राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क के भक्ति सेंटर, जो कि एक प्रसिद्ध इस्कॉन मंदिर है, में लोगों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कृष्ण चेतना को जगाने का आह्वान किया। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि हम सब एक हैं और दुनिया के तमाम विरोधाभासों के बावजूद, अंततः सब कुछ कृष्ण ही हैं और यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब आरएसएस और इस्कॉन दोनों ही अपने महत्वपूर्ण पड़ावों का जश्न मना रहे हैं, जो वैश्विक मंच पर आध्यात्मिकता और सामाजिक सेवा के संदेश को रेखांकित करता है।
कृष्ण चेतना और भगवद् गीता की मुख्य शिक्षा
भक्ति सेंटर में उपस्थित भक्तों और अन्य लोगों को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि पूरी दुनिया कृष्णमय है और हमें उनकी चेतना को जगाना होगा। उन्होंने विस्तार से बताया कि हम सब एक हैं और इस दुनिया के विरोधाभासों के बीच भी यह गहरी समझ रखते हैं कि इतनी विविधता, टकराव और विरोधाभासों के बावजूद, अंततः सब कुछ कृष्ण ही हैं। भागवत के अनुसार, यही भगवद् गीता की मुख्य शिक्षा है। उन्होंने संदेश दिया कि मनुष्य को जीवन से भागना नहीं चाहिए, बल्कि डटकर खड़े रहना चाहिए और अपना कर्तव्य निभाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह समझना आवश्यक है कि सब कुछ दिव्य है। यदि यह संदेश हर दिल तक पहुंच जाए, तो हमारी दुनिया सचमुच एक बेहतर जगह बन जाएगी और यह आज की भौतिक सीमाओं में बंधी नहीं रहेगी, बल्कि सभी इंसानों के लिए स्वर्ग जैसी जगह बन जाएगी।
कॉर्पोरेट संगठन का उदाहरण और दिव्य सेवा
उच्च चेतना और सामूहिक प्रयास के विचार को समझाने के लिए मोहन भागवत ने एक कॉर्पोरेट संगठन का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि एक कॉर्पोरेट संगठन के बारे में सोचिए जहां डायरेक्टर और सीईओ एक रणनीतिक योजना बनाते हैं और अनगिनत लोग उस विजन को साकार करने के लिए मिलकर काम करते हैं। उन्होंने बताया कि कुछ लोग उस बड़ी योजना को समझते हैं, तो कुछ शायद नहीं, फिर भी हर कोई उसी अंतिम उद्देश्य के लिए योगदान देता है। जब सभी को यह एहसास होता है कि वे एक साझा लक्ष्य के लिए काम कर रहे हैं, तो प्रगति की गति काफी बढ़ जाती है। इस समझ के साथ कि हम सब मिलकर उस दिव्य सेवा में लगे हैं, उन्होंने वहां मौजूद लोगों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि आपको इस पवित्र स्थान पर बार-बार लगभग रोज आने का सौभाग्य मिलता है, जिससे आप लगातार कृष्ण चेतना से जुड़े रहते हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि आज हम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की शताब्दी भी मना रहे हैं, जो समाज को इसी उच्च चेतना को हर जगह ले जाने के लिए तैयार करने का प्रयास करता है।
प्रभुपाद की विरासत और ऐतिहासिक स्थल का दौरा
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत न्यूयॉर्क शहर में 26 सेकंड एवेन्यू भी पहुंचे। यह वही ऐतिहासिक स्थान है जहां स्वामी प्रभुपाद ने पहला इस्कॉन मंदिर स्थापित किया था। इस दौरे के दौरान, उन्होंने शहर में बेघर लोगों की मदद के मकसद से चलाए जा रहे भोजन वितरण कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया। यह न्यूयॉर्क में 26 सेकंड एवेन्यू स्थित इस्कॉन की 60वीं वर्षगांठ का जश्न था। इस खास मौके पर आरएसएस प्रमुख ने भगवान की आरती की और प्रार्थना की, जिससे इस संस्थान की गौरवशाली यात्रा को सम्मान मिला।
सेवा और सामाजिक बदलाव पर चर्चा
इस्कॉन की गवर्निंग बॉडी कमीशन (जीबीसी) के सदस्य गौरंग दास ने कहा कि यह हमारे लिए बहुत गर्व की बात है कि सरसंघचालक मोहन भागवत आज मैनहट्टन में इस्कॉन मंदिर आए हैं। उन्होंने याद दिलाया कि 1966 में इस्कॉन के संस्थापक श्रील प्रभुपाद ने न्यूयॉर्क में ही इस्कॉन की स्थापना की थी। इस साल, जब आरएसएस अपनी 100वीं वर्षगांठ मना रहा है, इस्कॉन अपनी 60वीं वर्षगांठ मना रहा है। गौरंग दास ने बताया कि मोहन भागवत के साथ तीन मुख्य विषयों पर चर्चा की गई: आध्यात्मिकता, सेवा और सामाजिक बदलाव और पिछले एक साल से इस्कॉन 'जीरो हंगर न्यूयॉर्क' नाम से एक बड़ा अभियान चला रहा है। इस यात्रा के दौरान मोहन भागवत ने 1,00,000वीं प्लेट परोसे जाने के खास मौके का उद्घाटन किया। उन्होंने आगे कहा कि इस यात्रा के दौरान इस बात पर भी चर्चा हुई कि हिंदू सनातन धर्म को हर घर तक कैसे पहुंचाया जाए और लोगों को इसे अपने रोजमर्रा के जीवन में अपनाने के लिए कैसे प्रेरित किया जाए।
न्यूयॉर्क में कार्यक्रम का विरोध
मोहन भागवत के न्यूयॉर्क दौरे को लेकर कुछ विरोध भी देखने को मिला। 29 अगस्त को उनके कार्यक्रमों के खिलाफ प्रदर्शन किए गए। न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान मम्दानी ने आरएसएस के खिलाफ टिप्पणी की। इसके अलावा, अमेरिका में कई हिंदू संगठनों ने भी मैडिसन स्क्वायर गार्डन में होने वाले 'यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन' कार्यक्रम का विरोध किया, जिसका आयोजन अहेड (AHEAD) फोरम कर रहा है। 'हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स' नाम के संगठन की डायरेक्टर सुनीता विश्वनाथ ने बताया कि 61 अलग-अलग धर्मों और सेक्युलर संगठनों ने इस कार्यक्रम के खिलाफ एक ओपन लेटर लिखा है। उन्होंने कहा कि इन संगठनों के कई लोग खुद वहां जाकर यह संदेश देंगे कि आरएसएस और उनकी विचारधारा उनका प्रतिनिधित्व नहीं करती है।