राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव में हो रही देरी को लेकर हाई कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। बुधवार को इस मामले से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने राज्य सरकार और संबंधित आयोगों को जमकर फटकार लगाई और कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनाव प्रक्रिया में हो रही देरी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हाई कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग से चुनाव कराने की और ओबीसी आयोग से अपनी रिपोर्ट पेश करने की एक निश्चित समय-सीमा बताने को कहा है। इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई अब 20 जुलाई को निर्धारित की गई है।
अदालत में अधिकारियों की व्यक्तिगत पेशी
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट का लहजा काफी सख्त रहा। कोर्ट ने पहले ही आदेश दिया था कि राज्य चुनाव आयुक्त और ओबीसी आयोग के सचिव को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित रहना होगा। कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया था कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़े राज्य सरकार के सभी जिम्मेदार अधिकारी सुनवाई के दौरान मौजूद रहें। इसी आदेश के अनुपालन में राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह और ओबीसी आयोग के सदस्य सचिव अशोक कुमार जैन कोर्ट में पेश हुए और अपनी स्थिति स्पष्ट की।
निर्वाचन आयुक्त का पक्ष और तकनीकी अड़चनें
राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने कोर्ट को बताया कि ओबीसी आयोग ने उन्हें एक पत्र के माध्यम से सूचित किया है कि वे 14 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट पेश करेंगे। उन्होंने कोर्ट को आश्वस्त किया कि निर्वाचन आयोग ने चुनाव कराने की अपनी पूरी तैयारी कर ली है और मतदाता सूचियों का प्रकाशन भी किया जा चुका है और हालांकि, सीटों के आरक्षण के लिए ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का इंतजार है। राजेश्वर सिंह ने कहा कि यदि सरकार आरक्षण का वर्गीकरण करके लॉटरी निकाल देती है, तो आयोग मात्र 2 दिन के भीतर चुनाव का नोटिफिकेशन जारी करने की स्थिति में है।
ओबीसी आयोग की दलील और कोर्ट की नाराजगी
ओबीसी आयोग के सचिव ने सुनवाई के दौरान अपनी सफाई में कहा कि उन्हें जो डेटा प्राप्त हुआ था, वह रिपोर्ट तैयार करने के लिए पर्याप्त नहीं था और इसी कारण आयोग को नए सिरे से सर्वे करवाना पड़ रहा है, जिसमें समय लगना स्वाभाविक है। इस दलील पर हाई कोर्ट ने गहरी नाराजगी व्यक्त की। कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब 31 जुलाई तक चुनाव संपन्न कराने के निर्देश दिए गए थे, तो आयोग 14 अगस्त की तारीख कैसे दे सकता है। कोर्ट ने यह भी याद दिलाया कि जब 9 मई 2025 को सरकार ने 3 महीने के लिए इस कमीशन का गठन किया था, तो अब तक रिपोर्ट क्यों नहीं दी गई। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर आपसे काम नहीं होता है तो मना कर दीजिए।
अवमानना की कार्रवाई की चेतावनी
हाई कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयुक्त से यह भी कहा कि बिना ओबीसी कमीशन की रिपोर्ट के भी चुनाव कराए जा सकते हैं। कोर्ट ने पूछा कि आपने लॉटरी निकालकर वह प्रक्रिया शुरू क्यों नहीं की और कोर्ट ने सख्त लहजे में पूछा कि क्या आप चाहते हैं कि हम आपके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करें। जजों ने याद दिलाया कि पहले भी जब 15 अप्रैल की तारीख दी गई थी, तब आयोग ने उस तारीख के बाद का कार्यक्रम जारी किया था। कोर्ट ने पूछा कि क्या आपको अदालत के आदेशों की परवाह नहीं है।
सोमवार तक का समय और भविष्य की रूपरेखा
निर्वाचन आयुक्त ने जवाब दिया कि कोर्ट के आदेशानुसार वे प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए राज्य सरकार को लॉटरी निकालनी होगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने अभी तक आरक्षण का वर्गीकरण नहीं दिया है और इस पर हाई कोर्ट ने कहा कि यह टालमटोल वाला रवैया ठीक नहीं है और उन्हें हर हाल में तारीख चाहिए। राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने कोर्ट से सोमवार तक का समय मांगा है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि ओबीसी आयोग सोमवार को रिपोर्ट पेश करने की एक पक्की तारीख बताए, जो 14 अगस्त नहीं हो सकती। साथ ही निर्वाचन आयोग से लॉटरी और चुनाव की तारीख मांगी गई है। बता दें कि 22 मई 2026 को हाई कोर्ट ने आदेश दिया था कि सभी स्थानीय निकायों के चुनाव 31 जुलाई 2026 तक पूरे किए जाएं। डेडलाइन नजदीक आने पर सरकार ने समय बढ़ाने का आवेदन किया था।