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: PM मोदी की UAE यात्रा: MBZ ने होर्मुज का निकाला तोड़, मेगा पाइपलाइन का ऐलान

- PM मोदी की UAE यात्रा: MBZ ने होर्मुज का निकाला तोड़, मेगा पाइपलाइन का ऐलान
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) पहुंचते ही अबू धाबी ने एक बड़ी रणनीतिक ऊर्जा योजना का खुलासा किया है। संयुक्त अरब अमीरात ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का स्थायी तोड़ निकाल लिया है, जिसके तहत एक नई मेगा पाइपलाइन के निर्माण कार्य को युद्धस्तर पर शुरू करने का निर्णय लिया गया है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि भविष्य में होर्मुज का रास्ता पूरी तरह बंद भी हो जाता है, तो भी दुनिया भर में गैस और तेल की आपूर्ति में कोई बाधा न आए। अबू धाबी मीडिया कार्यालय ने आधिकारिक तौर पर जानकारी दी है कि संयुक्त अरब अमीरात फुजेराह से होकर गुजरने वाली अपनी इस नई तेल पाइपलाइन के निर्माण में अभूतपूर्व तेजी लाएगा। यह महत्वपूर्ण घोषणा भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यूएई की धरती पर कदम रखने के तुरंत बाद की गई है, जो इस क्षेत्र में भारत और यूएई के बीच बढ़ते रणनीतिक तालमेल को भी दर्शाती है।

अबू धाबी राष्ट्रीय तेल कंपनी (ADNOC) की उच्च स्तरीय बैठक

अलजजीरा की एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को क्राउन प्रिंस खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने अबू धाबी राष्ट्रीय तेल कंपनी (ADNOC) की कार्यकारी समिति की एक विशेष बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक का एकमात्र एजेंडा पाइपलाइन निर्माण की प्रक्रिया को गति देना और इसके तकनीकी पहलुओं पर चर्चा करना था। यह पाइपलाइन रणनीतिक रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बाईपास (Bypass) करते हुए अबू धाबी से सीधे ओमान की खाड़ी तक तेल पहुंचाने का काम करेगी। इस कदम से यूएई को ईरान के प्रभाव वाले समुद्री रास्तों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और वह किसी भी वैश्विक तनाव की स्थिति में सुरक्षित रूप से अपने ऊर्जा संसाधनों का निर्यात जारी रख सकेगा।

2027 तक लक्ष्य और निर्यात क्षमता का विस्तार

यूएई प्रशासन ने इस पाइपलाइन परियोजना को हर हाल में साल 2027 तक चालू करने का कड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है। यदि यह पाइपलाइन निर्धारित समय सीमा के भीतर चालू हो जाती है, तो फुजेराह के रास्ते संयुक्त अरब अमीरात की तेल निर्यात क्षमता वर्तमान की तुलना में दोगुनी हो जाएगी और यह विस्तार न केवल यूएई की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा मांग को पूरा करने के लिए भी एक अनिवार्य कदम माना जा रहा है। इसके साथ ही, यूएई ने 2027 तक प्रतिदिन 5 मिलियन बैरल कच्चा तेल उत्पादन करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। अपनी उत्पादन और आपूर्ति नीतियों में पूर्ण स्वायत्तता प्राप्त करने के उद्देश्य से यूएई ने खुद को ओपेक (OPEC) और ओपेक प्लस (OPEC+) समूहों से भी बाहर कर लिया है।

वैकल्पिक सड़क मार्ग और वर्तमान व्यापारिक चुनौतियां

पाइपलाइन के पूर्ण रूप से तैयार होने से पहले, यूएई अपनी व्यापारिक गतिविधियों को सुचारू रखने के लिए सड़क मार्ग का सहारा ले रहा है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया है कि ओमान और सऊदी अरब की सक्रिय मदद से यूएई अपना सामान सड़क मार्ग के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक भेज रहा है। इस जटिल प्रक्रिया के तहत सबसे पहले सामानों को बड़े ट्रकों पर लादा जाता है, जिसके बाद उन्हें ओमान की इंटरलिंक सड़कों के माध्यम से सऊदी अरब के बंदरगाहों पर भेजा जाता है। आंकड़ों के मुताबिक, इस वैकल्पिक रूट पर वर्तमान में हर दिन कम से कम 3500 ट्रक संचालित हो रहे हैं। ईरान के साथ चल रहे क्षेत्रीय तनाव के कारण यूएई को सबसे अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि वर्तमान में उसके पास तेल आपूर्ति के लिए कोई अन्य सीधा और सुरक्षित समुद्री रास्ता उपलब्ध नहीं है।

प्रधानमंत्री मोदी और मोहम्मद बिन जायद की कूटनीतिक वार्ता

यूएई की अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मोहम्मद बिन जायद (MBZ) से मुलाकात की और विभिन्न द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की। इस महत्वपूर्ण मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित रूप से खोलने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि होर्मुज का सुरक्षित और खुला रहना पूरी दुनिया के लिए अनिवार्य है और यहां सभी गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत ही संचालित होनी चाहिए। गौरतलब है कि 6 मार्च 2026 से होर्मुज का रास्ता बंद है और वहां से जहाजों का गुजरना पूरी तरह से ईरान की अनुमति पर निर्भर हो गया है। जंग की स्थिति शुरू होने के बाद से अब तक भारत के लगभग 15 जहाज फारस की खाड़ी से सुरक्षित रूप से निकले हैं।

ब्रिक्स बैठक और भविष्य की ऊर्जा रणनीति

नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी यूएई ने होर्मुज के रास्ते को खोलने के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। होर्मुज के बंद होने से यूएई की आर्थिक स्थिति पर गहरा प्रभाव पड़ा है, जिसे ठीक करने के लिए यूएई ने अब आक्रामक रूप से तेल उत्पादन बढ़ाने और स्वतंत्र आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने का फैसला किया है। 2027 तक 5 मिलियन बैरल प्रतिदिन के उत्पादन लक्ष्य के साथ, यूएई वैश्विक तेल बाजार में अपनी स्थिति को और अधिक सुदृढ़ करना चाहता है। यह पाइपलाइन परियोजना न केवल यूएई के लिए बल्कि भारत जैसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ताओं के लिए भी एक बड़ी राहत साबित होगी, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर हैं।

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