राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) अपने कुनबे को बढ़ाने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि डीएमके और शिरोमणि अकाली दल आने वाले समय में बीजेपी के साथ हाथ मिला सकते हैं। इसके साथ ही, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दोनों धड़ों को भी एक होने के बाद एनडीए में शामिल होने का स्पष्ट संदेश दे दिया गया है। इन संभावित बदलावों को संसद में संख्याबल बढ़ाने और महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित करने के लिए आवश्यक दो तिहाई बहुमत के करीब पहुंचने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
डीएमके और बीजेपी के बीच बढ़ती नजदीकी
भविष्य में डीएमके और बीजेपी के एक साथ आने की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। वर्तमान में डीएमके के पास लोकसभा और राज्यसभा को मिलाकर कुल 30 सांसद हैं, जो केंद्र में किसी भी गठबंधन के लिए एक बड़ी ताकत साबित हो सकते हैं। तमिलनाडु की राजनीति में आए बदलावों, विशेषकर मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद, डीएमके अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर नफा-नुकसान का आकलन कर रही है। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद डीएमके के कई नेता पहले ही पाला बदल चुके हैं। चूंकि अगले चुनाव में अभी 5 साल का समय शेष है, इसलिए पार्टी के अस्तित्व को बचाए रखने और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने के लिए डीएमके केंद्र की सत्ताधारी पार्टी के साथ संबंध सुधारने पर विचार कर रही है।
स्पीकर की चाय पार्टी और कनिमोझी की मुलाकात
इस राजनीतिक बदलाव का एक बड़ा संकेत तब मिला जब लोकसभा सत्र के समापन पर स्पीकर द्वारा आयोजित पारंपरिक चाय पार्टी में डीएमके शामिल हुई। जहां एक तरफ पूरे विपक्ष ने इस कार्यक्रम का बहिष्कार किया था, वहीं डीएमके ने विपक्ष की परवाह न करते हुए अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। डीएमके की ओर से कनिमोझी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अन्य एनडीए नेताओं के साथ लंबी बातचीत की। इससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य की सत्ता से बाहर होने के बाद डीएमके केंद्र सरकार के साथ अपने संबंधों को मधुर बनाए रखना चाहती है। डीएमके का यह रुख परिसीमन विधेयक और महिला आरक्षण विधेयक जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर एनडीए सरकार के लिए मददगार साबित हो सकता है।
डीएमके के भीतर दो फाड़ और वैचारिक चुनौतियां
एनडीए में शामिल होने को लेकर डीएमके के भीतर दो अलग-अलग राय उभर कर सामने आई हैं। पार्टी का एक धड़ा केंद्र सरकार को केवल मुद्दा आधारित समर्थन देने के पक्ष में है, क्योंकि उन्हें डर है कि एनडीए के साथ पूरी तरह जाने से उनकी द्रविड़ राजनीति का आधार कमजोर हो सकता है। दूसरी ओर, बीजेपी के कुछ नेता भी डीएमके के पुराने सनातन विरोधी रुख को देखते हुए केवल मुद्दा आधारित समर्थन लेने के पक्ष में हैं और एनडीए में डीएमके के औपचारिक प्रवेश और केंद्र सरकार में उनकी भागीदारी पर अंतिम फैसला आने वाले दिनों में दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व द्वारा लिया जाएगा।
एनसीपी का एकीकरण और केंद्र में भागीदारी
महाराष्ट्र की राजनीति में भी बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। एनसीपी के दोनों धड़ों के एकीकरण की चर्चाएं अब तेज हो गई हैं। बीजेपी ने यह साफ कर दिया है कि दोनों गुटों के विलय का लाभ महाराष्ट्र को मिल सकता है। सूत्रों के अनुसार, बीजेपी ने दोनों धड़ों को संदेश भेजा है कि विलय के बाद एकीकृत एनसीपी एनडीए का हिस्सा बन सकती है और केंद्र सरकार में भी शामिल हो सकती है। संसद के मानसून सत्र के दौरान सुप्रिया सुले ने प्रधानमंत्री मोदी से 2 बार मुलाकात की है, जबकि शरद पवार ने 1 बार मुलाकात की है। बीजेपी नेतृत्व चाहता है कि एनसीपी के दोनों धड़े एक साथ आएं और सरकार का हिस्सा बनें। इसके लिए दिल्ली और महाराष्ट्र के नेताओं को विशेष जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। माना जा रहा है कि अगले मंत्रिमंडल विस्तार में एकीकृत एनसीपी को 2 मंत्री पद मिल सकते हैं, जिसमें पार्टी ने कृषि मंत्रालय और सहकारिता मंत्रालय पर विशेष जोर दिया है।
शिरोमणि अकाली दल और पंजाब की राजनीति
प्रधानमंत्री मोदी और शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की हालिया मुलाकात के बाद दोनों दलों के फिर से साथ आने की अटकलें तेज हैं। हालांकि लोकसभा में शिरोमणि अकाली दल का केवल 1 सांसद है, लेकिन पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में यह गठबंधन दोनों दलों के लिए फायदेमंद हो सकता है। नांदेड़ में सुखबीर बादल पर हुए हमले के बाद प्रधानमंत्री मोदी सहित बीजेपी के शीर्ष नेताओं ने उनकी पत्नी और सांसद हरसिमरत कौर से फोन पर बात कर हालचाल जाना। इसके अलावा, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस हमले की जांच के आदेश भी दिए हैं, जो दोनों दलों के बीच बढ़ती संवेदनशीलता को दर्शाता है।