पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली हार और पार्टी के भीतर मची भगदड़ के बाद तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी की राजनीतिक पकड़ कमजोर होती दिखाई दे रही है। इसका असर न केवल बंगाल की राजनीति में बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर इंडिया गठबंधन के भीतर भी महसूस किया जा रहा है। सोमवार को नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित इंडिया गठबंधन की प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममता बनर्जी का व्यवहार उनकी पुरानी मुखर छवि के बिल्कुल विपरीत था। जहां वे पहले गठबंधन की बैठकों में सबसे आगे रहकर अपनी बात रखती थीं, वहीं इस बार वे लगभग पूरी तरह शांत रहीं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि ममता बनर्जी पहले कभी ऐसी स्थिति में नहीं देखी गईं, जो उनकी और तृणमूल कांग्रेस की कमजोर पड़ती पकड़ को दर्शाता है।
इंडिया गठबंधन में घटती हैसियत
दिल्ली दौरे के दौरान अक्सर वोकल रहने वाली ममता बनर्जी सोमवार को इंडिया गठबंधन की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बेहद शांत दिखीं और 5 मिनट तक चली इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममता बनर्जी ने केवल दो शब्द कहे: "एट्रोसिटी" और "वर्चुअली"। ये दोनों शब्द भी उन्होंने सीधे मीडिया से न कहकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को याद दिलाने के लिए कहे थे। मंच पर ममता बनर्जी खरगे के दाईं ओर बैठी थीं, जबकि उनके बगल में अखिलेश यादव, उमर अब्दुल्ला और तेजस्वी यादव मौजूद थे। राहुल गांधी खरगे के बाईं ओर बैठे थे। पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ममता बनर्जी चुपचाप बैठी रहीं और उन्होंने पत्रकारों के किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया।
तृणमूल कांग्रेस में बड़ी बगावत
ममता बनर्जी की इस चुप्पी के पीछे उनकी पार्टी के भीतर चल रहा गहरा संकट माना जा रहा है। बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद अब लोकसभा में भी तृणमूल कांग्रेस बंट गई है। जब ममता बनर्जी खुद दिल्ली में गठबंधन की बैठक में शामिल होने आई थीं, उसी समय उनके संसदीय दल में बड़ी दरार पड़ गई। टीएमसी के 20 सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर एक अलग गुट बनाने का दावा पेश कर दिया है। अपनी ही पार्टी के सांसदों की इस बगावत ने ममता बनर्जी की राजनीतिक स्थिति को काफी नाजुक बना दिया है, जिसका असर उनकी राष्ट्रीय हैसियत पर भी पड़ रहा है।
बैठक के 5 मुख्य बिंदु और ममता का हस्तक्षेप
मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि आज की मीटिंग में 25 पार्टियों ने हिस्सा लिया और सभी नेता 5 मुख्य बिंदुओं पर सहमत हुए हैं। पहला बिंदु एसआईआर के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजना है। दूसरा बिंदु केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करना है। तीसरे बिंदु के तहत केंद्र सरकार से आर्थिक स्थिति, बेरोजगारी, महंगाई, किसानों के मुद्दों और अन्य जनहित के विषयों पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की गई है। इसी दौरान ममता बनर्जी ने खरगे को टोकते हुए "एट्रोसिटी" शब्द कहा, जिसके बाद खरगे ने अपने बयान में अत्याचार के मुद्दे को भी शामिल किया।
भविष्य की रणनीति और समन्वय
गठबंधन ने तय किया है कि हर 2 महीने में इंडिया गठबंधन की एक बड़ी बैठक आयोजित की जाएगी, जिसकी अगली कड़ी हैदराबाद में होगी। इसके अलावा, संसद के आगामी मानसून सत्र के दौरान हर सुबह विपक्षी नेताओं के घर पर समन्वय बैठकें की जाएंगी। खरगे ने जब यह बताया कि उद्धव ठाकरे और हेमंत सोरेन बैठक में शारीरिक रूप से मौजूद नहीं थे लेकिन वे सभी निर्णयों से सहमत हैं, तब ममता बनर्जी ने दूसरा शब्द "वर्चुअली" कहा। इसका अर्थ था कि वे दोनों नेता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक में शामिल हुए थे।
जबरदस्ती हार का दावा और सुरक्षा का मुद्दा
हालांकि प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममता बनर्जी शांत रहीं, लेकिन गठबंधन की आंतरिक बैठक में उन्होंने अपनी बात रखी। उन्होंने दावा किया कि बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को जबरदस्ती हराया गया है। उन्होंने अन्य राज्यों के नेताओं को आगाह करते हुए कहा कि जो आज बंगाल में हुआ है, वह कल दूसरे राज्यों में भी हो सकता है। ममता ने बैठक में सोनारपुर में अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया और गौरतलब है कि इस महत्वपूर्ण बैठक में डीएमके और आम आदमी पार्टी के प्रतिनिधि शामिल नहीं हुए थे। प्रेस कॉन्फ्रेंस खत्म होते ही ममता बनर्जी सबसे पहले वहां से निकल गईं, जिससे उनकी वर्तमान राजनीतिक असहजता साफ झलक रही थी।