लाल किले से पीएम मोदी का आह्वान: 2047 तक विकसित भारत का संकल्प

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लाल किले से पीएम मोदी का आह्वान: 2047 तक विकसित भारत का संकल्प
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए एक नए और विकसित भारत का विजन प्रस्तुत किया। समारोह की शुरुआत में प्रधानमंत्री ने राजघाट स्थित महात्मा गांधी के समाधि स्थल पर जाकर राष्ट्रपिता को पुष्पांजलि अर्पित की। बापू को नमन करने के बाद वह सीधे लाल किले पहुंचे, जहां उन्होंने तिरंगा फहराया और देशवासियों को संबोधित किया। दिल्ली में इस ऐतिहासिक अवसर पर सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे और पूरे देश में देशभक्ति का माहौल देखा गया। प्रधानमंत्री का यह संबोधन देश की भविष्य की दिशा और दशा को तय करने वाला माना जा रहा है।

स्वतंत्रता सेनानियों को नमन और देशवासियों को बधाई

देश आज अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मना रहा है। इस गौरवशाली मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समस्त देशवासियों को बधाई दी। पीएम मोदी के साथ-साथ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सहित देश के कई अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी जनता को शुभकामनाएं प्रेषित कीं। प्रधानमंत्री ने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर लिखा कि स्वतंत्रता दिवस के इस अवसर पर वह उन अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों को कृतज्ञता के साथ याद करते हैं, जिनके साहस, त्याग और अटूट संकल्प ने औपनिवेशिक शासन के अंत को सुनिश्चित किया। उन्होंने कहा कि उन महान सेनानियों के सपने हमें 'विकसित भारत' के निर्माण की दिशा में मिलकर काम करने के लिए निरंतर प्रेरित करते हैं। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि 140 करोड़ भारतीयों की सामूहिक शक्ति से देश विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति की नई ऊंचाइयों को छू रहा है और आने वाले समय में यह यात्रा और भी तेज गति से आगे बढ़ेगी।

बड़े सपनों और बड़े संकल्पों की आवश्यकता

लाल किले की प्राचीर से हुंकार भरते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अब मेरे देशवासियों, छोटे सपनों से काम नहीं चलेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमें बड़े सपने देखने होंगे, क्योंकि बड़े सपने ही हमारी सोच का दायरा बढ़ाते हैं और हमारे विचारों के क्षितिज को विस्तृत करते हैं। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि कोई भी राष्ट्र तब महान बनता है जब वह अपनी सिद्धियों को प्राप्त करता है और अपने संकल्पों तथा सामर्थ्य के दम पर आगे बढ़ता है। उन्होंने कहा कि हमारे सपने और संकल्प जितने बड़े होंगे, हमारी क्षमताएं भी उतनी ही नई ऊंचाइयों तक पहुंचेंगी और प्रधानमंत्री ने देशवासियों को प्रेरित करते हुए कहा कि 140 करोड़ भारतीयों का संकल्प अब एक ऐसी ताकत बन चुका है जिसे कोई भी शक्ति रोक नहीं सकती।

पिछले 12 वर्षों की अभूतपूर्व उपलब्धियां

अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने पिछले 12 वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति के ठोस आंकड़े पेश किए। उन्होंने बताया कि इस अवधि में देश का डिफेंस प्रोडक्शन यानी रक्षा उत्पादन 4 गुना बढ़ गया है, जो भारत की आत्मनिर्भरता को दर्शाता है। इसी तरह इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग में 7 गुना की वृद्धि दर्ज की गई है। रेलवे के क्षेत्र में आधुनिक रेलवे कोच का प्रोडक्शन 21 गुना तक बढ़ गया है। डिजिटल इंडिया के प्रभाव का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि इंटरनेट यूजर्स की संख्या में 4 गुना की बढ़ोतरी हुई है, जबकि डिजिटल ट्रांजैक्शन यानी डिजिटल लेनदेन में 100 गुना का भारी उछाल आया है। ये आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि भारत तकनीकी और बुनियादी ढांचे के मामले में कितनी तेजी से बदल रहा है।

अर्थव्यवस्था में ऐतिहासिक सुधार और वैश्विक नजरिया

प्रधानमंत्री ने भारत की आर्थिक यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि एक समय था जब हमें दुनिया की 'फ्रेजाइल फाइव' यानी पांच सबसे कमजोर अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता था। लेकिन पिछले 12 वर्षों के कड़े परिश्रम और सही नीतियों के कारण आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बनकर उभरा है। उन्होंने स्वीकार किया कि आजादी के बाद भारत के सपने तो बड़े थे, लेकिन तरक्की की वह रफ्तार नहीं मिल पाई जिसकी उम्मीद की गई थी। हालांकि, आज का भारत अभूतपूर्व तेजी और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश विकसित बनने का लक्ष्य तय करता है, तो इससे पूरी दुनिया को एक मजबूत संदेश जाता है और भारत को देखने का वैश्विक नजरिया पूरी तरह बदल जाता है।

2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा कि यह 140 करोड़ भारतीयों का साझा सपना है और इसे पूरा करने के लिए पूरा देश एकजुट है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि 2047 तक भारत को विकसित बनाकर ही दम लेंगे। प्रधानमंत्री के अनुसार, यह लक्ष्य केवल एक आर्थिक लक्ष्य नहीं है, बल्कि यह भारत के गौरव और सामर्थ्य की पुनर्स्थापना का मार्ग है और उन्होंने कहा कि आज हर दिल 'वंदे मातरम' की धुन पर धड़क रहा है और 'हर घर तिरंगा' अभियान के तहत हर मन में तिरंगा बसा है, जो इस संकल्प को पूरा करने की प्रेरणा दे रहा है।

बाढ़ पीड़ितों के प्रति संवेदना और एकजुटता

स्वतंत्रता दिवस के उल्लास के बीच प्रधानमंत्री ने देश के उन हिस्सों का भी जिक्र किया जो प्राकृतिक आपदा का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में देश के कुछ हिस्सों में बाढ़ आई है, जिससे कई परिवार प्रभावित हुए हैं। प्रधानमंत्री ने प्रभावित परिवारों को भरोसा दिलाया कि इस संकट की घड़ी में पूरा देश उनके साथ खड़ा है। उन्होंने बापू और सभी स्वतंत्रता सेनानियों तथा क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए अपने संबोधन का समापन किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज हर घर तिरंगा है और हर मन तिरंगा है, जो भारत की एकता और अखंडता का प्रतीक है।

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