संसद का आगामी मानसून सत्र काफी हंगामेदार रहने की उम्मीद जताई जा रही है। सोमवार से शुरू हो रहे इस सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने के पूरे आसार हैं। विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक ने सरकार को विभिन्न मोर्चों पर घेरने के लिए अपनी रणनीति तैयार कर ली है। विपक्ष के तरकश में नीट पेपर लीक और राम मंदिर में चढ़ावा चोरी जैसे गंभीर मुद्दे शामिल हैं, जिन्हें लेकर वे सदन में सरकार से जवाब मांगेंगे। दूसरी ओर, सरकार भी अपनी विधायी कार्यसूची के साथ तैयार है और परिसीमन विधेयक तथा महिला आरक्षण विधेयक जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों को फिर से लाने पर विचार कर रही है। यह सत्र विपक्षी इंडिया ब्लॉक की एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए भी एक महत्वपूर्ण मंच साबित होने वाला है।
विपक्ष के मुख्य मुद्दे और रणनीति
विपक्षी दलों ने एकजुट होकर सरकार पर हमला बोलने की योजना बनाई है। विपक्ष ने जिन मुद्दों को प्राथमिकता दी है, उनमें राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का आरोप, नीट पेपर लीक का मामला, और जंतर मंतर से सोनम वांगचुक को जबरन हटाए जाने की घटना प्रमुख हैं। इसके अलावा, विपक्ष भ्रष्टाचार के आरोपों और विपक्षी दलों को तोड़ने की कथित कोशिशों को लेकर भी सरकार को कटघरे में खड़ा करने की तैयारी कर रहा है। कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने स्पष्ट किया है कि वे अयोध्या में चंदा चोरी, नीट पेपर लीक और एथेनॉल जैसे विषयों पर सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग करेंगे। विपक्ष का मानना है कि ये मुद्दे सीधे तौर पर जनता से जुड़े हैं और सरकार को इन पर स्पष्टीकरण देना चाहिए।
सरकार की विधायी योजना और विपक्षी दलों का रुख
सरकार इस सत्र में परिसीमन बिल और महिला आरक्षण विधेयक को फिर से लाने पर विचार कर रही है। इसके लिए सरकार को डीएमके और एनसीपी (शरद पवार गुट) जैसे विपक्षी दलों से समर्थन की उम्मीद है और इन दोनों दलों के रुख में कुछ नरमी आने के संकेत भी मिले हैं। एनसीपी नेता सुप्रिया सुले ने पहले ही कहा है कि अगर सरकार सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत की वृद्धि करने की बात बिल में ही लिखकर लाती है, तो इस पर इंडिया ब्लॉक में चर्चा की जा सकती है। यह संकेत देता है कि महत्वपूर्ण विधेयकों पर आम सहमति बनाने की गुंजाइश बनी हुई है।
डीएमके का बदला हुआ रुख और परिसीमन पर चिंता
डीएमके ने महिला आरक्षण विधेयक पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि पार्टी वर्तमान लोकसभा की मौजूदा सदस्य संख्या के आधार पर इस विधेयक के पक्ष में है। हालांकि, पार्टी ने परिसीमन को लेकर अपनी चिंताएं भी जाहिर की हैं। डीएमके सांसद तिरुचि शिवा ने कहा कि ऐसा कुछ भी नहीं होना चाहिए जिससे दक्षिणी राज्यों के साथ अन्याय हो। उन्होंने सुझाव दिया कि अगर परिसीमन से दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व पर बुरा असर पड़ता है, तो इसे 25 वर्षों के लिए स्थगित कर दिया जाना चाहिए। शिवा ने यह भी कहा कि परिसीमन के मुद्दे पर उन्हें और अधिक स्पष्टता की आवश्यकता है। डीएमके का यह रुख सत्ता पक्ष के लिए उम्मीद जगाने वाला है, क्योंकि इससे पहले पार्टी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री और पार्टी प्रमुख स्टालिन के नेतृत्व में परिसीमन बिल की कॉपियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया था।
सर्वदलीय बैठक और सत्र का विवरण
मानसून सत्र की शुरुआत से पहले सरकार ने रविवार को एक सर्वदलीय बैठक बुलाई ताकि सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चल सके। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई यह बैठक करीब 3 घंटे तक चली, जिसमें 40 दलों के नेता शामिल हुए। बैठक की शुरुआत में राजनाथ सिंह ने सभी नेताओं का स्वागत किया। इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने जानकारी दी कि संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होगा और 13 अगस्त को समाप्त होगा। इस दौरान कुल 19 बैठकें आयोजित की जाएंगी। सरकार ने सत्र के लिए 8 विधेयकों की एक सूची साझा की है। हालांकि इस सूची में परिसीमन और महिला आरक्षण बिल शामिल नहीं थे, लेकिन किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार इनके अतिरिक्त कोई अन्य बिल लाती है, तो उस पर कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) में विपक्ष के साथ चर्चा की जाएगी और नियमों के तहत ही उसे पेश किया जाएगा। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि सदन में चर्चा होनी चाहिए, हंगामा नहीं।
कांग्रेस की मांगें और सरकार की जिम्मेदारी
कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने बैठक के दौरान देश के वर्तमान ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा और सरकार से जवाब की मांग की। उन्होंने कहा कि अयोध्या में चंदा चोरी का मामला बेहद शर्मनाक है और सरकार को इस पर संवेदनशीलता दिखानी चाहिए और गोगोई ने नीट पेपर लीक के मुद्दे पर छात्रों के साथ हो रहे अन्याय का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार की तरफ से इस पर कोई नैतिक जिम्मेदारी नहीं ली जा रही है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि विपक्ष सदन में एथेनॉल, किसानों की समस्याएं, मणिपुर की स्थिति और सदन की गरिमा से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगा। गोगोई ने सरकार को सलाह दी कि परिसीमन विधेयक पर आगे बढ़ने से पहले सभी राजनीतिक दलों और सभी राज्यों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया जाना चाहिए।