पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर सरगर्मी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख ममता बनर्जी ने बुधवार को कोलकाता की प्रतिष्ठित भवानीपुर विधानसभा सीट के लिए आधिकारिक तौर पर अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। नामांकन प्रक्रिया के दौरान मुख्यमंत्री के साथ पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और हजारों समर्थकों का हुजूम देखा गया और यह कदम राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है, क्योंकि भवानीपुर को टीएमसी का गढ़ माना जाता है।
पैदल मार्च और नामांकन की औपचारिक प्रक्रिया
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बुधवार दोपहर कालीघाट स्थित अपने आवास से अलीपुर सर्वे बिल्डिंग के लिए रवाना हुईं। नामांकन केंद्र तक पहुँचने के लिए उन्होंने लगभग 800 मीटर की दूरी पैदल तय की। इस मार्च के दौरान सड़क के दोनों ओर समर्थकों की भारी भीड़ जमा थी और ममता बनर्जी ने हाथ जोड़कर जनता का अभिवादन स्वीकार किया। अलीपुर सर्वे बिल्डिंग पहुँचकर उन्होंने निर्वाचन अधिकारी के समक्ष अपने दस्तावेज प्रस्तुत किए। नामांकन दाखिल करने के बाद मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य की सभी 294 सीटों पर टीएमसी की जीत सुनिश्चित करने के लिए जनता से अपील की।
वोटर लिस्ट में विसंगतियों पर मुख्यमंत्री का बयान
नामांकन दाखिल करने के तुरंत बाद ममता बनर्जी ने निर्वाचन प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि विशेष सारांश संशोधन (SIR) के दौरान बंगाल की मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटा दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें इस बात का गहरा दुख है कि कई वैध मतदाताओं के नाम सूची से गायब हैं और उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए एक चुनौती बताया और कार्यकर्ताओं को सतर्क रहने का निर्देश दिया।
भवानीपुर का चुनावी समीकरण: ममता बनाम शुभेंदु
भवानीपुर सीट पर इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प होने वाला है। ममता बनर्जी का सीधा मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी से है। शुभेंदु अधिकारी ने पिछले सप्ताह ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और अन्य वरिष्ठ भाजपा नेताओं की उपस्थिति में अपना नामांकन दाखिल किया था। शुभेंदु अधिकारी, जो कभी ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी थे, अब उनके सबसे बड़े राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभरे हैं। भवानीपुर की यह लड़ाई केवल एक सीट की जीत-हार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे 2026 के विधानसभा चुनावों के लिए एक प्रतीकात्मक शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।
'मिनी इंडिया' के रूप में भवानीपुर की पहचान
भवानीपुर निर्वाचन क्षेत्र अपनी विविधता के लिए पूरे देश में जाना जाता है और इसे अक्सर 'मिनी इंडिया' कहा जाता है क्योंकि यहाँ विभिन्न समुदायों और धर्मों के लोग एक साथ रहते हैं। इस क्षेत्र में बंगाली मध्यमवर्गीय परिवारों के साथ-साथ मारवाड़ी, गुजराती, पंजाबी, सिख और जैन समुदायों की महत्वपूर्ण उपस्थिति है। आंकड़ों के अनुसार, यहाँ लगभग 42% मतदाता बंगाली हिंदू हैं, जबकि 34% गैर-बंगाली हिंदू और लगभग 24% मुस्लिम आबादी है। कुल मिलाकर, इस क्षेत्र के लगभग 75% मतदाता हिंदू समुदाय से आते हैं, जो इस सीट के राजनीतिक समीकरण को जटिल और महत्वपूर्ण बनाता है।
सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारी
मुख्यमंत्री के नामांकन को देखते हुए कोलकाता पुलिस और जिला प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। कालीघाट से अलीपुर तक के पूरे रास्ते पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। ड्रोन कैमरों के जरिए भीड़ की निगरानी की जा रही थी। निर्वाचन आयोग के अधिकारियों के अनुसार, नामांकन प्रक्रिया पूरी तरह से शांतिपूर्ण रही और सभी प्रोटोकॉल का पालन किया गया। आने वाले दिनों में इस सीट पर प्रचार अभियान और तेज होने की संभावना है, क्योंकि दोनों ही प्रमुख दलों ने यहाँ अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।