बिहार विधानसभा में मानसून सत्र के दौरान आज गुरुवार को भारी हंगामे की स्थिति देखने को मिली। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों के विधायक सदन के बीचों-बीच स्थित वेल में पहुंच गए। इस दौरान स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई और दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की की नौबत आ गई। माहौल को बिगड़ता देख विधानसभा के मार्शलों को तुरंत सक्रिय होना पड़ा और उन्होंने बीच-बचाव कर स्थिति को संभाला और इस हंगामे के कारण सदन की गरिमा और विधायी कार्यों पर गहरा असर पड़ा है।
हंगामे की मुख्य वजह
सदन में इस भारी हंगामे की शुरुआत भाजपा विधायक श्याम बाबू प्रसाद यादव के विरोध से हुई और दरअसल, भाजपा विधायक श्याम बहादुर (जिन्हें श्याम बाबू प्रसाद यादव के नाम से भी जाना जाता है) बीते बुधवार को अपनी गाड़ी पर हुए कथित हमले और तोड़फोड़ का विरोध कर रहे थे। उन्होंने इस गंभीर मामले को सदन के पटल पर उठाने का प्रयास किया। इसी मुद्दे को लेकर भाजपा के कई विधायक वेल में पहुंच गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। विधायकों का आरोप था कि राज्य में जनप्रतिनिधि भी सुरक्षित नहीं हैं और उनकी सुरक्षा में बड़ी चूक हुई है।
पटना में छात्रों का प्रदर्शन और तनाव
इस पूरे घटनाक्रम का जुड़ाव हाल ही में हुई अन्य घटनाओं से भी है। ज्ञात हो कि बीते 22 जुलाई को पटना में छात्रों के एक प्रदर्शन ने उग्र रूप ले लिया था। उस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई थी, जिसमें पुलिस को स्थिति नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले और वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा था और भाजपा विधायक इसी माहौल और अपनी गाड़ी पर हुए हमले को लेकर आक्रोशित थे और सदन में जवाबदेही की मांग कर रहे थे।
वेल में आमने-सामने हुए विधायक
जब भाजपा विधायक वेल में पहुंचकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, तभी उन्हें जवाब देने के लिए महागठबंधन के विधायक भी विधानसभा अध्यक्ष के सामने बने वेल में पहुंच गए। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। सदन के भीतर माहौल इतना ज्यादा गर्म हो गया कि विधायकों के बीच धक्का-मुक्की जैसी स्थिति बन गई। दोनों तरफ से एक-दूसरे के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की गई और हालांकि, बिहार विधानसभा के मार्शलों ने तत्परता दिखाते हुए तुरंत हस्तक्षेप किया और दोनों पक्षों के विधायकों को एक-दूसरे से अलग किया, जिससे कोई बड़ी अप्रिय घटना होने से बच गई।
कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित
सदन में जारी शोर-शराबे और हंगामे के कारण प्रश्नकाल पूरी तरह बाधित रहा। विधानसभा अध्यक्ष ने लगातार विधायकों से अपनी सीटों पर लौटने और सदन की मर्यादा बनाए रखने की अपील की, लेकिन उनकी बातों का कोई असर नहीं हुआ। जब सदन में व्यवस्था बहाल नहीं हो सकी और विधायी कार्यों का संचालन असंभव हो गया, तो विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया। इस हंगामे की वजह से जनता से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों पर चर्चा नहीं हो सकी।
पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप
सदन के भीतर हुए इस हंगामे की गूंज विधानसभा परिसर के बाहर भी सुनाई दी। भाजपा और महागठबंधन दोनों ही पक्षों ने एक-दूसरे पर लोकतांत्रिक मर्यादाओं को तार-तार करने का आरोप लगाया। भाजपा विधायकों ने सत्ता पक्ष पर सियासी हिंसा और प्रेशर पॉलिटिक्स करने का आरोप मढ़ा। वहीं, दूसरी ओर महागठबंधन के नेताओं ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष जानबूझकर सदन की कार्यवाही में बाधा डाल रहा है और जनहित के मुद्दों पर चर्चा से भाग रहा है। इस घटना ने बिहार की राजनीति में चल रहे तनाव को एक बार फिर उजागर कर दिया है।