मिलावट पर वार: जयपुर में 300 किलो पनीर नष्ट, फलोदी में अवैध फैक्ट्री सीज

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मिलावट पर वार: जयपुर में 300 किलो पनीर नष्ट, फलोदी में अवैध फैक्ट्री सीज
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त्योहारी सीजन के दौरान जनस्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राजस्थान के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण विभाग ने प्रदेशभर में 'शुद्ध आहार-मिलावट पर वार' अभियान को और अधिक तेज कर दिया है। रविवार को विभाग की विभिन्न टीमों ने राज्य के अलग-अलग हिस्सों में सघन निरीक्षण, सैंपलिंग, जब्ती और सीलिंग की बड़ी कार्रवाइयां कीं। इस अभियान के तहत जयपुर में 300 किलो संदिग्ध और मिलावटी पनीर को नष्ट किया गया, जबकि फलोदी जिले में एक अवैध वनस्पति फैट निर्माण इकाई पर छापा मारकर 690 किलो वनस्पति फैट जब्त किया गया है।

जयपुर के झोटवाड़ा में बड़ी कार्रवाई

खाद्य सुरक्षा विभाग की जयपुर मुख्यालय स्थित केंद्रीय टीम ने झोटवाड़ा क्षेत्र में संचालित एक डेयरी का औचक निरीक्षण किया और निरीक्षण के दौरान टीम ने पाया कि वहां पनीर का भंडारण बेहद अस्वास्थ्यकर और अनहाइजीनिक तरीके से किया गया था। विभाग के अधिकारियों ने मौके से पनीर के नमूने लिए और जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए करीब 300 किलो पनीर को मौके पर ही नष्ट करवा दिया। प्राथमिक जांच में इस पनीर को अनसेफ फूड यानी असुरक्षित भोजन की श्रेणी में पाया गया था, जिसके बाद इसे बाजार में बिकने से रोकने के लिए तुरंत नष्ट करने का निर्णय लिया गया।

फलोदी में अवैध फैक्ट्री पर छापा और सीलिंग

इसी कड़ी में फलोदी जिले के खींचन गांव में एक अवैध रूप से संचालित हो रही वनस्पति फैट निर्माण इकाई का भंडाफोड़ किया गया। खाद्य सुरक्षा टीम ने जब वहां छापा मारा, तो मौके पर भारी मात्रा में कच्चा माल, पैकिंग मशीनें और तैयार उत्पाद बरामद हुए। कार्रवाई के दौरान टीम ने लगभग 690 किलो वनस्पति फैट को अपने कब्जे में लेकर जब्त कर लिया। इसके साथ ही, नियमों का उल्लंघन कर चलाई जा रही इस निर्माण इकाई को तत्काल प्रभाव से सीज कर दिया गया है। यह कार्रवाई अवैध खाद्य उत्पादन इकाइयों के खिलाफ विभाग के सख्त रुख को दर्शाती है।

धौलपुर के सरमथुरा में सैंपलिंग अभियान

धौलपुर जिले के सरमथुरा कस्बे में भी खाद्य सुरक्षा अधिकारी पदम सिंह परमार के नेतृत्व में सघन जांच अभियान चलाया गया। टीम ने स्थानीय प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच की और इस दौरान एक डेयरी से मिश्रित दूध का नमूना लिया गया और एक मिष्ठान भंडार से घेवर के नमूने एकत्रित किए गए। इन सभी नमूनों को विस्तृत जांच के लिए खाद्य प्रयोगशाला भेजा गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रयोगशाला से रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद, मिलावट पाए जाने पर संबंधित पक्षों के खिलाफ कड़ी विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

उच्चाधिकारियों के सख्त निर्देश

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने इस अभियान की प्रगति की समीक्षा करते हुए कहा कि जनस्वास्थ्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और उन्होंने बताया कि दूध, मावा, मिठाई, पनीर और घी जैसे अधिक मांग वाले खाद्य पदार्थों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। मिलावटखोरी और खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के मामलों में विभाग जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रहा है। रविवार को हुई कार्रवाइयां इसी रणनीति का हिस्सा हैं ताकि त्योहारों के समय लोगों को शुद्ध आहार मिल सके।

भविष्य की रणनीति और जन भागीदारी

अतिरिक्त आयुक्त भगवत सिंह ने जानकारी दी कि त्योहारी मांग को देखते हुए राज्य और जिला स्तरीय टीमों को लगातार फील्ड में रहने और सैंपलिंग करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई भी खाद्य पदार्थ सब-स्टैंडर्ड, अनसेफ या मिसब्रांडेड पाया जाता है, तो खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत कठोर दंडात्मक और अभियोजनात्मक कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने सभी खाद्य कारोबारियों से स्वच्छता और गुणवत्ता मानकों का पालन करने की अपील की है। साथ ही, आम जनता से भी अनुरोध किया गया है कि वे किसी भी संदिग्ध या मिलावटी खाद्य पदार्थ की सूचना विभाग को दें ताकि समय रहते उचित कार्रवाई की जा सके।

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