से बदल देगा।

इस्तीफे की तारीख और आलाकमान का निर्देश

कर्नाटक की राजनीतिक स्थिति पर इस वक्त पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं और ताजा जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया 28 मई को अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। मंगलवार को दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान और कर्नाटक के प्रमुख नेताओं के बीच दिनभर बैठकों का दौर चला। सूत्रों का कहना है कि इन बैठकों के दौरान सिद्धारमैया को स्पष्ट रूप से इस्तीफा देने के लिए कह दिया गया है और सबसे हैरान करने वाली बात यह सामने आई है कि राहुल गांधी के साथ हुई आमने-सामने की मुलाकात के दौरान सिद्धारमैया से उनकी राय तक नहीं पूछी गई और उन्हें सीधे पार्टी के फैसले से अवगत करा दिया गया। इससे यह संकेत मिलता है कि आलाकमान ने राज्य के नेतृत्व को लेकर अपना मन पहले ही बना लिया था।

सिद्धारमैया की रणनीति और दिल्ली यात्रा की तैयारी

बताया जा रहा है कि राहुल गांधी से मुलाकात करने से पहले सिद्धारमैया ने स्थिति की गंभीरता को भांप लिया था। वह पूरी तैयारी के साथ दिल्ली गए थे ताकि अपनी कुर्सी बचा सकें और अपनी बात प्रभावी ढंग से रख सकें और करीब एक दर्जन मंत्रियों को अपने साथ स्पेशल फ्लाइट में लेकर जाना भी उनकी इसी सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था। सिद्धारमैया ने योजना बनाई थी कि वह बातचीत की शुरुआत अपने मंत्रिमंडल में फेरबदल (कैबिनेट री-शफल) की मांग के साथ करेंगे। उनका तर्क था कि राज्य के शासन को और बेहतर बनाने के लिए यह फेरबदल जरूरी है। अगर हाई कमान उनके इस प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं होता है, तो वह अपने साथ आए वरिष्ठ मंत्रियों को बुलाकर अपनी बात को और अधिक मजबूती से रखेंगे और यह दिखाएंगे कि उन्हें पूरी कैबिनेट का समर्थन प्राप्त है।

मुलाकात के दौरान क्या हुआ?

हालांकि, बैठक में जो कुछ हुआ उसकी कल्पना सिद्धारमैया ने भी नहीं की थी। राहुल गांधी के साथ हुई इस मुलाकात में सिद्धारमैया को अपनी बात रखने का मौका ही नहीं मिला। उनसे उनकी राय पूछने के बजाय, उन्हें बताया गया कि पार्टी चाहती है कि वह अब राज्यसभा जाएं और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस की सेवा करें। पार्टी आलाकमान ने उन्हें मुख्यमंत्री पद छोड़ने का निर्देश दिया ताकि राज्य में नए नेतृत्व को मौका दिया जा सके। सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम में सिद्धारमैया का ओपिनियन नहीं लिया गया, बल्कि उन्हें केवल फैसले की जानकारी दी गई। राज्यसभा सीट के प्रस्ताव पर सिद्धारमैया ने केवल इतना कहा कि उनकी राष्ट्रीय राजनीति में जाने की कोई मंशा नहीं है और उन्हें इस विषय पर सोचने के लिए कुछ समय चाहिए और इसी के साथ बैठक अचानक समाप्त हो गई।

गुरुवार का दिन होगा निर्णायक

बैठक के बाद सिद्धारमैया को निर्देश दिया गया कि वह अपना अंतिम फैसला केसी वेणुगोपाल को बता दें। दिल्ली से निकलने के बाद सिद्धारमैया ऊर्जा मंत्री के जे जॉर्ज के आवास पर पहुंचे, जहां उन्होंने अन्य मंत्रियों के साथ चर्चा की। इस बातचीत में उन्होंने अपना दर्द साझा करते हुए कहा कि हाईकमान अपने फैसले पर पूरी तरह अडिग है और उन्हें अपनी बात रखने का उचित अवसर नहीं दिया गया। सिद्धारमैया ने मंत्रियों को बताया कि वह तुरंत बेंगलुरु लौट रहे हैं ताकि आगे की रणनीति पर विचार कर सकें। इसके बाद केसी वेणुगोपाल को यह सूचना दे दी गई कि सिद्धारमैया की राज्यसभा जाने की कोई इच्छा नहीं है। अब सबकी नजरें गुरुवार पर टिकी हैं, जब सिद्धारमैया अपना अंतिम फैसला लेंगे, जो कर्नाटक सरकार के भविष्य को तय करेगा।

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