रूस और यूक्रेन के बीच पिछले दो वर्षों से अधिक समय से जारी भीषण युद्ध को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ी कूटनीतिक प्रगति देखने को मिल रही है। कीव और मॉस्को दोनों ही तरफ से आए बयानों ने इस बात की पुष्टि की है कि भारत अब इस युद्ध में एक सक्रिय मध्यस्थ की भूमिका निभाने के लिए तैयार है। यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने भारत द्वारा पेश किए गए शांति प्रस्ताव की सराहना करते हुए इसे अब तक का सबसे व्यापक प्रस्ताव करार दिया है। यह पहली बार है जब यूक्रेन ने सार्वजनिक रूप से भारत की मध्यस्थता की इच्छा की पुष्टि की है, जो वैश्विक शांति के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है।
भारत के प्रस्ताव को यूक्रेन ने बताया सबसे व्यापक
आरबीसी-यूक्रेन की एक रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान वैश्विक शांति प्रयासों की समीक्षा की। उन्होंने बताया कि वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 4 प्रमुख प्रस्ताव विचाराधीन हैं। सिबिहा ने स्पष्ट रूप से कहा कि इन चारों में भारत का प्रस्ताव सबसे व्यापक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत ने पहली बार इस जटिल प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाने की अपनी इच्छा जाहिर की है और सिबिहा के अनुसार, यूक्रेन अपने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के सामने पहले ही शांति प्रक्रिया को लेकर अपना नजरिया रख चुका है और वह अलग-अलग युद्धविराम प्रस्तावों पर काम करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
तुर्की, मिस्र और अमेरिका के प्रस्तावों का विवरण
शांति प्रयासों की इस कड़ी में केवल भारत ही नहीं, बल्कि अन्य देश भी सक्रिय हैं। विदेश मंत्री सिबिहा ने बताया कि भारत के अलावा तुर्की और मिस्र की ओर से भी एक संयुक्त प्रस्ताव सामने आया है। इन दोनों देशों ने विशेष रूप से काला सागर क्षेत्र में अनाज और कृषि से जुड़े कार्यों को सुरक्षित रखने के लिए युद्धविराम का सुझाव दिया है। इसके अतिरिक्त, एक प्रस्ताव संयुक्त राज्य अमेरिका की ओर से भी आया है, जिसमें ऊर्जा क्षेत्र में युद्धविराम की बात कही गई है। ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ा यह मुद्दा यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई हालिया बातचीत में भी प्रमुखता से उठा था और यूक्रेन ने स्पष्ट किया है कि वह ऊर्जा और काला सागर में कृषि से जुड़े युद्धविराम के साथ-साथ बिना किसी शर्त के पूर्ण संघर्ष विराम के लिए तैयार है।
पुतिन ने की प्रधानमंत्री मोदी की पहल की सराहना
भारत की इस बढ़ती भूमिका पर रूस की ओर से भी सकारात्मक प्रतिक्रिया आई है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हाल ही में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास यूक्रेन संघर्ष के आपसी समाधान को लेकर बहुत अच्छे विचार हैं। पुतिन ने वार्षिक वाल्दाई इंटरनेशनल डिस्कशन क्लब की बैठक में यह महत्वपूर्ण बात कही। सरकारी समाचार एजेंसी तास के अनुसार, पुतिन ने मोदी को उन विश्व नेताओं में गिना जो रूस के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध होने के बावजूद लगातार युद्ध खत्म करने की आवश्यकता पर बल देते हैं। पुतिन ने कहा कि मोदी उनके साथ होने वाली हर मुलाकात में इस मुद्दे को उठाते हैं और इसमें गहरी रुचि लेते हैं। उनके अनुसार, मोदी के विचार दोनों पक्षों के लिए स्वीकार्य समाधान तलाशने में सहायक हो सकते हैं।
भारत की विविधता और एकता पर पुतिन के विचार
वाल्दाई फोरम के दौरान पुतिन ने न केवल युद्ध पर चर्चा की, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि भारत अपने विशाल आकार और विविधता के कारण एक हैरान करने वाला देश है। पुतिन ने पीएम मोदी के साथ हुई बातचीत का हवाला देते हुए बताया कि भारत की लगभग 1 अरब 50 करोड़ की आबादी में से करीब 60 करोड़ लोग हिंदी बोलते हैं, जबकि अन्य बड़ी संख्या में लोग अपनी स्थानीय भाषाओं का उपयोग करते हैं। इसके बावजूद, भारत की विशेषता यह है कि सभी लोग एक साथ मिलकर रहते हैं और पुतिन ने इसे भारतीय संस्कृति की एक बड़ी खूबी बताया कि कैसे वहां विविधता और एकता साथ-साथ चलती हैं।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और भविष्य की संभावनाएं
यह कूटनीतिक हलचल पिछले महीने नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच हुई बातचीत के बाद तेज हुई है। उस बैठक के दौरान पुतिन ने मोदी को युद्ध की वर्तमान स्थिति और शांति प्रयासों की जानकारी दी थी। फरवरी 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद से ही भारत ने हमेशा बातचीत और कूटनीति के माध्यम से समाधान निकालने पर जोर दिया है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने भी कहा था कि रूस यूक्रेन संघर्ष खत्म करने के लिए भारत की किसी भी शांति पहल का स्वागत करेगा। यूक्रेन के विदेश मंत्री का ताजा बयान इस दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।