नेपाल में बाढ़ का तांडव: वायुसेना का C17 विमान काठमांडू के लिए तैयार, 400 लोग लापता

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नेपाल में बाढ़ का तांडव: वायुसेना का C17 विमान काठमांडू के लिए तैयार, 400 लोग लापता
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नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है और इस संकट की घड़ी में भारत ने पड़ोसी देश की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। भारतीय वायुसेना के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, वायुसेना का C17 ग्लोबमास्टर विमान आज रात काठमांडू के लिए उड़ान भर सकता है ताकि वहां राहत और बचाव कार्यों में सहायता प्रदान की जा सके। इसके साथ ही, वायुसेना का C-130 विमान भी राहत सामग्री लेकर नेपाल जाएगा। भारत सरकार इस पूरी आपदा पर पैनी नजर बनाए हुए है और नेपाल के साथ निरंतर समन्वय कर रही है। इस भीषण बाढ़ के कारण नेपाल के कई हिस्सों में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है और भारी जान-माल का नुकसान हुआ है।

400 लोग लापता और भारी जनहानि

नेपाल में अचानक आई इस बाढ़ के बाद स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 400 लोग लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल पर्यटन बोर्ड ने जानकारी दी है कि इन लापता लोगों में 291 विदेशी नागरिक और 93 नेपाली नागरिक शामिल हैं। विदेशी नागरिकों में सबसे बड़ी संख्या भारतीयों की है, जिनमें कम से कम 105 भारतीय पर्यटक और 37 एनआरआई शामिल हैं। लापता लोगों की सूची में अमेरिका, मलेशिया, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड के यात्री भी शामिल हैं। अधिकारियों द्वारा कुछ अन्य लोगों की राष्ट्रीयता की पुष्टि की जा रही है और अब तक इस आपदा में कम से कम 46 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। बाढ़ के कारण कई बस्तियां और इमारतें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं, जिससे हजारों लोग प्रभावित हुए हैं।

बाढ़ का मुख्य कारण और GLOF की आशंका

नेपाल की भोटे कोशी नदी में अचानक आए जलस्तर में वृद्धि के कारणों की जांच की जा रही है। नेपाल के जल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह बाढ़ रसुवा क्षेत्र में हुई बारिश के कारण नहीं आई है। सेंट्रल वॉटर कमीशन (CWC) और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नेपाल-चीन सीमा के पास GLOF यानी ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड जैसी गतिविधि होने की संभावना जताई जा रही है और इसके कारण भारतीय सीमा से लगभग 160 किमी दूर नेपाल में फुरके खोला के पास त्रिशूली नदी के जलस्तर में अचानक भारी वृद्धि देखी गई है। आशंका जताई जा रही है कि बाढ़ की यह लहर गंडक नदी के माध्यम से भारतीय क्षेत्रों में प्रवेश कर सकती है। इसी को देखते हुए भारत-नेपाल सीमा के पास स्थित बिहार और उत्तर प्रदेश के जिलों में अलर्ट जारी किया गया है।

बिहार और उत्तर प्रदेश में NDRF हाई अलर्ट पर

गंडक नदी में संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए भारत में NDRF की टीमों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। बिहार के मुख्यमंत्री ने स्थिति का जायजा लिया है और गंडक नदी के किनारे वाले क्षेत्रों में विशेष निगरानी के निर्देश दिए हैं। स्थिति का आकलन करने के बाद, पश्चिमी चंपारण और मुजफ्फरपुर में तैनाती के लिए NDRF की 2 टीमें भेजी गई हैं। वर्तमान में बिहार में कुल 9 टीमें तैनात हैं जो स्थिति पर नजर रख रही हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार भी पूरी तरह सतर्क है। कुशीनगर जिले में, जो गंडक नदी के करीब होने के कारण संवेदनशील है, NDRF की एक अतिरिक्त टीम तैनात की गई है। उत्तर प्रदेश में बाढ़ की चेतावनी और बचाव कार्यों के लिए कुल 11 टीमें तैनात की गई हैं। NDRF का कहना है कि वे बिहार और उत्तर प्रदेश की राज्य सरकारों और CWC के साथ मिलकर स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और किसी भी आपात स्थिति के लिए अतिरिक्त टीमें स्टैंडबाय पर रखी गई हैं।

प्रभावित क्षेत्र और राहत कार्य

नेपाल में इस विनाशकारी बाढ़ से रसुवा जिला सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। तिमुरे और स्याफ्रुबेसी जैसे क्षेत्रों में भारी नुकसान की खबरें हैं। सीमा शुल्क परिसर में खड़े कई वाहन और वहां रखा सामान पानी के तेज बहाव में बह गया है। इसके अलावा, हाल ही में निर्मित एक पुल भी इस बाढ़ की भेंट चढ़ गया है। नदी के किनारे बसी कई बस्तियां जैसे स्याफ्रुबेसी, बेत्रावती, मैलुंग, सलेटार, शांतिबाजार, पैरेबेसी, खाल्टी बस्ती, सोल, त्रिशूली और बत्तर बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। लापता लोगों की तलाश के लिए नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस को तैनात किया गया है। राहत कार्यों में तेजी लाने के लिए 14 हेलीकॉप्टरों, ड्रोन और खोजी कुत्तों की मदद ली जा रही है ताकि फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकाला जा सके।

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