कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 18 साल के सार्थक की जमकर तारीफ की है और उनका एक वीडियो अपने सोशल मीडिया हैंडल पर साझा किया है। राहुल गांधी ने सार्थक की सराहना करते हुए लिखा कि सार्थक की उम्र भले ही केवल 18 साल है, लेकिन उनकी सोच, साहस और सिद्धांत किसी भी बड़े व्यक्ति से कम नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सार्थक और उनके साथी निसर्ग ने वह काम कर दिखाया है जो देश के बड़े मीडिया संस्थान और खोजी पत्रकार भी नहीं कर पाए और इन युवाओं ने सीबीएसई और कोएम्प्ट (COEMPT) के बीच की कथित मिलीभगत को पूरे देश के सामने लाकर रख दिया है।
युवा शक्ति और सरकार पर कटाक्ष
सार्थक की तारीफ करते हुए राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री पर भी निशाना साधा। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि मोदी जी चाहते हैं कि हमारे देश के युवा केवल रील्स बनाने और पकौड़े तलने में व्यस्त रहें और कभी कोई सवाल न पूछें। राहुल गांधी के अनुसार, सरकार चाहती है कि युवा अपनी आंखें बंद रखें, लेकिन इन बच्चों ने न केवल कठिन सवाल पूछे, बल्कि उनके जवाब भी ढूंढ निकाले। उन्होंने सार्थक की तुलना देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी से करते हुए कहा कि देश का 18 साल का बच्चा सीबीआई से भी तेज निकला है। राहुल गांधी ने इसे नौजवानों की जीत और सरकार की हार करार दिया। उन्होंने कहा कि यही भारत की असली युवा शक्ति है जो जिज्ञासु, जागरूक और जानकार है।
क्या था सीबीएसई ओएसएम विवाद?
सीबीएसई ओएसएम (ऑन-स्क्रीन मार्किंग) विवाद का मामला मई 2026 में गरमाया था। यह विवाद कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं के डिजिटल मूल्यांकन सिस्टम से जुड़ा था, जिसमें बड़े पैमाने पर तकनीकी और प्रशासनिक खामियों की शिकायतें मिली थीं। इस विवाद के बढ़ने के बाद 2 जून 2026 को केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए सीबीएसई के तत्कालीन चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार का यह कड़ा एक्शन सार्थक द्वारा पेश किए गए एक विस्तृत प्रेजेंटेशन के बाद ही लिया गया था।
सार्थक का 7 पेज का प्रेजेंटेशन
सार्थक खुद सीबीएसई बोर्ड के कक्षा 12 के छात्र थे और उन्होंने इसी साल अपनी बोर्ड परीक्षाएं दी थीं। परिणाम आने के बाद उन्हें मार्किंग सिस्टम पर संदेह हुआ और उन्होंने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की जांच की मांग की। इसके बाद सार्थक ने एक 7 पेज का विस्तृत प्रेजेंटेशन तैयार किया, जिसमें उन्होंने ऑन-स्क्रीन मार्किंग के लिए वेंडर्स (कंपनियों) के चयन की टेंडर प्रक्रिया में मौजूद गंभीर खामियों को उजागर किया। उन्होंने बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सीधे सवाल उठाए और यह बताया कि कैसे चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी थी और इसी रिपोर्ट के आधार पर बोर्ड के शीर्ष अधिकारियों पर कार्रवाई की गई।
छात्रों के आरोप और मूल्यांकन में गड़बड़ी
इस पूरे विवाद के दौरान छात्रों ने कई गंभीर आरोप लगाए थे। छात्रों का कहना था कि स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं की कॉपियां इतनी धुंधली थीं कि उन्हें पढ़ना मुश्किल था। इसके अलावा, कई छात्रों ने दावा किया कि कॉपियों में दिख रही लिखावट उनकी वास्तविक लिखावट से मेल नहीं खा रही थी। मार्किंग में भी भारी गड़बड़ियों की बात सामने आई थी, जहां छात्रों के अंक उनके प्रदर्शन के अनुरूप नहीं थे। इन विसंगतियों के कारण बड़ी संख्या में छात्रों ने पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया था। राहुल गांधी ने अपने संदेश के अंत में विश्वास जताया कि देश का भविष्य अब किसी के बहकावे में नहीं आएगा क्योंकि युवा अब जागरूक हो चुके हैं।