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पीएम मोदी ने 38 देशों के साथ एफटीए और वैश्विक भरोसे पर दी जानकारी

पीएम मोदी ने 38 देशों के साथ एफटीए और वैश्विक भरोसे पर दी जानकारी
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि राजनीतिक स्थिरता और भरोसेमंद नीतियों के कारण भारत पर दुनिया का विश्वास बढ़ा है। समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए एक विस्तृत साक्षात्कार में प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि भारत अब तक 38 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) कर चुका है। उन्होंने पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के कार्यकाल को आर्थिक कुप्रबंधन का दौर बताते हुए वर्तमान सुधारों को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री के अनुसार, वैश्विक निवेशक अब भारत की नीतियों पर अधिक भरोसा कर रहे हैं क्योंकि देश में एक स्थिर सरकार और स्पष्ट विजन मौजूद है।

बजट और विकसित भारत का संकल्प

प्रधानमंत्री मोदी ने केंद्रीय बजट पर चर्चा करते हुए कहा कि यह केवल एक वित्तीय दस्तावेज नहीं है, बल्कि विकसित भारत की सोच को दर्शाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस साल का बजट किसी मजबूरी में लिया गया फैसला नहीं है, बल्कि यह देश की तैयारी और उत्साह का प्रतीक है और प्रधानमंत्री के अनुसार, बजट में भारत के विकसित राष्ट्र बनने का संकल्प निहित है और यह दर्शाता है कि भारत विकास के अगले चरण के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि देश की स्थिर सरकार और उसकी स्पष्ट नीतियों की वजह से दुनिया भर के निवेशकों का भारत पर भरोसा बढ़ा है, क्योंकि उन्हें पता है कि नीतियां अचानक नहीं बदलेंगी।

38 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते और एमएसएमई

प्रधानमंत्री ने व्यापारिक संबंधों पर बात करते हुए बताया कि भारत ने अब तक 38 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) किए हैं। उन्होंने कहा कि भारत की असली ताकत उसके मजबूत विनिर्माण, सेवा क्षेत्र और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSME) में निहित है और यही ताकत भारत को दूसरे देशों के साथ बराबरी के स्तर पर मोलभाव करने की क्षमता प्रदान करती है। प्रधानमंत्री के अनुसार, इन समझौतों का मुख्य उद्देश्य कपड़ा, चमड़ा, रसायन, हस्तशिल्प और रत्न जैसे क्षेत्रों के छोटे व्यापारियों के लिए विदेशी बाजारों के द्वार खोलना है और इससे स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार में आसानी से पहुंच प्राप्त होगी।

यूपीए के आर्थिक कुप्रबंधन पर प्रधानमंत्री का प्रहार

साक्षात्कार के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यूपीए के दौर में आर्थिक कुप्रबंधन व्याप्त था, जिसके कारण भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मजबूती से अपनी बात नहीं रख पाता था। प्रधानमंत्री के अनुसार, उस समय व्यापारिक बातचीत शुरू तो होती थी लेकिन अक्सर बिना किसी ठोस नतीजे के टूट जाती थी और उन्होंने वर्तमान सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि अब आर्थिक सुधार सिर्फ बातों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि धरातल पर काम में भी दिख रहे हैं। उन्होंने निजी क्षेत्र से भी अपील की कि वे आगे आएं और देश के विकास में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें।

बुनियादी ढांचे पर निवेश और रिफॉर्म एक्सप्रेस

प्रधानमंत्री ने बुनियादी ढांचे के विकास को देश की प्रगति का आधार बताया। 2 lakh crore खर्च करने का लक्ष्य रखा है, जो 2013 की तुलना में लगभग 5 गुना अधिक है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार मुफ्त की रेवड़ियां बांटने के बजाय ऐसे क्षेत्रों में निवेश कर रही है जिससे देश की आर्थिक ताकत बढ़े और नए रोजगार के अवसर पैदा हों। उन्होंने भारत की वर्तमान प्रगति को 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' की संज्ञा दी, जिसका ध्यान पुराने नियमों को बदलकर सुधार करने, नई तकनीक को बढ़ावा देने और सरकारी कामकाज को सरल बनाने पर केंद्रित है।

डिजिटल लेनदेन में नेतृत्व और एआई का भविष्य

तकनीकी प्रगति पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यूपीआई (UPI) की सफलता ने भारत को दुनिया में डिजिटल लेनदेन का लीडर बना दिया है। इसने आम आदमी के वित्तीय व्यवहार को पूरी तरह बदल दिया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के भविष्य पर उन्होंने कहा कि भारत तेजी से डेटा सेंटर और सुपर-कंप्यूटिंग क्षमता बढ़ा रहा है। प्रधानमंत्री ने वैश्विक समुदाय को भारत में डेटा शिफ्ट करने के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि डेटा सेंटर युवाओं के लिए रोजगार के बड़े अवसर पैदा करेंगे। उन्होंने यह भी विश्वास जताया कि विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी और सरकार की हर नीति के केंद्र में महिलाओं की प्रगति शामिल है।

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