नेपाल बाढ़ त्रासदी: 734 शव बरामद और दूसरी बाढ़ की चेतावनी से बढ़ा खतरा

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नेपाल बाढ़ त्रासदी: 734 शव बरामद और दूसरी बाढ़ की चेतावनी से बढ़ा खतरा
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नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ और प्राकृतिक आपदा ने पूरे देश में हाहाकार मचा दिया है। शनिवार शाम तक प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस आपदा में अब तक 734 शव बरामद किए जा चुके हैं। मृतकों की संख्या में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने प्रशासन की चुनौतियों को बढ़ा दिया है और स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि स्थानीय मुर्दाघरों में अब शवों को रखने के लिए जगह शेष नहीं बची है। इसके परिणामस्वरूप, सरकार ने मृतकों के शवों को एयरटाइट बैग में रखकर दफनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। राहत और बचाव अभियान अभी भी युद्ध स्तर पर जारी है, क्योंकि हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

तिब्बत में बर्फ टूटने से आई तबाही और नई चेतावनी

इस भीषण तबाही का मुख्य कारण तिब्बत के पहाड़ों में बर्फ का एक विशाल टुकड़ा टूटना बताया जा रहा है। इसके कारण पानी के साथ भारी मात्रा में मलबा और बड़ी चट्टानें बहकर आईं, जिन्होंने अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को नष्ट कर दिया। अब चिंता की बात यह है कि तिब्बत में एक बार फिर वैसे ही हालात बन रहे हैं, जिसके कारण दूसरी बार भयंकर बाढ़ आने की चेतावनी जारी की गई है। यदि दोबारा भारी मात्रा में पानी और मलबा निचले इलाकों में आता है, तो इससे और भी अधिक जान-माल का नुकसान होने की आशंका है।

नदियों के जलस्तर पर अलर्ट और प्रशासनिक कार्रवाई

नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए लोगों को सतर्क किया है। अथॉरिटी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि रासुवा जिला प्रशासन कार्यालय को भोटे कोशी नदी में बाढ़ का बहाव तेज होने की आवाजें सुनाई देने की सूचना मिली है। इस खतरे को देखते हुए रासुवा, नुवाकोट और धाडिंग जैसे नदी के आस-पास के इलाकों में रहने वाले लोगों से विशेष सावधानी बरतने का अनुरोध किया गया है। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जैसे ही नई जानकारी प्राप्त होगी, अपडेट जारी किए जाएंगे।

भारतीय नागरिकों की स्थिति और रेस्क्यू ऑपरेशन

विदेश मंत्रालय द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस भयानक बाढ़ के बाद 275 से ज्यादा भारतीय नागरिक लापता हैं। राहत की बात यह है कि अब तक 108 लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया है। इसके अलावा, भारतीय मूल के 128 लोग भी लापता बताए जा रहे हैं। पिछले दो दिनों के दौरान, 598 भारतीय नागरिक चीन की सीमा से सुरक्षित रूप से नेपाल में प्रवेश कर चुके हैं। वर्तमान में लगभग 900 भारतीय अभी भी चीन में मौजूद हैं, लेकिन वे पूरी तरह सुरक्षित हैं और उनसे संपर्क बना हुआ है। रासुवा के एक हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में फंसे चार भारतीय नागरिकों, जिनमें रिपु कुमार, चनेश्वर नरजरी, कृपा शंकर और मोहम्मद मिन्हाजुद्दीन शामिल हैं, को सफलतापूर्वक बचा लिया गया है। उन्हें जल्द ही काठमांडू ले जाया जाएगा।

भारत की ओर से भेजी गई राहत सामग्री और तकनीकी मदद

संकट की इस घड़ी में भारत ने नेपाल की ओर मदद का हाथ बढ़ाते हुए शनिवार को इंडियन एयर फोर्स के C-130J मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ़्ट के जरिए 11 टन राहत सामग्री की चौथी खेप भेजी है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जानकारी दी कि इस विमान में सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए आवश्यक उपकरणों के साथ एक तकनीकी टीम भी भेजी गई है। इसके साथ ही, शवों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए DNA एनालिसिस हेतु फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की एक टीम और फॉरेंसिक उपकरण भी भेजे गए हैं और यह टीम बाढ़ में मारे गए लोगों की पहचान करने में नेपाली अधिकारियों की सहायता करेगी। भारत अब तक नेपाल को कुल 68 दशमलव 5 टन राहत सामग्री उपलब्ध करा चुका है।

बुनियादी ढांचे का पुनर्निर्माण और चुनौतियां

बाढ़ के कारण टूटे संपर्कों को जोड़ने के लिए भारत ने 230 फुट के सिंगल लेन मॉड्यूलर स्टील ब्रिज के उपकरण ले जाने वाले 16 ट्रक नेपाल भेजे हैं, जो वहां पहुंच चुके हैं। इसके अतिरिक्त, सात और बेली ब्रिज लगाने के लिए आवश्यक उपकरण जल्द ही सप्लाई किए जाएंगे और उन्हें स्थापित करने के लिए तकनीकी टीमें भी जल्द पहुंचेंगी। दूसरी ओर, टनल में फंसे लोगों को निकालने के कार्य में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। टनल के भीतर मलबे की एक बहुत मोटी परत जमी हुई है, जिसके कारण रेस्क्यू ऑपरेशन की गति अत्यंत धीमी है। नदियों का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने से बचाव कार्यों में लगे कर्मियों और स्थानीय निवासियों की चिंताएं और बढ़ गई हैं।

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