PCOS का बदला नाम: अब PMOS कहलाएगी महिलाओं की यह गंभीर बीमारी, जानें वजह

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PCOS का बदला नाम: अब PMOS कहलाएगी महिलाओं की यह गंभीर बीमारी, जानें वजह
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महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां लंबे समय से प्रचलित बीमारी पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) के नाम में आधिकारिक बदलाव कर दिया गया है। अब इस बीमारी को दुनिया भर में पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवरी सिंड्रोम (PMOS) के नाम से जाना जाएगा और महिलाओं में यह बीमारी काफी आम हो गई है और इसके मामलों में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए चिकित्सा जगत ने इसकी पहचान को अधिक सटीक बनाने के लिए यह कदम उठाया है। इस नाम परिवर्तन की आधिकारिक घोषणा यूरोपियन कांग्रेस ऑफ एंडोक्रिनोलॉजी के दौरान की गई है, जो चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।

वैश्विक सहमति और व्यापक सर्वेक्षण

इस बीमारी का नाम बदलने की प्रक्रिया कोई अचानक लिया गया निर्णय नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक लंबी और गहन शोध प्रक्रिया शामिल रही है। इस बदलाव के लिए दुनिया भर के मरीजों, डॉक्टरों और विभिन्न मेडिकल संगठनों की विस्तृत राय ली गई थी। आंकड़ों के अनुसार, लगभग 14 हजार लोगों का एक व्यापक सर्वे किया गया, जिसमें मरीजों और विशेषज्ञों दोनों को शामिल किया गया था। इसके अलावा, कई अंतरराष्ट्रीय वर्कशॉप्स का आयोजन किया गया और दुनिया भर की 56 प्रमुख मेडिकल संस्थाओं से सलाह ली गई। इन सभी स्तरों पर गहन विचार-विमर्श के बाद ही 'पीएमओएस' (PMOS) नाम पर अंतिम सहमति बनी है। इस महत्वपूर्ण बदलाव और इसके पीछे के वैज्ञानिक आधार पर प्रसिद्ध मेडिकल जर्नल 'द लैंसेट' में भी एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की गई है।

नाम बदलने के पीछे का मुख्य कारण

विशेषज्ञों का मानना है कि पुराना नाम 'पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम' अक्सर मरीजों और यहां तक कि कुछ चिकित्सा संदर्भों में भी भ्रम पैदा करता था। 'पॉलीसिस्टिक' शब्द सुनकर मरीजों को यह आभास होता था कि इस बीमारी में ओवरी (अंडाशय) में सिस्ट या गांठों का होना अनिवार्य है। हालांकि, वास्तविकता इससे अलग है क्योंकि हर मरीज में सिस्ट नहीं पाए जाते हैं। सफदरजंग अस्पताल के महिला रोग विभाग की डॉ. सलोनी ने इस विषय पर विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि इस बीमारी में महिलाओं के शरीर में हार्मोनल और मेटाबॉलिक गड़बड़ियां अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। पुराने नाम के कारण यह धारणा बन गई थी कि ओवरी में सिस्ट होंगे ही, जबकि कई मामलों में ऐसा नहीं होता। नए नाम 'पीएमओएस' में 'मेटाबॉलिक' शब्द को इसलिए जोड़ा गया है क्योंकि इस बीमारी में महिलाओं के शरीर में मेटाबॉलिक असंतुलन होना एक बहुत बड़ी और बुनियादी समस्या है।

कम उम्र की महिलाओं में बढ़ता खतरा

डॉ और सलोनी के अनुसार, वर्तमान समय में यह बीमारी न केवल बढ़ रही है, बल्कि अब बहुत कम उम्र की महिलाएं और युवतियां भी इसका शिकार हो रही हैं। अस्पताल के ओपीडी में अब 18 से 25 साल की उम्र की युवतियों के मामले भी बड़ी संख्या में सामने आ रहे हैं। इस बीमारी के प्रसार का एक मुख्य कारण खराब खानपान और पूरी तरह से बिगड़ा हुआ लाइफस्टाइल है। आधुनिक जीवनशैली में शारीरिक सक्रियता की कमी और अस्वास्थ्यकर भोजन की आदतों ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है। कई मामलों में यह देखा गया है कि शरीर में होने वाली हार्मोनल गड़बड़ी भी इस बीमारी को जन्म देने का एक प्रमुख कारक बनती है।

पीएमओएस के प्रमुख लक्षण और प्रभाव

पीएमओएस न केवल महिलाओं के शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि यह बांझपन (Infertility) का भी एक बड़ा कारण बनकर उभरा है।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि नाम में इस बदलाव से बीमारी की सही पहचान करने और उसके लिए बेहतर उपचार योजना तैयार करने में काफी मदद मिलेगी। खानपान की गलत आदतें, मोटापा और हार्मोनल बैलेंस का बिगड़ना इस बीमारी के मूल कारण हैं, जिन पर ध्यान देना अब और भी आवश्यक हो गया है।

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