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नायरा एनर्जी ने पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाए, सरकारी कंपनियों ने कीमतें रखीं स्थिर

नायरा एनर्जी ने पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाए, सरकारी कंपनियों ने कीमतें रखीं स्थिर
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निजी क्षेत्र की प्रमुख ईंधन रिटेलर नायरा एनर्जी ने देश भर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि करने का निर्णय लिया है। सूत्रों के अनुसार, कंपनी ने पेट्रोल की कीमतों में ₹5 प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में ₹3 प्रति लीटर का इजाफा किया है। भारत में संचालित कुल 102,075 पेट्रोल पंपों में से 6,967 का संचालन करने वाली नायरा एनर्जी ने यह कदम इनपुट लागत में हुई बढ़ोतरी के बोझ को कम करने के लिए उठाया है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने सामान्य ईंधन की कीमतों को स्थिर बनाए रखा है।

कीमतों में वृद्धि और क्षेत्रीय भिन्नता

रूस की दिग्गज तेल कंपनी रोसनेफ्ट (Rosneft) के बहुमत स्वामित्व वाली नायरा एनर्जी द्वारा की गई यह मूल्य वृद्धि विभिन्न राज्यों में अलग-अलग हो सकती है और 30 प्रति लीटर तक पहुंच गई है। निजी ईंधन खुदरा विक्रेताओं को सरकारी तेल कंपनियों की तरह कीमतों को स्थिर रखने से होने वाले नुकसान के लिए सरकार से कोई वित्तीय मुआवजा नहीं मिलता है। अधिकारियों के अनुसार, बढ़ते परिचालन घाटे को देखते हुए कंपनी के पास खुदरा कीमतों में वृद्धि करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं बचा था।

जियो-बीपी और सरकारी कंपनियों का रुख

नायरा एनर्जी के विपरीत, रिलायंस इंडस्ट्रीज और बीपी पीएलसी (BP Plc) के संयुक्त उद्यम जियो-बीपी (Jio-bp) ने फिलहाल कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। जियो-बीपी के देश भर में 2,185 आउटलेट हैं और रिपोर्टों के अनुसार, कंपनी पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर भारी नुकसान उठाने के बावजूद पुरानी दरों पर ही ईंधन बेच रही है। वहीं, बाजार में लगभग 90 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली सरकारी तेल कंपनियां—इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL), और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL)—अभी भी कीमतों को स्थिर बनाए हुए हैं। सरकारी कंपनियों को अक्सर नीतिगत निर्णयों के तहत कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए सरकार का समर्थन प्राप्त होता है।

प्रीमियम ईंधन और थोक डीजल की दरों में बदलाव

हालांकि सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमतें अप्रैल 2022 से काफी हद तक स्थिर बनी हुई हैं, लेकिन हाल ही में कुछ विशिष्ट श्रेणियों में बदलाव देखे गए हैं। पिछले सप्ताह, तीनों प्रमुख सरकारी खुदरा विक्रेताओं ने प्रीमियम या हाई-ग्रेड पेट्रोल की कीमतों में ₹2 प्रति लीटर की वृद्धि की थी। इसके अतिरिक्त, औद्योगिक उपयोगकर्ताओं को बेचे जाने वाले थोक (Bulk) डीजल की दरों में लगभग ₹22 प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी की गई है। 59 प्रति लीटर पर पहुंच गई है।

वैश्विक तेल बाजार और आयात निर्भरता

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 88 प्रतिशत हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है। हाल के महीनों में भू-राजनीतिक तनाव, विशेष रूप से ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष के कारण, अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतें $119 प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, जो बाद में घटकर लगभग $100 प्रति बैरल के स्तर पर आ गईं। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों पर सुरक्षा चिंताओं ने भी आपूर्ति श्रृंखला और बीमा लागतों को प्रभावित किया है, जिससे तेल कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ा है।

तेल कंपनियों का वित्तीय प्रदर्शन

वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के दौरान तेल कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ता है, लेकिन कीमतों में कमी आने पर वे अपने मार्जिन में सुधार करती हैं। वित्त वर्ष 2023-24 में, तीनों प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों ने रिकॉर्ड ₹81,000 करोड़ का शुद्ध लाभ दर्ज किया था, जिससे उन्हें पिछले वर्षों के नुकसान की भरपाई करने में मदद मिली। चालू वित्त वर्ष की दिसंबर तिमाही में भी इन कंपनियों ने सामूहिक रूप से ₹23,743 करोड़ का मुनाफा कमाया है। सरकार का आधिकारिक रुख यह रहा है कि पेट्रोल और डीजल विनियंत्रित (Deregulated) उत्पाद हैं, और इनकी कीमतें बाजार की स्थितियों के आधार पर तेल विपणन कंपनियों द्वारा स्वतंत्र रूप से तय की जाती हैं।

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