महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर से गरमाता हुआ दिखाई दे रहा है। जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव से मराठा आंदोलन का नेतृत्व कर रहे मनोज जरांगे पाटील ने एक बार फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और प्राप्त जानकारी के अनुसार, मनोज जरांगे पाटील कल यानी आने वाले दिन एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस करने जा रहे हैं। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से वे मराठा समाज के लिए आंदोलन की नई तारीख और भविष्य की रणनीति का औपचारिक ऐलान कर सकते हैं। इस घोषणा से राज्य की राजनीति और सामाजिक व्यवस्था में एक नई हलचल पैदा होने की संभावना जताई जा रही है।
सरकार पर वादे खिलाफी का आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस के आयोजन से पहले ही मनोज जरांगे पाटील ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवालिया निशान खड़े किए हैं। उनका स्पष्ट रूप से आरोप है कि सरकार ने मराठा समाज को जो आश्वासन दिए थे, उन्हें अब तक धरातल पर नहीं उतारा गया है। जरांगे ने सरकार को घेरते हुए कहा कि कुणबी प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया, हैदराबाद गजेटियर के कार्यान्वयन और आंदोलनकारियों पर दर्ज किए गए पुलिस मामलों को वापस लेने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सरकार का रुख ढुलमुल रहा है। उन्होंने सीधे तौर पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि मराठा समाज के साथ किए गए वादों को पूरा करने में देरी की जा रही है।
प्रमाणपत्र वितरण और हैदराबाद गजेटियर का मुद्दा
मनोज जरांगे पाटील ने विशेष रूप से हैदराबाद गजेटियर के आधार पर दिए जाने वाले प्रमाणपत्रों का मुद्दा उठाया है। उन्होंने जानकारी दी कि हैदराबाद गजेटियर के आधार पर अब तक केवल 308 प्रमाणपत्र ही वितरित किए गए हैं। जरांगे ने सरकार से यह तीखा सवाल पूछा है कि इन 308 प्रमाणपत्रों के वितरण के बाद पूरी प्रक्रिया अचानक क्यों रुक गई और इसे आगे क्यों नहीं बढ़ाया गया। उन्होंने इस बात पर भी नाराजगी जाहिर की कि पिछले आठ महीनों का लंबा समय बीत जाने के बावजूद, बड़ी संख्या में जो लोग इन प्रमाणपत्रों के लिए पात्र पाए गए हैं, उन्हें अब तक उनके अधिकार का दस्तावेज क्यों नहीं मिल सका है।
सातारा संस्थान और पुलिस मामलों की स्थिति
आंदोलन के दौरान मराठा समाज के युवाओं और कार्यकर्ताओं पर जो पुलिस मामले दर्ज किए गए थे, उन्हें वापस लेना सरकार के प्रमुख आश्वासनों में से एक था। जरांगे पाटील का कहना है कि यह वादा भी अब तक अधूरा ही है और इसके साथ ही, उन्होंने सातारा संस्थान से संबंधित जीआर (Government Resolution) का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, राज्य सरकार ने इस जीआर को जल्द से जल्द जारी करने की बात कही थी, लेकिन वास्तविकता यह है कि इस दिशा में अब तक कोई भी ठोस या प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है। इससे समाज के भीतर सरकार के प्रति अविश्वास की भावना बढ़ रही है।
शिंदे समिति की कार्यप्रणाली पर सवाल
मनोज जरांगे पाटील ने शिंदे समिति के कामकाज के तरीके पर भी कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि इस समिति को बार-बार समय विस्तार (Extension) दिया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर जो काम होना चाहिए, वह नहीं दिख रहा है। विशेष रूप से पुराने रिकॉर्ड खोजने की प्रक्रिया की गति बहुत धीमी है। जरांगे ने मांग की है कि जो 58 लाख रिकॉर्ड अब तक खोजे गए हैं, उन्हें राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि जब ये रिकॉर्ड सार्वजनिक होंगे, तभी मराठा समाज को अपनी वास्तविक स्थिति और अधिकारों की सही जानकारी मिल पाएगी।
अब पूरे महाराष्ट्र की नजरें कल अंतरवाली सराटी में होने वाली इस प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी हुई हैं। मनोज जरांगे पाटील द्वारा किए जाने वाले ऐलान से यह तय होगा कि मराठा आरक्षण की लड़ाई आने वाले दिनों में क्या मोड़ लेती है और यदि आंदोलन के अगले चरण की घोषणा होती है, तो इससे राज्य सरकार पर दबाव और बढ़ सकता है। फिलहाल, जालना के इस छोटे से गांव से निकलने वाली आवाज ने एक बार फिर राज्य के सियासी गलियारों में बेचैनी पैदा कर दी है और सभी को कल के आधिकारिक बयान का इंतजार है।