विज्ञापन

प्रतापगढ़ DMF विवाद: सांसद मन्नालाल रावत ने कलेक्टर पर लगाए काम रोकने के आरोप

प्रतापगढ़ DMF विवाद: सांसद मन्नालाल रावत ने कलेक्टर पर लगाए काम रोकने के आरोप
विज्ञापन

लोकसभा में गूंजा प्रतापगढ़ DMF का मामला

उदयपुर से भारतीय जनता पार्टी के सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने लोकसभा के शून्यकाल (Zero Hour) के दौरान राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) के तहत स्वीकृत विकास कार्यों में हो रही देरी का मुद्दा उठाया। सांसद ने प्रतापगढ़ की जिला कलेक्टर डॉ. अंजलि राजोरिया की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए और आरोप लगाया कि प्रशासनिक स्तर पर जानबूझकर जनहित के कार्यों को रोका जा रहा है। उन्होंने सदन के माध्यम से इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

54 में से केवल 3 कार्यों को मिली अनुमति

सांसद मन्नालाल रावत ने सदन को सूचित किया कि प्रतापगढ़ में DMF की बैठक के दौरान कुल 54 विकास कार्यों को सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई थी। इन परियोजनाओं में शिक्षा, पेयजल और बुनियादी ढांचे से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य शामिल थे। सांसद के अनुसार, इन सभी कार्यों को राज्य सरकार से आवश्यक वित्तीय स्वीकृति भी प्राप्त हो चुकी थी। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि जिला कलेक्टर ने अपनी व्यक्तिगत मर्जी का उपयोग करते हुए केवल 3 कार्यों को ही आगे बढ़ने की अनुमति दी, जबकि शेष 51 महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर रोक लगा दी गई है।

शिक्षा और पेयजल परियोजनाओं पर पड़ा असर

विकास कार्यों के रुकने से खनन प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले स्थानीय निवासियों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है और सांसद ने बताया कि रोके गए कार्यों में जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने जैसे अति आवश्यक प्रोजेक्ट शामिल हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत 2047' के विजन को धरातल पर उतारने के लिए इन कार्यों का समय पर पूरा होना अनिवार्य है, लेकिन प्रशासनिक बाधाओं के कारण विकास की गति धीमी हो गई है।

DMF की अध्यक्षता को लेकर उठाई मांग

सांसद रावत ने DMF की वर्तमान व्यवस्था में बदलाव की वकालत करते हुए एक महत्वपूर्ण मांग रखी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में DMF की गवर्निंग काउंसिल की अध्यक्षता जिला कलेक्टर द्वारा की जाती है, जो कई बार जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकताओं और स्थानीय आवश्यकताओं के बीच टकराव का कारण बनती है। उन्होंने मांग की कि DMF का अध्यक्ष संबंधित क्षेत्र के लोकसभा सांसद को बनाया जाना चाहिए और उनके अनुसार, इससे विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करने में पारदर्शिता आएगी और जनता के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित होगी।

प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बढ़ता टकराव

यह पहला अवसर नहीं है जब प्रतापगढ़ में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच मतभेद सामने आए हैं। सांसद ने सदन में स्पष्ट किया कि वे इस समस्या के समाधान के लिए पहले भी राजस्थान के मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को पत्र लिख चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिले में अधिकारियों और निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच समन्वय की कमी के कारण आम जनता को नुकसान उठाना पड़ रहा है। सांसद ने जोर देकर कहा कि स्वीकृत सभी 54 कार्यों को बिना किसी देरी के तुरंत धरातल पर लागू किया जाना चाहिए ताकि क्षेत्र का संतुलित विकास हो सके।

विज्ञापन