खान सर के प्रसिद्ध कोचिंग संस्थान 'खान ग्लोबल स्टडीज' में सुरक्षा नियमों के गंभीर उल्लंघन का मामला सामने आया है। इस मामले पर बिहार अग्निशमन सेवा के डीआईजी मनोज कुमार नट ने कड़ा रुख अपनाते हुए बताया है कि यदि सुरक्षा मानकों में सुधार नहीं किया गया, तो संस्थान पर ताला लटक सकता है। एक तरफ जहां खान सर पर एफआईआर दर्ज होने के बाद गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है, वहीं दूसरी तरफ उनके कोचिंग संस्थान में फायर सेफ्टी के मानकों की अनदेखी ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। डीआईजी ने स्पष्ट किया कि निरीक्षण के दौरान खान ग्लोबल स्टडीज में कई तरह की तकनीकी और सुरक्षा संबंधी त्रुटियां पाई गई हैं।
15 दिनों का मिला अल्टीमेटम
बिहार अग्निशमन विभाग ने खान सर के कोचिंग संस्थान को अपनी व्यवस्था सुधारने के लिए 15 दिनों का समय दिया है। डीआईजी मनोज कुमार नट के अनुसार, यदि 15 दिनों के भीतर निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित नहीं किया गया, तो कोचिंग को सील करने की कार्रवाई की जाएगी। यह कदम छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। विभाग ने साफ कर दिया है कि किसी भी संस्थान को नियमों के उल्लंघन की अनुमति नहीं दी जाएगी। डीआईजी ने आम लोगों और संस्थान संचालकों से अपील की है कि वे सरकार के दिशा निर्देशों का पालन करें ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
पटना के कई अस्पतालों और होटलों पर भी कार्रवाई
दिल्ली और मुजफ्फरपुर में हुई हालिया अग्निकांड की घटनाओं के बाद बिहार अग्निशमन विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में है। विभाग द्वारा होटलों, अस्पतालों और कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा मानकों की सघन जांच की जा रही है। इसी कड़ी में पटना के 4 अस्पतालों और एक होटल में गंभीर खामियां मिलने पर उन्हें सील करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जिन प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की बात कही गई है, उनमें कुणाल होटल, एडवांस पटना सेंट्रल हॉस्पिटल, आरोग्यवर्धन हॉस्पिटल, पिनेकल हॉस्पिटल श्याम ट्रस्ट रिसर्च हॉस्पिटल और अपेक्स हॉस्पिटल शामिल हैं। प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
एफआईआर के बाद से अंडरग्राउंड हैं खान सर
खबरों के मुताबिक, एफआईआर दर्ज होने के बाद से खान सर सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं और वे फिलहाल अंडरग्राउंड बताए जा रहे हैं। पुलिस उनकी तलाश कर रही है, लेकिन अभी तक उनके ठिकाने के बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिल पाई है। शुक्रवार की देर रात भारी संख्या में पुलिस बल को उनके कोचिंग संस्थान के बाहर तैनात देखा गया था, हालांकि कुछ समय बाद पुलिस वहां से वापस लौट गई। खान सर की अनुपस्थिति और कोचिंग पर मंडराते कानूनी संकट ने छात्रों के बीच भी अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है।
किसान कोल्ड स्टोरेज कैंपस का इतिहास और विवाद
खान सर का कोचिंग संस्थान जिस परिसर में स्थित है, उसे 'किसान कोल्ड स्टोरेज कैंपस' के नाम से जाना जाता है। पहले यहां वास्तव में कोल्ड स्टोरेज हुआ करता था, लेकिन अब इसके अधिकांश हिस्से में कोचिंग संस्थान संचालित हो रहे हैं और इस कैंपस के बड़े हिस्से के मालिक डॉ आर बी प्रसाद हैं। कैंपस के एक छोटे हिस्से में अभी भी किसान कोल्ड स्टोरेज का बोर्ड लगा है, जो डॉ आर बी प्रसाद के भाई के हिस्से में आता है। वर्तमान में इस कैंपस में 5 प्रमुख कोचिंग संस्थान चल रहे हैं, जिनमें अंकुश मैथमेटिक्स, कौटिल्य जीएस, सावित्री कंप्यूटर, खान ग्लोबल स्टडीज और ज्ञान बिंदु जीएस शामिल हैं। खान सर का संस्थान यहां सबसे बड़े क्षेत्र में फैला है, जिसमें लगभग 18 से 20 छोटे बड़े हॉल हैं।
ज्ञान बिंदु जीएस के गंभीर आरोप
कैंपस के भीतर ही संचालित होने वाले ज्ञान बिंदु जीएस कोचिंग ने खान सर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ज्ञान बिंदु का दावा है कि खान सर मकान मालिक डॉ आर बी प्रसाद के साथ मिलकर उन्हें कैंपस से हटाने की साजिश रच रहे हैं और आरोप है कि खान सर चाहते हैं कि पूरे कैंपस में केवल उनका ही संस्थान रहे ताकि बिहार के विभिन्न जिलों से आने वाले छात्रों के पास कोई दूसरा विकल्प न बचे। ज्ञान बिंदु जीएस के रौशन आनंद पिछले कुछ वर्षों में खान सर के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं। उन्होंने कई परीक्षाओं में बेहतर परिणाम दिए हैं और सफल छात्रों को बुलेट मोटरसाइकिल उपहार में देकर काफी चर्चा बटोरी थी।
पटना का मुसल्लहपुर हाट: बिहार का मिनी कोटा
पटना का मुसल्लहपुर हाट इलाका केवल एक मोहल्ला नहीं, बल्कि बिहार का सबसे बड़ा कोचिंग हब माना जाता है। यह क्षेत्र महेंद्रू, बाजार समिति, रामपुर रोड, भिखना पहाड़ी और अशोक राजपथ के बीच 4 से 6 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैला है। पूरे पटना में लगभग 4000 कोचिंग संस्थान हैं, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा इसी इलाके में केंद्रित है। अनुमान के मुताबिक, मुसल्लहपुर महेंद्रू क्षेत्र में लगभग 3 से 4 लाख छात्र रहकर बीपीएससी, यूपीएससी, एसएससी, रेलवे, बैंकिंग, नीट और जेईई जैसी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। यहां की पूरी अर्थव्यवस्था छात्रों पर टिकी है, जिसमें लॉज, पीजी, मेस और किताबों की दुकानें शामिल हैं। सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक यहां छात्रों की भारी भीड़ रहती है, जिसके कारण इसे बिहार का 'मिनी कोटा' भी कहा जाता है।