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Karpoori Thakur: पीएम मोदी ने भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर को किया नमन, कांग्रेस ने पूछे तीखे सवाल

Karpoori Thakur: पीएम मोदी ने भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर को किया नमन, कांग्रेस ने पूछे तीखे सवाल
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को बिहार में अपने चुनाव अभियान की शुरुआत करते हुए समस्तीपुर के कर्पूरी गांव में भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने कहा कि जनता का जोश बताता है कि इस बार चुनाव में बीजेपी-एनडीए की प्रचंड जीत होगी। पीएम मोदी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "आज समस्तीपुर में भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर को श्रद्धांजलि अर्पित करने का सौभाग्य प्राप्त होगा। फिर दोपहर करीब 12:15 बजे वहां के अपने परिवारजनों से संवाद का सुअवसर मिलेगा।

इसके बाद लगभग 2 बजे बेगूसराय की जनसभा में अपने भाई-बहनों का आशीर्वाद प्राप्त करूंगा। " बिहार की जनता-जनार्दन का जोश और उत्साह बताता है कि इस बार के विधानसभा चुनावों में भी बीजेपी-एनडीए को प्रचंड जीत मिलने जा रही है। पीएम मोदी के इस दौरे को लेकर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने उनपर निशाना साधा और तीन तीखे सवाल पूछे और उन्होंने भाजपा के वैचारिक पूर्वजों द्वारा 1978 में कर्पूरी ठाकुर की आरक्षण नीति का विरोध करने और उनके खिलाफ अपमानजनक नारे लगाने का आरोप लगाया। रमेश ने पूछा कि क्या पीएम मोदी इस ऐतिहासिक गलती? के लिए जनसंघ और आरएसएस की ओर से माफी मांगेंगे?

आरक्षण नीति और जनसंघ का विरोध

जयराम रमेश ने अपने पहले सवाल में कहा कि कर्पूरी ठाकुर ने 1978 में पिछड़ों को 26 प्रतिशत आरक्षण देकर सामाजिक न्याय की ऐतिहासिक नींव रखी थी। उन्होंने सवाल किया कि क्या यह सही नहीं है कि जनसंघ और आरएसएस ने उनकी आरक्षण नीति का खुलकर विरोध किया था, सड़कों पर अपमानजनक नारे लगाए थे और कर्पूरी ठाकुर सरकार को अस्थिर करने में अहम भूमिका निभाई थी?

जाति जनगणना पर सरकार का रुख

अपने दूसरे सवाल में कांग्रेस नेता ने पूछा कि क्या पीएम मोदी ने कांग्रेस की जाति जनगणना की मांग को 'अर्बन नक्सल एजेंडा' कहकर दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों के अधिकारों का अपमान नहीं किया? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने संसद और सर्वोच्च न्यायालय में जाति जनगणना करने से इनकार किया और बहुसंख्यक वंचित वर्गों की इस वैध मांग को जानबूझकर नजरअंदाज किया है।

बिहार आरक्षण और 9वीं अनुसूची

तीसरे सवाल में जयराम रमेश ने पूछा कि बिहार के जातिगत सर्वे के बाद पिछड़ों, अति पिछड़ों, दलितों और आदिवासियों के आरक्षण को 65% करने के विधानसभा प्रस्ताव को केंद्र सरकार ने 9वीं अनुसूची में क्यों नहीं डाला? उन्होंने तमिलनाडु के 69% आरक्षण को 1994 में 9वीं अनुसूची में शामिल कर सुरक्षा देने का हवाला देते हुए बिहार के मामले में समान सुरक्षा न देने पर सवाल उठाया।

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