राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मंगलवार को सदन में उस समय भारी हंगामा हुआ जब गौ संरक्षण के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। हवामहल से भाजपा विधायक बालमुकुंद आचार्य ने गाय को 'राज्य माता' का दर्जा देने के संबंध में सरकार से सवाल पूछा था। सरकार की ओर से दिए गए जवाब में स्पष्ट किया गया कि वर्तमान में ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। इस जवाब के बाद विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया। विवाद तब और गहरा गया जब हिंगोनिया गौशाला का मुद्दा चर्चा में आया। इस दौरान भाजपा विधायक गोपाल शर्मा का नाम सामने आने पर वह अत्यधिक क्रोधित हो गए। उन्होंने सदन में घोषणा की कि यदि गौशाला मामले में उनका कोई भी व्यक्ति संलिप्त पाया गया, तो वह विधानसभा की सदस्यता से तत्काल इस्तीफा दे देंगे।
सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद का घटनाक्रम
हंगामे के कारण जब सदन की कार्यवाही को स्थगित कर दिया गया, तब भी स्थिति सामान्य नहीं हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विधायक गोपाल शर्मा सदन की मर्यादा को दरकिनार करते हुए सीधे विपक्ष की बेंचों की ओर चले गए। वहां उनकी मुलाकात प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और पूर्व मंत्री अशोक चांदना से हुई। देखते ही देखते बहस इतनी उग्र हो गई कि दोनों पक्षों के बीच शारीरिक संघर्ष की नौबत आ गई। गोपाल शर्मा और विपक्षी नेताओं के बीच तीखी बयानबाजी हुई, जिससे सदन के भीतर तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई। इस दौरान अन्य विधायकों ने स्थिति को संभालने का प्रयास किया, लेकिन विवाद बढ़ता ही गया।
मंत्रियों का बीच-बचाव और सुरक्षात्मक कदम
जब स्थिति हाथापाई तक पहुंचने वाली थी, तब संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल और अन्य वरिष्ठ विधायकों ने हस्तक्षेप किया। मंत्रियों ने गोपाल शर्मा को समझाने का प्रयास किया और उन्हें विपक्ष की बेंचों से दूर ले गए। सुरक्षा और मर्यादा को ध्यान में रखते हुए विधायक गोपाल शर्मा को सदन की लॉबी में ले जाया गया, जिसके बाद मामला कुछ शांत हुआ और सदन के भीतर इस तरह के व्यवहार को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के वरिष्ठ नेताओं ने चिंता व्यक्त की। संसदीय कार्य मंत्री ने विधायकों से सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न होने देने की बात कही।
गोपाल शर्मा का माफीनामा और सोशल मीडिया संदेश
सदन में हुए इस घटनाक्रम के कुछ समय बाद भाजपा विधायक गोपाल शर्मा ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो संदेश जारी किया, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया कि आवेश में आकर उन्होंने सदन की मर्यादा का उल्लंघन किया। शर्मा ने कहा कि वह एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि हैं और उन्हें इस तरह का व्यवहार नहीं करना चाहिए था और उन्होंने अपने वीडियो में स्पष्ट किया कि उन्हें अपनी इस हरकत पर आजीवन खेद रहेगा। विधायक ने सदन के सभी सदस्यों और राजस्थान की जनता से इस अशोभनीय घटना के लिए क्षमा याचना की।
विपक्ष की प्रतिक्रिया और टीकाराम जूली के आरोप
इस पूरे घटनाक्रम के बाद नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की और भाजपा विधायक के व्यवहार की कड़े शब्दों में निंदा की। जूली ने आरोप लगाया कि राजस्थान विधानसभा के इतिहास में इस तरह का व्यवहार पहले कभी नहीं देखा गया। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा के विधायक गौ हत्या के मामलों में संलिप्त लोगों को संरक्षण दे रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष ने मांग की कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष सदन की गरिमा को बचाने के लिए इस मुद्दे को आगे भी उठाता रहेगा।