मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव की सरगर्मियों के बीच एक बड़ा कानूनी मोड़ सामने आया है और कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन ने अपना नामांकन पत्र खारिज किए जाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा उनका नामांकन रद्द किए जाने के बाद, नटराजन ने उच्चतम न्यायालय में एक रिट याचिका दायर की है। उन्होंने चुनाव अधिकारी के इस फैसले को गलत बताते हुए अदालत से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है ताकि उनकी उम्मीदवारी को बहाल किया जा सके।
नामांकन रद्द होने का मुख्य कारण
रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन को फॉर्म 26 में जानकारी छिपाने के आधार पर रद्द कर दिया था। चुनाव अधिकारी का कहना था कि नटराजन ने तेलंगाना में अपने खिलाफ लंबित एक कानूनी मामले की जानकारी इस फॉर्म में नहीं दी थी। इसी तकनीकी आधार को मुख्य वजह बताते हुए उनका पर्चा खारिज कर दिया गया, जिससे मध्य प्रदेश की राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले मुकाबले में कांग्रेस की स्थिति कमजोर हो गई है।
चुनाव आयोग से नहीं मिला कोई जवाब
सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने से पहले कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने इस मुद्दे को चुनाव आयोग के सामने उठाया था और बुधवार को मीनाक्षी नटराजन के साथ कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयोग को एक विस्तृत प्रतिवेदन सौंपा था। कांग्रेस का कहना है कि उन्होंने आयोग से इस मामले में न्याय की गुहार लगाई थी, लेकिन वहां से उन्हें कोई संतोषजनक जवाब या प्रतिक्रिया नहीं मिली। आयोग की चुप्पी के बाद ही कांग्रेस ने सर्वोच्च अदालत की शरण लेने का निर्णय लिया।
अभिषेक मनु सिंघवी की कानूनी दलीलें
इस मामले में कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी सुप्रीम कोर्ट में पैरवी करेंगे। सिंघवी आज अवकाशकालीन पीठ के समक्ष इस मामले की मेंशनिंग करेंगे और रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले पर रोक लगाने की मांग करेंगे। सिंघवी का तर्क है कि रिटर्निंग ऑफिसर का फैसला कानून की दृष्टि से गलत और पक्षपाती है। उनका कहना है कि चुनावी नियमों के अनुसार, केवल उन्हीं मामलों का खुलासा करना अनिवार्य होता है जिनमें आरोप तय हो चुके हों और जिनमें 2 साल से अधिक की सजा का प्रावधान हो। कांग्रेस का दावा है कि जिस मामले का हवाला देकर नामांकन रद्द किया गया है, वह इन शर्तों को पूरा नहीं करता है।
11 जून की समयसीमा और राजनीतिक समीकरण
आज यानी 11 जून की तारीख इस पूरे घटनाक्रम के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि आज नामांकन वापसी का आखिरी दिन है। यदि सुप्रीम कोर्ट से आज कोई फैसला या स्थगन आदेश नहीं आता है, तो मध्य प्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटों पर चुनावी मुकाबला खत्म हो जाएगा। ऐसी स्थिति में भारतीय जनता पार्टी के तीनों उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया जाएगा। बीजेपी के तीनों उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है, बशर्ते अदालत की ओर से कोई बड़ा आदेश न आ जाए।
न्यायिक हस्तक्षेप पर टिकी नजरें
अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही पर टिकी हैं। यदि अदालत रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले पर रोक लगाती है, तो चुनाव की प्रक्रिया में बदलाव हो सकता है और मुकाबला बना रहेगा। हालांकि, यदि याचिका पर तुरंत राहत नहीं मिलती है, तो कांग्रेस के लिए यह एक बड़ा झटका होगा और बीजेपी बिना किसी विरोध के तीनों सीटें जीतने में सफल रहेगी। इस कानूनी लड़ाई का परिणाम मध्य प्रदेश की राजनीति और राज्यसभा के समीकरणों पर गहरा असर डालेगा।