India-Israel Relations: वेनेजुएला संकट के बीच पीएम मोदी और नेतन्याहू की बातचीत, आतंकवाद पर दोहराई प्रतिबद्धता

India-Israel Relations - वेनेजुएला संकट के बीच पीएम मोदी और नेतन्याहू की बातचीत, आतंकवाद पर दोहराई प्रतिबद्धता
| Updated on: 07-Jan-2026 05:40 PM IST
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से टेलीफोन पर बातचीत की, जो ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिका द्वारा वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई कर वहां के राष्ट्रपति और उनकी पत्नी को बंधक बनाने की खबर ने दुनिया भर में भूचाल ला दिया है। इस संवेदनशील वैश्विक माहौल के बीच, दोनों नेताओं के बीच यह उच्च-स्तरीय संवाद कई। मायनों में महत्वपूर्ण है, जो द्विपक्षीय संबंधों और साझा वैश्विक चुनौतियों पर केंद्रित रहा।

नए साल की शुभकामनाएं और द्विपक्षीय संबंध

फोन कॉल की शुरुआत दोनों नेताओं द्वारा एक-दूसरे को और अपने-अपने देशों के लोगों को नए साल की हार्दिक शुभकामनाएं देने के साथ हुई। यह एक पारंपरिक राजनयिक शिष्टाचार है जो दोनों देशों के बीच गहरे सम्मान और मैत्रीपूर्ण संबंधों को दर्शाता है और इस अवसर पर, उन्होंने अपने-अपने लोगों के लिए शांति और समृद्धि की कामना की, जो वैश्विक स्थिरता और कल्याण के प्रति उनकी साझा प्रतिबद्धता को उजागर करता है। नए साल की शुरुआत में इस तरह का संवाद न केवल व्यक्तिगत संबंधों को मजबूत। करता है, बल्कि आने वाले वर्ष के लिए द्विपक्षीय एजेंडे को भी निर्धारित करता है। यह दर्शाता है कि दोनों नेता अपने देशों के भविष्य के लिए सकारात्मक और रचनात्मक दृष्टिकोण रखते हैं।

रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर जोर

बातचीत के दौरान, प्रधानमंत्री नेतन्याहू और प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-इजरायल रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, आपसी गहरे विश्वास और एक दूरदर्शी दृष्टिकोण के महत्व को रेखांकित किया। ये तत्व दोनों देशों के बीच संबंधों की नींव हैं, जो। उन्हें विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग करने के लिए प्रेरित करते हैं। रणनीतिक साझेदारी का अर्थ केवल रक्षा या व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें प्रौद्योगिकी, कृषि, जल प्रबंधन और नवाचार जैसे कई अन्य क्षेत्र भी शामिल हैं। दोनों नेताओं का मानना है कि इन साझा मूल्यों और विश्वास के आधार पर, वे आने वाले वर्ष में अपनी साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकते हैं, जिससे दोनों देशों को पारस्परिक लाभ होगा और क्षेत्रीय तथा वैश्विक स्थिरता में योगदान मिलेगा।

आतंकवाद के प्रति शून्य-सहिष्णुता की नीति

दोनों नेताओं ने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों के प्रति अपनी शून्य-सहिष्णुता की नीति के दृष्टिकोण को दृढ़ता से दोहराया। यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर भारत और इजरायल दोनों ही लंबे समय से एक समान रुख रखते आए हैं, क्योंकि दोनों देशों ने आतंकवाद के गंभीर परिणामों का सामना किया है। उन्होंने इस खतरे से लड़ने की अपनी साझा प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया। आतंकवाद एक वैश्विक चुनौती है जो किसी सीमा या विचारधारा को नहीं पहचानता, और इससे निपटने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग अत्यंत आवश्यक है। इस बातचीत में, दोनों प्रधानमंत्रियों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि आतंकवाद के खिलाफ एकजुट। और दृढ़ कार्रवाई समय की मांग है, और वे इस दिशा में मिलकर काम करना जारी रखेंगे। यह प्रतिबद्धता न केवल उनके द्विपक्षीय संबंधों के लिए महत्वपूर्ण है,। बल्कि वैश्विक आतंकवाद विरोधी प्रयासों के लिए भी एक मजबूत संदेश है।

क्षेत्रीय स्थिति पर विचारों का आदान-प्रदान

प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने क्षेत्रीय स्थिति पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका ने वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई कर वहां के राष्ट्रपति और उनकी पत्नी को बंधक बना लिया है, जिससे वैश्विक राजनीति में एक बड़ा भूचाल आ गया है। इस तरह के अप्रत्याशित और गंभीर अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों का क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में, दो महत्वपूर्ण देशों के नेताओं के लिए क्षेत्रीय सुरक्षा, स्थिरता और उभरती हुई भू-राजनीतिक चुनौतियों पर चर्चा करना स्वाभाविक था। हालांकि वेनेजुएला का मुद्दा सीधे तौर पर उनके द्विपक्षीय एजेंडे में नहीं था, लेकिन वैश्विक स्तर पर उत्पन्न हुई यह स्थिति निश्चित रूप से उनकी क्षेत्रीय स्थिति पर चर्चा के लिए एक महत्वपूर्ण पृष्ठभूमि प्रदान करती है। नेताओं ने संभवतः उन तरीकों पर विचार किया होगा जिनसे ऐसी घटनाओं का उनके संबंधित क्षेत्रों पर। प्रभाव पड़ सकता है और कैसे वे साझा हितों की रक्षा के लिए समन्वय कर सकते हैं।

पीएम मोदी का सोशल मीडिया पर बयान

प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस बातचीत के बारे में जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा, 'अपने दोस्त, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बात करके खुशी हुई और उन्हें और इज़राइल के लोगों को नए साल की शुभकामनाएं दीं। हमने आने वाले साल में भारत-इज़राइल रणनीतिक साझेदारी को और मज़बूत करने के तरीकों पर चर्चा की। हमने क्षेत्रीय स्थिति पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया और आतंकवाद। से ज़्यादा मज़बूती से लड़ने के अपने साझा संकल्प को दोहराया। ' यह सार्वजनिक बयान बातचीत के प्रमुख बिंदुओं की पुष्टि करता है और दोनों देशों के बीच खुले और पारदर्शी राजनयिक संबंधों को दर्शाता है और यह दर्शाता है कि दोनों नेता अपने संबंधों को कितनी गंभीरता से लेते हैं और वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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