लखनऊ कानपुर एक्सप्रेसवे: 4200 करोड़ का प्रोजेक्ट 20 दिन में धंसा, ड्रेनेज सिस्टम की बड़ी लापरवाही आई सामने

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लखनऊ कानपुर एक्सप्रेसवे: 4200 करोड़ का प्रोजेक्ट 20 दिन में धंसा, ड्रेनेज सिस्टम की बड़ी लापरवाही आई सामने
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करीब 4200 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार किया गया लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे अपनी गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है। तेज और सुगम यातायात के बड़े-बड़े दावों के साथ शुरू हुए इस ड्रीम प्रोजेक्ट की पोल महज 20 दिनों के भीतर ही खुल गई है। एक्सप्रेसवे के कई हिस्सों में सड़क धंसने, गहरी दरारें पड़ने और किनारों की मिट्टी खिसकने की दर्जनों शिकायतें सामने आई हैं। इस स्थिति ने न केवल यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि निर्माण कार्य में हुई भारी लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोपों को भी हवा दे दी है। इतने बड़े बजट वाले प्रोजेक्ट का इतनी जल्दी खराब होना इंजीनियरिंग और निगरानी पर बड़ा सवालिया निशान है।

ड्रेनेज सिस्टम की विफलता बनी सबसे बड़ी वजह

पड़ताल में यह बात सामने आई है कि इस भीषण बर्बादी की सबसे बड़ी और मुख्य वजह सड़क की जल निकासी व्यवस्था यानी ड्रेनेज सिस्टम में की गई भारी लापरवाही है। एक्सप्रेसवे के निर्माण के दौरान बारिश के पानी को बाहर निकालने के लिए नालियां तो बनाई गई थीं, लेकिन तकनीकी रूप से उनका सड़क के साथ सही और समुचित कनेक्शन ही नहीं किया गया था और इसका नतीजा यह हुआ कि मूसलाधार बारिश के दौरान पानी सड़कों से बाहर निकलने के बजाय वहीं जमा रहा। लगातार पानी के ठहराव के कारण सड़क की ऊपरी परत और उसके नीचे की मिट्टी ढीली पड़ गई, जिसके कारण तीन दर्जन से अधिक जगहों पर सड़क धंस गई और बड़े-बड़े गड्ढे हो गए। नालियों का सड़क से जुड़ा न होना इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी तकनीकी खामी बनकर उभरी है।

एनएचएआई की जांच में खुली पोल: 7 मिनट में भी नहीं निकला पानी

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआई की शुरुआती जांच में ड्रेनेज सिस्टम की बदहाली की पुष्टि हुई है। जांच के दौरान एक ड्रेनेज टेस्ट किया गया, जिसमें सड़क पर 500 लीटर पानी डाला गया। चौंकाने वाली बात यह रही कि यह 500 लीटर पानी 7 मिनट बीत जाने के बाद भी नालियों के जरिए बाहर नहीं निकल पाया। इस टेस्ट ने निर्माण एजेंसी पीएनसी इंफ्राटेक के काम की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालत यह है कि अब एक्सप्रेसवे चालू होने के बाद आनन-फानन में नालियों को तोड़-तोड़कर सड़क से जोड़ने का काम किया जा रहा है, जो निर्माण के समय ही हो जाना चाहिए था।

तीन दर्जन से अधिक स्थानों पर दरारें और मिट्टी का कटाव

एक्सप्रेसवे पर नुकसान का दायरा काफी बड़ा है। कानपुर से लखनऊ की तरफ जाते समय किमी संख्या 32 दशमलव 4 के पास सड़क इस कदर धंस गई है कि वहां यातायात को केवल एक लेन से निकाला जा रहा है। इसके अलावा किमी संख्या 60 के आगे बने अंडरपास के पास स्लोप की मिट्टी पूरी तरह खिसक गई है। स्लोप को सीमेंट से पक्का न किए जाने के कारण सड़क के नीचे की नींव प्रभावित हो रही है, जिससे भविष्य में बड़े हादसे का खतरा बना हुआ है और एक्सप्रेसवे पर बने कुछ पुलों में भी दरारें दिखाई दे रही हैं। बताया जा रहा है कि इन दरारों को अब सीमेंट भरकर छिपाने की कोशिश की जा रही है, जो कि केवल एक अस्थायी समाधान है।

सुरक्षा को लेकर बढ़ते खतरे और लापरवाही

एक्सप्रेसवे के किनारों पर जहां गिट्टी भरी जानी चाहिए थी, वहां अब ऊंची-ऊंची घास उग आई है। यह घास रात के समय वाहन चालकों के लिए भ्रम पैदा कर सकती है और हादसों का कारण बन सकती है। निर्माण एजेंसी पीएनसी इंफ्राटेक अब जगह-जगह मरम्मत का काम करा रही है, लेकिन 4200 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी जनता को सुरक्षित और टिकाऊ सड़क नहीं मिल पाई है। ड्रेनेज सिस्टम का फेल होना, पुलों में दरारें और सड़क का धंसना यह दर्शाता है कि निर्माण के दौरान मानकों की अनदेखी की गई। फिलहाल एनएचएआई इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रहा है ताकि जिम्मेदारी तय की जा सके और भविष्य में होने वाले खतरों को टाला जा सके।

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