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मधुसूदन केला का बाजार मंत्र: 10-12% रिटर्न का रखें लक्ष्य, प्रमोटर पर दें ध्यान

मधुसूदन केला का बाजार मंत्र: 10-12% रिटर्न का रखें लक्ष्य, प्रमोटर पर दें ध्यान
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दिग्गज निवेशक मधुसूदन केला ने भारतीय शेयर बाजार के भविष्य और निवेशकों की रणनीति को लेकर महत्वपूर्ण विचार साझा किए हैं और उनके अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में बाजार ने जिस तरह का असाधारण प्रदर्शन किया है, उसके बाद अब निवेशकों को अपनी उम्मीदों को यथार्थवादी धरातल पर लाने की आवश्यकता है। केला का मानना है कि अब वह समय बीत चुका है जब बाजार से रातों-रात छप्परफाड़ रिटर्न की उम्मीद की जा सकती थी। वर्तमान वैश्विक और घरेलू परिस्थितियों को देखते हुए, उन्होंने निवेशकों को सालाना 10-12% के औसत रिटर्न का लक्ष्य रखने का सुझाव दिया है। उनके अनुसार, यह रिटर्न भी लंबी अवधि में संपत्ति निर्माण के लिए पर्याप्त और तर्कसंगत है।

यथार्थवादी रिटर्न की उम्मीद और बाजार की स्थिति

मधुसूदन केला के अनुसार, भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ समय में जो तेजी देखी गई, उसने नए निवेशकों के मन में यह धारणा बना दी थी कि बाजार हमेशा इसी गति से ऊपर जाएगा। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि बाजार हमेशा एक सीधी रेखा में नहीं चलता है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनाव और बदलती ब्याज दरों के बीच, 10-12% का वार्षिक रिटर्न एक स्वस्थ प्रदर्शन माना जाना चाहिए। उनके अनुसार, निवेशकों को अब 'अंधाधुंध मुनाफे' के बजाय स्थिरता और गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बाजार में अनुशासन ही सबसे बड़ा हथियार है और जो निवेशक संयम के साथ टिके रहेंगे, वही अंततः सफल होंगे।

उतार-चढ़ाव को अवसर के रूप में देखना

बाजार में होने वाली अस्थिरता या 'वोलेटिलिटी' को लेकर केला का नजरिया काफी सकारात्मक है। उनके अनुसार, जब बाजार में गिरावट आती है या भारी उतार-चढ़ाव होता है, तो आम निवेशक अक्सर घबराकर बिकवाली करने लगते हैं। लेकिन एक समझदार निवेशक के लिए यही वह समय होता है जब अच्छी गुणवत्ता वाले शेयर आकर्षक कीमतों पर उपलब्ध होते हैं। उन्होंने कहा कि उतार-चढ़ाव से डरने के बजाय इसे अपना दोस्त बनाना चाहिए। उनके अनुसार, बाजार की हलचल ही वह खिड़की है जो भविष्य के लिए बेहतर पोर्टफोलियो बनाने का मौका देती है। उन्होंने बजट, अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों और मुद्रास्फीति जैसे कारकों को बाजार की स्वाभाविक प्रक्रिया का हिस्सा बताया।

प्रमोटर की गुणवत्ता और 'जॉकी' सिद्धांत

निवेश के लिए कंपनियों का चयन करते समय मधुसूदन केला ने एक बहुत ही सरल लेकिन प्रभावी सिद्धांत साझा किया है, जिसे वे 'जॉकी' सिद्धांत कहते हैं और उनके अनुसार, जिस तरह घुड़दौड़ में घोड़े से ज्यादा महत्व उस पर सवार 'जॉकी' का होता है, उसी तरह किसी कंपनी की सफलता उसके प्रमोटर या नेतृत्व पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि निवेशकों को यह देखना चाहिए कि कंपनी चलाने वाला व्यक्ति कितना सक्षम है और क्या उसमें मुश्किल समय में कंपनी को बाहर निकालने का जज्बा है। उनके अनुसार, एक मजबूत और ईमानदार प्रमोटर वाली कंपनी लंबी अवधि में हमेशा बेहतर प्रदर्शन करती है और उन्होंने सुझाव दिया कि निवेशकों को उन कंपनियों की तलाश करनी चाहिए जो नई तकनीकों, जैसे कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), को अपनाकर अपनी उत्पादकता बढ़ा रही हैं।

स्मॉलकैप और मिडकैप में छिपी संभावनाएं

केला का मानना है कि लार्जकैप इंडेक्स अब काफी परिपक्व हो चुके हैं और वहां से बहुत अधिक रिटर्न की गुंजाइश सीमित हो सकती है। उनके अनुसार, वास्तविक संपत्ति निर्माण के अवसर स्मॉलकैप और मिडकैप सेगमेंट में छिपे हुए हैं। वे इन्हें 'हिडन जेम्स' या छिपे हुए हीरे कहते हैं। उनके अनुसार, ऐसी कई छोटी और मध्यम स्तर की कंपनियां हैं जो अपने क्षेत्र में नवाचार कर रही हैं और जिनमें भविष्य में लार्जकैप बनने की क्षमता है। हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इस सेगमेंट में जोखिम अधिक होता है, इसलिए गहन शोध और प्रमोटर की साख की जांच करना अनिवार्य है।

कंपाउंडिंग की शक्ति और अनुशासित निवेश

लंबी अवधि में बड़ी संपत्ति बनाने के लिए मधुसूदन केला ने कंपाउंडिंग (चक्रवृद्धि ब्याज) के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि यदि कोई व्यक्ति 50 वर्षों तक प्रति माह ₹11,000 का अनुशासित निवेश (SIP) करता है और उसे बाजार का औसत रिटर्न मिलता है, तो वह ₹100 करोड़ तक का कोष बना सकता है। उनके अनुसार, यह आंकड़ा निवेश की अवधि और अनुशासन की शक्ति को दर्शाता है और उन्होंने भारतीय घरेलू निवेशकों की सराहना करते हुए कहा कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली के बावजूद भारतीय बाजार अगर टिका हुआ है, तो इसका बड़ा श्रेय घरेलू निवेशकों और उनके निरंतर एसआईपी निवेश को जाता है। आईटी सेक्टर पर उन्होंने कहा कि एआई से डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि यह भविष्य में उत्पादकता बढ़ाने का माध्यम बनेगा।


डिस्क्लेमर

यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसे वित्तीय या निवेश सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। निवेश करने से पहले कृपया अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें।

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