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नवजोत कौर सिद्धू का कांग्रेस पर हमला: राहुल गांधी की तीखी आलोचना।

नवजोत कौर सिद्धू का कांग्रेस पर हमला: राहुल गांधी की तीखी आलोचना।
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पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी और पूर्व विधायक डॉ. नवजोत कौर सिद्धू ने कांग्रेस पार्टी से निलंबित किए जाने के बाद पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पिछले महीने मुख्यमंत्री पद के लिए ₹500 करोड़ की कथित मांग से संबंधित विवादित बयान के बाद कांग्रेस ने उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया था। इस कार्रवाई के जवाब में नवजोत कौर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक विस्तृत पोस्ट साझा कर राहुल गांधी और कांग्रेस के आंतरिक कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

राहुल गांधी और नेतृत्व क्षमता पर तीखा प्रहार

नवजोत कौर सिद्धू ने अपने पोस्ट में राहुल गांधी के लिए 'पप्पू' शब्द का प्रयोग करते हुए उन पर जमीनी हकीकत से कटे होने का आरोप लगाया और उन्होंने लिखा कि एक ऐसा नेता जो खुद को अकेला ईमानदार और जानकार समझता है, वह वास्तव में धरातल की परिस्थितियों से पूरी तरह अनभिज्ञ है। सिद्धू ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के इर्द-गिर्द रहने वाला 'इनर सर्कल' उन्हें वास्तविक जानकारी से दूर रखता है। उनके अनुसार, यह घेरा पार्टी के महत्वपूर्ण फैसले लेने से बहुत पहले ही टिकटों का सौदा कर लेता है और विलासिता का जीवन जीता है। उन्होंने नेतृत्व की कार्यक्षमता पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी आपातकालीन स्थिति या महत्वपूर्ण कॉल पर प्रतिक्रिया देने में नेतृत्व को 6 महीने से अधिक का समय लग जाता है, जिससे पार्टी को अपूरणीय क्षति होती है।

भ्रष्टाचार और टिकट वितरण के गंभीर आरोप

अपने सोशल मीडिया पोस्ट में डॉ. सिद्धू ने कांग्रेस के भीतर व्याप्त भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के अधिकांश अनुयायी निस्वार्थ सेवा के बजाय अपनी जेबें भरने में व्यस्त हैं। उन्होंने राहुल गांधी को चुनौती देते हुए कहा कि उन्हें अपने समर्थकों से पूछना चाहिए कि क्या वे वास्तव में पंजाब के लिए ईमानदारी से काम करने को तैयार हैं और सिद्धू ने आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर ऐसे लोग हावी हैं जो जानते हैं कि वे सत्ता में वापस नहीं आने वाले हैं, इसलिए वे वर्तमान समय का उपयोग केवल निजी लाभ के लिए कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर इन नेताओं में हिम्मत है, तो वे मौजूदा सरकार के खिलाफ बोलकर दिखाएं और अपनी फाइलें खुलने के लिए तैयार रहें।

भाजपा के साथ कार्यकाल की तुलना और सराहना

नवजोत कौर सिद्धू ने अपने राजनीतिक करियर के शुरुआती दिनों को याद करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की कार्यप्रणाली की सराहना की। उन्होंने बताया कि 2012 में जब वह अस्पताल में कार्यरत थीं, तब भाजपा ने उनके टैलेंट को पहचाना और सर्वे के आधार पर उन्हें विधायक का टिकट दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा शासन के दौरान उन्हें ईमानदारी से काम करने और सच बोलने की पूरी आजादी मिली थी। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग में मुख्य संसदीय सचिव (CPS) के रूप में अपने कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय वह किसी भी विभाग में जाकर काम करवा सकती थीं और उन्हें उचित सम्मान मिलता था। यह तुलना स्पष्ट रूप से कांग्रेस के वर्तमान संगठनात्मक ढांचे के प्रति उनकी नाराजगी को दर्शाती है।

पंजाब के भविष्य और व्यक्तिगत प्रतिबद्धता पर विश्लेषण

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, नवजोत कौर सिद्धू का यह बयान पंजाब कांग्रेस के भीतर चल रही गुटबाजी और असंतोष को उजागर करता है। सिद्धू ने स्पष्ट किया कि उनके पास राहुल गांधी की 'काल्पनिक दुनिया' के लिए समय नहीं है और उनकी प्राथमिकता केवल पंजाब के लोगों की सेवा करना है। उन्होंने घोषणा की कि वह राजनीति के बिना भी एक फाउंडेशन के माध्यम से जनता के लिए काम करना जारी रखेंगी और विश्लेषकों का मानना है कि सिद्धू परिवार का कांग्रेस से यह मोहभंग पंजाब की राजनीति में नए समीकरण बना सकता है। उन्होंने अंत में चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि ईमानदार और मेहनती लोगों का सम्मान नहीं किया गया, तो पार्टी अपना वजूद खो देगी।

निष्कर्ष और भविष्य की राह

नवजोत कौर सिद्धू के इस कड़े रुख ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उनके और कांग्रेस के बीच के रास्ते अब पूरी तरह अलग हो चुके हैं। जहां एक ओर कांग्रेस ने अनुशासनहीनता के आधार पर उन पर कार्रवाई की है, वहीं सिद्धू ने इसे नेतृत्व की विफलता और भ्रष्टाचार का मुद्दा बनाकर पलटवार किया है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या नवजोत सिंह सिद्धू भी अपनी पत्नी के सुर में सुर मिलाते हैं या वह पार्टी के भीतर रहकर अपनी लड़ाई जारी रखते हैं। फिलहाल, डॉ और सिद्धू ने समाज सेवा के माध्यम से पंजाब की भलाई के लिए अपनी ऊर्जा लगाने का संकल्प दोहराया है।

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