Operation Sindoor: लश्कर कमांडर हाफिज अब्दुल रऊफ का बड़ा कुबूलनामा, भारत के हमले से हिली पाकिस्तान की जड़ें

Operation Sindoor - लश्कर कमांडर हाफिज अब्दुल रऊफ का बड़ा कुबूलनामा, भारत के हमले से हिली पाकिस्तान की जड़ें
| Updated on: 15-Jan-2026 05:51 PM IST
पाकिस्तान के सबसे बड़े आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) ने आखिरकार स्वीकार कर लिया है। कि भारत का 'ऑपरेशन सिंदूर' उनके लिए एक अभूतपूर्व और सबसे बड़ा हमला था। इस चौंकाने वाले कुबूलनामे ने भारतीय सेना की रणनीतिक क्षमता और आतंकवाद के खिलाफ उसकी दृढ़ प्रतिबद्धता को एक बार फिर उजागर किया है। लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष कमांडर हाफिज अब्दुल रऊफ ने मुरीदके स्थित मरकज़-ए-तैयबा में आयोजित 29वें दीक्षांत समारोह के दौरान यह बात स्वीकार की, जहां उन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' को 'बड़ा हमला' करार दिया और कहा कि 'अल्लाह ने हमें बचा लिया' और यह बयान पाकिस्तान के भीतर आतंकवाद के बुनियादी ढांचे पर भारत के हमलों की गंभीरता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि और उद्देश्य

भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' 6-7 मई, 2025 को अंजाम दिया था। यह कार्रवाई अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए नृशंस आतंकी हमले के सीधे जवाब में की गई थी, जिसमें 26 पर्यटकों की आतंकियों ने निर्ममता से हत्या कर दी थी। इस हमले ने भारत को आतंकवाद के खिलाफ एक निर्णायक और कठोर प्रतिक्रिया देने के लिए मजबूर किया। भारतीय सेना का उद्देश्य पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में सक्रिय आतंकी संगठनों के ठिकानों को निशाना बनाना और उन्हें भारी क्षति पहुंचाना था, ताकि भविष्य में ऐसे हमलों को रोका जा सके। यह ऑपरेशन भारत की 'जीरो टॉलरेंस' नीति का एक स्पष्ट संदेश था।

सटीक मिसाइल हमले और आतंकी ठिकानों का विनाश

'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत, भारतीय सेना ने पाकिस्तान और PoK में कुल 9 आतंकी ठिकानों पर सटीक मिसाइल हमले किए। इन ठिकानों में लश्कर-ए-तैयबा का मुख्यालय मरकज़-ए-तैयबा, जो मुरीदके में स्थित है, और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) का बहावलपुर स्थित ठिकाना शामिल था। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, इन हमलों में LeT और JeM के कई शीर्ष आतंकवादी मारे गए, जिनमें मुरीदके के प्रमुख मुदस्सर खडियान खास, जिसे अबू जंदाल के नाम से भी जाना जाता है, जैसे कुख्यात आतंकी भी शामिल थे। इन हमलों की सटीकता और प्रभावशीलता ने पाकिस्तान के आतंकी नेटवर्क। की कमर तोड़ दी, जिससे उनकी संचालन क्षमता पर गहरा असर पड़ा।

हाफिज अब्दुल रऊफ का कुबूलनामा और पाकिस्तान की सांठगांठ

लश्कर का शीर्ष कमांडर अब्दुल रऊफ, जिसे अमेरिका द्वारा वैश्विक आतंकवादी घोषित किया गया है, हाफिज सईद का करीबी सहयोगी माना जाता है। इसी ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान मारे गए आतंकवादियों के जनाजे की अगुवाई की थी और उस जनाजे में पाकिस्तानी सेना के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे, जिससे एक बार फिर पाकिस्तान की आतंकवादियों से सांठगांठ और उन्हें मिलने वाले समर्थन की पोल खुल गई। रऊफ ने अपने भाषण में स्पष्ट रूप से कहा, '6-7 मई को मुरीदके में जो हुआ, वह बहुत घातक था। मस्जिद को निशाना बनाकर ध्वस्त किया गया। यह बड़ा हमला था, लेकिन अल्लाह ने हमें बचा लिया और बच्चे यहां नहीं थे, उनके शुभचिंतकों ने उन्हें हटा दिया था। ' यह बयान न केवल हमले की गंभीरता को स्वीकार करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि आतंकी संगठन अपने ठिकानों पर बच्चों को भी रखते थे, जिन्हें हमले से पहले हटा लिया गया था।

पाकिस्तान की बौखलाहट और भारत का पलटवार

भारत के इस सफल ऑपरेशन से पाकिस्तान पूरी तरह से बौखला गया था। जवाबी कार्रवाई में, पाकिस्तान ने भारत में ड्रोन और मिसाइल हमले किए, लेकिन भारतीय सेना ने उन सभी हमलों को पूरी तरह से नाकाम कर दिया। इस विफलता ने तुर्की के ड्रोन और चीनी मिसाइलों व फाइटर जेट्स की कथित श्रेष्ठता पर सवाल खड़े कर दिए और उनकी भारी बेइज्जती हुई। भारतीय सेना ने इसके बाद भी शांत नहीं बैठी और एक और भीषण पलटवार किया। इस पलटवार में भारत ने पाकिस्तान के 11 आर्मी बेस को ब्रह्मोस मिसाइल हमलों में उड़ा दिया, जिससे पाकिस्तान में खलबली मच गई और उसकी सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा।

युद्धविराम की गुहार और ऑपरेशन का स्थगन

भारतीय सेना के इस भीषण और निर्णायक हमले के बाद, पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को भारत से युद्धविराम की गुहार लगानी पड़ी। पाकिस्तान की ओर से की गई इस अपील के बाद, भारतीय। सेना ने अपने ऑपरेशन को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया। यह घटनाक्रम स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि भारत की सैन्य शक्ति और उसकी आतंकवाद विरोधी रणनीति ने पाकिस्तान को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था। 'ऑपरेशन सिंदूर' न केवल एक सफल सैन्य अभियान था, बल्कि यह आतंकवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ इच्छाशक्ति और क्षमता का प्रतीक भी बन गया है, जिसने क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित किया है।

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