प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच मंगलवार को टेलीफोन पर विस्तृत बातचीत हुई। लगभग 40 मिनट तक चली इस कॉल के दौरान दोनों नेताओं ने मध्य पूर्व में जारी तनाव, विशेष रूप से ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते संघर्ष पर चर्चा की। यह बातचीत उस समय हुई है जब ईरान की नौसेना द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में की गई नाकाबंदी के बाद वैश्विक स्तर पर चिंताएं बढ़ गई हैं।
मिडिल ईस्ट में शांति बहाली पर चर्चा
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य मध्य पूर्व में शांति स्थापित करना था। वाशिंगटन और तेहरान के बीच संघर्ष-विराम समझौते के प्रयासों के बाद यह दोनों नेताओं के बीच पहली औपचारिक बातचीत है और दोनों नेताओं ने क्षेत्र में स्थिरता लाने और तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक रास्तों पर विचार-विमर्श किया।
अमेरिकी राजदूत सर्गियो गोर का आधिकारिक बयान
भारत में अमेरिका के राजदूत सर्गियो गोर ने इस उच्च-स्तरीय बातचीत की पुष्टि की है। गोर के अनुसार, चर्चा के दौरान ईरान युद्ध के साथ-साथ दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों पर भी विस्तार से बात हुई। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप लगातार प्रधानमंत्री मोदी को क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर अपडेट देते रहते हैं। राजदूत ने संकेत दिया कि भारत और अमेरिका के बीच आने वाले समय में कई महत्वपूर्ण रणनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं।
द्विपक्षीय संबंधों और व्यक्तिगत संवाद के पहलू
बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और अमेरिका के बीच मजबूत होते संबंधों का उल्लेख किया और उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप से कहा कि भारत के लोग उनके प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं। राजदूत गोर ने इस संवाद को बेहद सकारात्मक बताया और कहा कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी एक नए स्तर पर पहुंच रही है।
युद्ध शुरू होने के बाद दूसरी बड़ी बातचीत
यह इस साल दोनों नेताओं के बीच हुई तीसरी बातचीत है। गौरतलब है कि 28 फरवरी को ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य संघर्ष शुरू होने के बाद से यह दूसरी बार है जब दोनों नेताओं ने फोन पर संपर्क किया है। होर्मुज में ईरान की नाकाबंदी ने वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार के लिए गंभीर चुनौतियां पैदा कर दी हैं, जिस पर भारत अपनी पैनी नजर बनाए हुए है।
क्षेत्रीय सुरक्षा और व्यापारिक हितों पर प्रभाव
होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव का सीधा असर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ता है और भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस मार्ग पर काफी हद तक निर्भर है। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की इस बातचीत को वैश्विक कूटनीति के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि भारत इस संकट में एक मध्यस्थ या शांति दूत की भूमिका में देखा जा रहा है।