मध्य प्रदेश के आगर-मालवा जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर में दान और चढ़ावे को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था के केंद्र इस मंदिर में वित्तीय गड़बड़ियों और निजी बैंक खातों में दान राशि जमा कराने के गंभीर आरोप लगे हैं। इन शिकायतों का संज्ञान लेते हुए जिला कलेक्टर ने कड़ा रुख अपनाया है और मामले की तह तक जाने के लिए तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन कर दिया है।
जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन
नलखेड़ा स्थित प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर में मिली शिकायतों के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह से एक्शन मोड में है। कलेक्टर प्रीति यादव द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आदेश के मुताबिक, मंदिर परिसर में एक गैर-शासकीय समिति द्वारा शासकीय प्रबंधन समिति से अलग हटकर श्रद्धालुओं से नकद, सोना और चांदी के रूप में दान लेने की बात सामने आई है। सबसे गंभीर आरोप यह है कि इस दान राशि को सरकारी खातों के बजाय निजी बैंक खातों में जमा कराया जा रहा था, जो सीधे तौर पर वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है।
एस. सोलंकी की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई है। इस समिति में जिला कोषालय अधिकारी मनीष सोलंकी और नलखेड़ा नगर परिषद की मुख्य नगरपालिका अधिकारी मिन्नी अग्रवाल को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। यह टीम मंदिर के वित्तीय लेन-देन के हर पहलू की बारीकी से जांच करेगी।
सात दिनों के भीतर देनी होगी रिपोर्ट
कलेक्टर ने जांच दल को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे मंदिर परिसर का भौतिक निरीक्षण करें और दान व चढ़ावे की वर्तमान व्यवस्था की पूरी पड़ताल करें। जांच के दौरान रसीद पुस्तिकाओं, बैंक खातों के विवरण और अन्य संबंधित दस्तावेजों का मिलान किया जाएगा। समिति यह भी पता लगाएगी कि क्या इस पूरे खेल में किसी सरकारी अधिकारी, कर्मचारी या मंदिर प्रबंधन से जुड़े किसी व्यक्ति की मिलीभगत है और जांच दल को सभी साक्ष्य जुटाकर अपनी विस्तृत रिपोर्ट, अभिमत और अनुशंसाओं के साथ 7 दिनों के भीतर प्रस्तुत करने को कहा गया है।
संस्कृति मंत्री का कड़ा रुख और नए निर्देश
इस मामले पर प्रदेश के संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र लोधी ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि मां बगलामुखी मंदिर के बाहर एक गैर-सरकारी संस्था द्वारा अवैध वसूली की जा रही थी, जो अब सरकार के संज्ञान में आ चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस गतिविधि का शासकीय संस्थाओं से कोई वास्ता नहीं है। मंत्री ने इन लोगों की तुलना "कालनेमि" से करते हुए कहा कि आस्था के नाम पर इस तरह की धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।
भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं। मंत्री धर्मेंद्र लोधी ने बताया कि अब प्रदेश के सभी मंदिरों का हर 3 महीने में नियमित ऑडिट किया जाएगा। इसके साथ ही, सभी मंदिरों में जल्द से जल्द डिजिटल पेमेंट यानी ऑनलाइन दान की सुविधा अनिवार्य रूप से शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का मानना है कि डिजिटल ट्रांजैक्शन से पारदर्शिता आएगी और अवैध वसूली पर प्रभावी रूप से रोक लगाई जा सकेगी।