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राजस्थान विधानसभा: विधायक ने की स्टेट हाईवे टोल मुक्त करने की मांग

राजस्थान विधानसभा: विधायक ने की स्टेट हाईवे टोल मुक्त करने की मांग
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राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र के दौरान प्रदेश के स्टेट हाईवे को टोल मुक्त करने की मांग एक बार फिर जोर-शोर से उठी है। भारतीय जनता पार्टी के विधायक बहादुर सिंह कोली ने सदन में पर्ची के माध्यम से इस मुद्दे को उठाते हुए राज्य सरकार से प्रदेश के सभी स्टेट हाईवे से टोल नाके हटाने का आग्रह किया और कोली ने टोल व्यवस्था की तुलना एक 'बीमारी' से करते हुए कहा कि इससे आम जनता और विशेषकर किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।

टोल व्यवस्था को बताया जनता पर बोझ

विधायक बहादुर सिंह कोली ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि स्टेट हाईवे पर लगने वाला टोल आम नागरिकों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। उन्होंने पूर्ववर्ती वसुंधरा राजे सरकार के कार्यकाल का स्मरण कराते हुए कहा कि उस समय राज्य सरकार ने जनहित में स्टेट हाईवे को टोल मुक्त कर दिया था। कोली के अनुसार, बाद में आई कांग्रेस सरकार ने इस नीति को पलटते हुए दोबारा टोल वसूली शुरू कर दी, जिसे उन्होंने जनता के साथ अन्याय करार दिया।

सीमित दायरे में टोल नाकों की अधिकता

विधायक ने अपने निर्वाचन क्षेत्र वैर का उदाहरण देते हुए टोल नाकों के सघन जाल पर चिंता व्यक्त की और उन्होंने बताया कि वैर विधानसभा क्षेत्र के इकरामपुर में एक टोल नाका स्थित है, जबकि इसके मात्र 3 से 4 किलोमीटर के दायरे में ही भुसावर और छोकरवाड़ा जैसे अन्य टोल नाके भी संचालित हो रहे हैं। कोली ने तर्क दिया कि इतनी कम दूरी पर कई टोल नाकों का होना नियमों और जनहित के विरुद्ध है, जिससे स्थानीय परिवहन और कृषि गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

पीडब्ल्यूडी मंत्री से नीतिगत बदलाव का आग्रह

सदन में अपनी बात रखते हुए विधायक ने सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री से मांग की कि इस समस्या का समाधान केवल एक क्षेत्र तक सीमित न रहकर पूरे राजस्थान के लिए किया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को पुरानी नीति को पुनः लागू करते हुए पूरे प्रदेश को स्टेट हाईवे टोल से मुक्त करना चाहिए। विधायक के अनुसार, इस कदम से न केवल महंगाई पर लगाम लगेगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में आवाजाही भी सुगम होगी।

राजनीतिक और आर्थिक विश्लेषण

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, विधानसभा में सत्तापक्ष के विधायक द्वारा ही अपनी सरकार के सामने यह मांग रखना महत्वपूर्ण संकेत है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार इस दिशा में कोई कदम उठाती है, तो इसका सीधा लाभ मध्यम वर्ग और परिवहन क्षेत्र को मिलेगा। हालांकि, टोल हटाने से राज्य के राजस्व और सड़कों के रखरखाव के बजट पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन करना भी विभाग के लिए एक चुनौती हो सकता है। फिलहाल, सरकार ने इस पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

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